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बेलीपार, पिपराइच में हुई डकैती की घटना खुली
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Jan 2016 08:37 PM IST
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बांसी में पुलिस की मुठभेड़ में पकड़े गए डकैतों के गिरोह ने बेलीपार और पिपराइच में डकैती डाली थी। पीड़ित परिवार के लोगों ने पकड़े गए डकैतों की फोटो देख उनकी पहचान की। पूछताछ में इन लोगों ने दोनों वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार किया। पुलिस से हुई मुठभेड़ में घायल दो डकैत मेडिकल कॉलेज में भर्ती है।
मुठभेड़ में पकड़े गए डकैतों से सीओ चौरीचौरा एसएन सिंह, एसओ बेलीपार गौरव सिंह, एसओ पिपराइच अजय ओझा ने क्राइम ब्रांच की टीम के साथ पूछताछ की। सिद्धार्थनगर पुलिस की गिरफ्त में आए डकैतों ने छह जनवरी 2016 को पिपराइच के जंगल धूसड़ में डेरी संचालक विजय निषाद और 20 नवंबर 2015 की रात बेलीपार के मेहरौली में छत्तीसगढ़ पुलिस में तैनात रामसंवारे के भाई की हत्या कर डकैती डालने की घटना में शामिल होने की बात कबूल की।
पूछताछ के बाद पुलिस ने विजय के साथ ही रामसंवारे के घरवालों को डकैतों की फोटो दिखाकर पहचान कराई। परिवार की महिलाएं ने सभी को पहचान लिया। मेडिकल कॉलेज में भर्ती कन्नौज, जैनपुर के रहने वाले डकैत साहिल (25), साहेब (23) से भी पुलिस ने पूछताछ की। डकैतों के गिरोह में कुल महिलाएं समेत कुल 22 लोग शामिल है।
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सिनेमा देखने के बाद डाली थी डकैती
जंगल धूसड़ में डेरी संचालक विजय निषाद के घर डकैती डालने से पहले डकैतों ने छह जनवरी को विजय चौराहे पर स्थित सिनेमा हाल में दो शो फिल्म देखी थी। शाम छह बजे दो से तीन का ग्रुप बनाकर वह तिनकोनिया जंगल के पास पहुंचे। रात 11:30 बजे तक जंगल में रहने के बाद डकैती डालने एक साथ निकले थे। वारदात के बाद यह लोग जंगल आकर छिप गए थे। अगले दिन सुबह एक - एक की संख्या में धर्मशाला पहुंचे थे। एक दिन पहले इन लोगों ने रेकी की थी।
सजावट देख सिपाही के घर बोला था धावा
20 नवंबर की रात बेलीपार के मेहरौली में रहने वाले छत्तीसगढ़ पुलिस के सिपाही रामसंवारे के घर डकैतों ने सजावट देखकर धावा बोला था। गांव के किनारे एकांत में मकान होने के कारण अचानक योजना बनाकर धावा बोल दिया था। विरोध करने पर रामसंवारे के छोटे भाई श्रीराम की इन लोगों ने हत्या करने के साथ ही परिवार के सात लोगों की पिटाई कर घायल कर दिया था। वारदात के बाद गांव के बाहर बगीचे में जाकर छिप गए थे। पुलिस की हलचल खत्म होने के बाद पैदल ही निकल गए थे।
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मुठभेड़ में पकड़े गए डकैतों से सीओ चौरीचौरा एसएन सिंह, एसओ बेलीपार गौरव सिंह, एसओ पिपराइच अजय ओझा ने क्राइम ब्रांच की टीम के साथ पूछताछ की। सिद्धार्थनगर पुलिस की गिरफ्त में आए डकैतों ने छह जनवरी 2016 को पिपराइच के जंगल धूसड़ में डेरी संचालक विजय निषाद और 20 नवंबर 2015 की रात बेलीपार के मेहरौली में छत्तीसगढ़ पुलिस में तैनात रामसंवारे के भाई की हत्या कर डकैती डालने की घटना में शामिल होने की बात कबूल की।
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पूछताछ के बाद पुलिस ने विजय के साथ ही रामसंवारे के घरवालों को डकैतों की फोटो दिखाकर पहचान कराई। परिवार की महिलाएं ने सभी को पहचान लिया। मेडिकल कॉलेज में भर्ती कन्नौज, जैनपुर के रहने वाले डकैत साहिल (25), साहेब (23) से भी पुलिस ने पूछताछ की। डकैतों के गिरोह में कुल महिलाएं समेत कुल 22 लोग शामिल है।
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सिनेमा देखने के बाद डाली थी डकैती
जंगल धूसड़ में डेरी संचालक विजय निषाद के घर डकैती डालने से पहले डकैतों ने छह जनवरी को विजय चौराहे पर स्थित सिनेमा हाल में दो शो फिल्म देखी थी। शाम छह बजे दो से तीन का ग्रुप बनाकर वह तिनकोनिया जंगल के पास पहुंचे। रात 11:30 बजे तक जंगल में रहने के बाद डकैती डालने एक साथ निकले थे। वारदात के बाद यह लोग जंगल आकर छिप गए थे। अगले दिन सुबह एक - एक की संख्या में धर्मशाला पहुंचे थे। एक दिन पहले इन लोगों ने रेकी की थी।
सजावट देख सिपाही के घर बोला था धावा
20 नवंबर की रात बेलीपार के मेहरौली में रहने वाले छत्तीसगढ़ पुलिस के सिपाही रामसंवारे के घर डकैतों ने सजावट देखकर धावा बोला था। गांव के किनारे एकांत में मकान होने के कारण अचानक योजना बनाकर धावा बोल दिया था। विरोध करने पर रामसंवारे के छोटे भाई श्रीराम की इन लोगों ने हत्या करने के साथ ही परिवार के सात लोगों की पिटाई कर घायल कर दिया था। वारदात के बाद गांव के बाहर बगीचे में जाकर छिप गए थे। पुलिस की हलचल खत्म होने के बाद पैदल ही निकल गए थे।