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मेडिकल कॉलेज में इलाज न मिलने पर महिला की मौत
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 13 Jan 2016 08:40 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में बुधवार को जूनियर डॉक्टरों के उत्पात का एक और मामला सामने आया। कॉलेज में भर्ती कैंसर पीड़ित एक महिला की मौत पर जब तीमारदारों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया तो जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें जमकर पीट दिया। इससे डरे-सहमे तीमारदार आनन-फानन में महिला का शव लेकर चले गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने डॉक्टरों को समझा-बुझाकर शांत किया। उधर कॉलेज प्रशासन शिकायतकर्ता के सामने न आने पर कार्रवाई में असमर्थता जता रहा है।
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में शाहपुर की 65 वर्षीय महिला गायत्री देवी को कैंसर के इलाज के लिए घरवालों ने आईसीयू के वार्ड नंबर 14 में भर्ती कराया था। स्वास्थ्य में सुधार देख डॉक्टरों ने मंगलवार शाम उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया। लेकिन देर रात करीब साढ़े 11 बजे हालत फिर बिगड़ने पर बेटी कुसुम ने नाइट ड्यूटी कर रहे जूनियर डॉक्टर को इसकी जानकारी दी। सूचना के बाद भी डॉक्टर ने आने में देरी की। इस बीच गायत्री की मौत हो गई। यह देख कुसुम ने आपा खो दिया और जूनियर डॉक्टर से उलझ गई।
डॉक्टर ने इस बात की जानकारी हॉस्टल में अपने साथियों को दी तो करीब एक दर्जन जूनियर डॉक्टर मौके पर पहुंच गए और कुसुम के साथ वहां मौजूद एक और तीमारदार को पीट दिया। कुसुम ने 100 नंबर पर मामले की शिकायत की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने डॉक्टरों को समझा-बुझा कर शांत किया। लेकिन इसी बीच डॉक्टरों के डर से दोनों तीमारदार गायत्री का शव लेकर वहां से चले गए।
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घटना की जानकारी बुधवार को सुबह मिली तो जूनियर डॉक्टरों और वार्ड के कर्मचारियों से पूछताछ की। पूछताछ में मरीज का पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका। ऐसे में कार्रवाई की स्थिति नहीं बन सकी। शिकायतकर्ता अगर सामने आए तो जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. राम कुमार, एसआईसी, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
मंत्री की नसीहत पर भारी डॉक्टरों की मनमानी
चिकित्सा शिक्षा विभाग का राज्यमंत्री बनने के बाद राधेश्याम सिंह जब महीने भर पहले मेडिकल कॉलेज का मुआयना करने पहुंचे तो उन्होंने डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच हो रहे विवाद की लगातार आ रही शिकायत को रोकने की नसीहत दी थी। लेकिन नसीहत का भ्रम उसी दौरान तब टूट गया जब एक तरफ मंत्री मुआयना कर रहे थे और दूसरी तरफ मेडिसिन वार्ड के आईसीयू में एक तीमारदार डॉक्टरों से पिट रहा था। हालांकि जानकारी मिलने के बाद मंत्री ने प्राचार्य की क्लास ली और आगे से ऐसी शिकायत न मिलने की चेतावनी भी दी। लेकिन मंगलवार की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि डॉक्टरों की मनमानी मंत्री की नसीहत पर भारी है।
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मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में शाहपुर की 65 वर्षीय महिला गायत्री देवी को कैंसर के इलाज के लिए घरवालों ने आईसीयू के वार्ड नंबर 14 में भर्ती कराया था। स्वास्थ्य में सुधार देख डॉक्टरों ने मंगलवार शाम उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया। लेकिन देर रात करीब साढ़े 11 बजे हालत फिर बिगड़ने पर बेटी कुसुम ने नाइट ड्यूटी कर रहे जूनियर डॉक्टर को इसकी जानकारी दी। सूचना के बाद भी डॉक्टर ने आने में देरी की। इस बीच गायत्री की मौत हो गई। यह देख कुसुम ने आपा खो दिया और जूनियर डॉक्टर से उलझ गई।
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डॉक्टर ने इस बात की जानकारी हॉस्टल में अपने साथियों को दी तो करीब एक दर्जन जूनियर डॉक्टर मौके पर पहुंच गए और कुसुम के साथ वहां मौजूद एक और तीमारदार को पीट दिया। कुसुम ने 100 नंबर पर मामले की शिकायत की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने डॉक्टरों को समझा-बुझा कर शांत किया। लेकिन इसी बीच डॉक्टरों के डर से दोनों तीमारदार गायत्री का शव लेकर वहां से चले गए।
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घटना की जानकारी बुधवार को सुबह मिली तो जूनियर डॉक्टरों और वार्ड के कर्मचारियों से पूछताछ की। पूछताछ में मरीज का पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका। ऐसे में कार्रवाई की स्थिति नहीं बन सकी। शिकायतकर्ता अगर सामने आए तो जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. राम कुमार, एसआईसी, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
मंत्री की नसीहत पर भारी डॉक्टरों की मनमानी
चिकित्सा शिक्षा विभाग का राज्यमंत्री बनने के बाद राधेश्याम सिंह जब महीने भर पहले मेडिकल कॉलेज का मुआयना करने पहुंचे तो उन्होंने डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच हो रहे विवाद की लगातार आ रही शिकायत को रोकने की नसीहत दी थी। लेकिन नसीहत का भ्रम उसी दौरान तब टूट गया जब एक तरफ मंत्री मुआयना कर रहे थे और दूसरी तरफ मेडिसिन वार्ड के आईसीयू में एक तीमारदार डॉक्टरों से पिट रहा था। हालांकि जानकारी मिलने के बाद मंत्री ने प्राचार्य की क्लास ली और आगे से ऐसी शिकायत न मिलने की चेतावनी भी दी। लेकिन मंगलवार की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि डॉक्टरों की मनमानी मंत्री की नसीहत पर भारी है।