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धनंजय तिवारी की निशानदेही पर कारबाइन, पिस्टल बरामद
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 17 Jun 2016 08:24 PM IST
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पिपरौली के पूर्व ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख लाल बहादुर यादव की हत्या में इस्तेमाल कारबाइन और पिस्टल कैंट पुलिस ने शुक्रवार को बरामद किया। जेल में बंद धनंजय को कैंट पुलिस ने सुबह 10 घंटे की रिमांड पर लिया था। पूछताछ में उसने असलहा गांव के बाहर सीवान में छुपाने की जानकारी दी। निशानदेही पर पुलिस उसे साथ में लेकर मौके पर पहुंची और जमीन खोदकर असलहा बरामद कर लिया। देर शाम पुलिस ने उसे जेल भेज दिया।
20 मई 2014 को पिपरौली के पूर्व ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख लाल बहादुर यादव की यूनिवर्सिटी के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विवेचना के दौरान बेलीपार, भौवापार के धनंजय तिवारी समेत 14 लोग का नाम हत्या और साजिश में सामने आया। बारह बदमाश जेल चले गए थे लेकिन धनंजय और गगहा का रहने वाला उसका साथी प्रिंस चंद फरार चल रहे थे। तीन जून को एसओ शाहपुर रामाज्ञा सिंह ने मुखबिर की सूचना पर रेल विहार कॉलोनी के पास 12 हजार रुपये के इनामी बदमाश धनंजय तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
पूछताछ में उसने ठेके के विवाद में पिपरौली ब्लॉक के पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख लाल बहादुर की हत्या करने की बात स्वीकारा किया था। वारदात में इस्तेमाल की गई कारबाइन और पिस्टल पुलिस को नहीं मिली। असलहा बरामद करने के लिए कैंट पुलिस ने शुक्रवार को दस घंटे के लिए धनंजय को कस्टडी रिमांड पर लिया था। उसकी निशानदेही पर एसएसआई कैंट एसएन सिंह, दरोगा अशोक दूबे, उमेश यादव, राजकुमार सिंह के साथ बेलीपार के भौवापार गांव में सीवान के पास जमीन में दबाकर रखे गए असलहे को बरामद किया।
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एसएसआई एसएन सिंह ने बताया कि धनंजय ने प्लास्टिक के थैले में असलहा बांधकर छुपाया था। शाम सात बजे कैंट पुलिस ने धनंजय को जेल भेज दिया।
धनंजय पर दर्ज हैं 14 मुकदमे
साल 2002 में धनंजय पर पहला मुकदमा मारपीट का दर्ज हुआ था। इसके बाद 2003 में नौसढ़ चौराहे पर सिपाही से मारपीट के दौरान गोली चलने से सिपाही घायल हो गया था। इसके अलावा हत्या का प्रयास, लूट और आर्म्स एक्ट के कुल 14 मुकदमे धनंजय पर दर्ज हैं। फरारी के दौरान वह सीवान में रहने वाले सोनू सिंह के पास रहता था। सोनू मऊ के रहने वाले बदमाश रमेश उर्फ काका का करीबी है। पूछताछ में उसने कारबाइन सोनू के पास होने की जानकारी दी।
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20 मई 2014 को पिपरौली के पूर्व ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख लाल बहादुर यादव की यूनिवर्सिटी के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विवेचना के दौरान बेलीपार, भौवापार के धनंजय तिवारी समेत 14 लोग का नाम हत्या और साजिश में सामने आया। बारह बदमाश जेल चले गए थे लेकिन धनंजय और गगहा का रहने वाला उसका साथी प्रिंस चंद फरार चल रहे थे। तीन जून को एसओ शाहपुर रामाज्ञा सिंह ने मुखबिर की सूचना पर रेल विहार कॉलोनी के पास 12 हजार रुपये के इनामी बदमाश धनंजय तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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पूछताछ में उसने ठेके के विवाद में पिपरौली ब्लॉक के पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख लाल बहादुर की हत्या करने की बात स्वीकारा किया था। वारदात में इस्तेमाल की गई कारबाइन और पिस्टल पुलिस को नहीं मिली। असलहा बरामद करने के लिए कैंट पुलिस ने शुक्रवार को दस घंटे के लिए धनंजय को कस्टडी रिमांड पर लिया था। उसकी निशानदेही पर एसएसआई कैंट एसएन सिंह, दरोगा अशोक दूबे, उमेश यादव, राजकुमार सिंह के साथ बेलीपार के भौवापार गांव में सीवान के पास जमीन में दबाकर रखे गए असलहे को बरामद किया।
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एसएसआई एसएन सिंह ने बताया कि धनंजय ने प्लास्टिक के थैले में असलहा बांधकर छुपाया था। शाम सात बजे कैंट पुलिस ने धनंजय को जेल भेज दिया।
धनंजय पर दर्ज हैं 14 मुकदमे
साल 2002 में धनंजय पर पहला मुकदमा मारपीट का दर्ज हुआ था। इसके बाद 2003 में नौसढ़ चौराहे पर सिपाही से मारपीट के दौरान गोली चलने से सिपाही घायल हो गया था। इसके अलावा हत्या का प्रयास, लूट और आर्म्स एक्ट के कुल 14 मुकदमे धनंजय पर दर्ज हैं। फरारी के दौरान वह सीवान में रहने वाले सोनू सिंह के पास रहता था। सोनू मऊ के रहने वाले बदमाश रमेश उर्फ काका का करीबी है। पूछताछ में उसने कारबाइन सोनू के पास होने की जानकारी दी।