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बाप बेटा सदमे में, मची चीख पुकार
Updated Fri, 07 Jul 2017 10:03 PM IST
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गोरखपुर।
गीडा में सिलेंडर में विस्फोट होने से मां-बेटे की मौत के बाद से ही पिता-पुत्र सदमे में हैं। इलाके में जिसे भी घटना की जानकारी हुई, वे सन्न रहे गए। लोग अजय और उनके छोटे बेटे कुंदन को संभालने में लगे रहे। घटना की जानकारी उनके महराजगंज के सीयर गांव स्थित घर पहुंची तो वहां भी कोहराम मच गया। हादसे की खबर पाते ही घरवाले गीडा पहुंच गए।
दो बच्चों के भविष्य को संवारने की उम्मीद लेकर गीडा आए अजय तिवारी की दुनिया उजड़ सी गई है। वह गीडा की एक ब्रेड फैक्ट्री की वैन चलाकर परिवार की जीविका चलाते थे और बेटे रंजन और कुंदन को शिक्षा दिला रहे थे। लेकिन शुक्रवार की सुबह ने पलक झपकते ही सब कुछ बदल दिया। अजय ड्यूटी पर थे। घर पर पत्नी संध्या और बड़े बेटे रंजन की आग से जलकर दर्दनाक मौत हो गई। दोनों का शव पहचान में भी नहीं आ रहा था। छोटा बेटा मां का शव देख बेसुध हो गया। उसकी छोटी उम्र को देखते हुए तुरंत ही आसपास के लोगों ने कुंदन को वहां से हटा दिया लेकिन वह मां के पास जाने की जिद करता रहा। अजय भी खुद को नहीं संभाल पा रहे थे।
........
गांव से सगे संबंधी भी पहुंचे
हादसे की खबर पाकर महराजगंज पैतृक गांव से भी अजय के घरवाले और सगे-संबंधी गीडा पहुंच गए थे। देर शाम तक शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। घरवालों ने शव गांव ले जाने की सलाह दी है। फिलहाल अजय बेसुध थे, जिससे अभी अंतिम संस्कार कहां होगा, यह तय नहीं हो सका है।
गीडा में सिलेंडर में विस्फोट होने से मां-बेटे की मौत के बाद से ही पिता-पुत्र सदमे में हैं। इलाके में जिसे भी घटना की जानकारी हुई, वे सन्न रहे गए। लोग अजय और उनके छोटे बेटे कुंदन को संभालने में लगे रहे। घटना की जानकारी उनके महराजगंज के सीयर गांव स्थित घर पहुंची तो वहां भी कोहराम मच गया। हादसे की खबर पाते ही घरवाले गीडा पहुंच गए।
दो बच्चों के भविष्य को संवारने की उम्मीद लेकर गीडा आए अजय तिवारी की दुनिया उजड़ सी गई है। वह गीडा की एक ब्रेड फैक्ट्री की वैन चलाकर परिवार की जीविका चलाते थे और बेटे रंजन और कुंदन को शिक्षा दिला रहे थे। लेकिन शुक्रवार की सुबह ने पलक झपकते ही सब कुछ बदल दिया। अजय ड्यूटी पर थे। घर पर पत्नी संध्या और बड़े बेटे रंजन की आग से जलकर दर्दनाक मौत हो गई। दोनों का शव पहचान में भी नहीं आ रहा था। छोटा बेटा मां का शव देख बेसुध हो गया। उसकी छोटी उम्र को देखते हुए तुरंत ही आसपास के लोगों ने कुंदन को वहां से हटा दिया लेकिन वह मां के पास जाने की जिद करता रहा। अजय भी खुद को नहीं संभाल पा रहे थे।
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गांव से सगे संबंधी भी पहुंचे
हादसे की खबर पाकर महराजगंज पैतृक गांव से भी अजय के घरवाले और सगे-संबंधी गीडा पहुंच गए थे। देर शाम तक शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। घरवालों ने शव गांव ले जाने की सलाह दी है। फिलहाल अजय बेसुध थे, जिससे अभी अंतिम संस्कार कहां होगा, यह तय नहीं हो सका है।
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