नेपाल के केसिनो से भी मिले टेरर फंडिंग के सबूत
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एटीएस ने 24 मार्च को छापेमारी कर बलदेव प्लाजा से व्यापारी भाइयों की गिरफ्तारी की थी। इसके बाद ही शहर से ताबड़तोड़ तीन और गिरफ्तारी की गई। इनसे पूछताछ के बाद शनिवार को टीम दोबारा आई और तीन बड़े कारोबारियों से पूछताछ की। बताया जा रहा है कि ये लोग हवाला के अलावा टेरर फंडिंग से भी जुड़े हैं।
आसपास के जिलों के कारोबारी भी शामिल
गिरफ्तार किए गए आतंकियों के मददगारों से पूछताछ के बाद कई और व्यापारियों के नाम सामने आए हैं। इनमें गोरखपुर के अलावा आसपास के जिलों के भी कारोबारी शामिल हैं। शनिवार को चार आरोपितों को साथ लेकर दोबारा गोरखपुर आई एटीएस ने बलदेव प्लाजा में दो कारोबारियों से करीब आधे घंटे तक पूछताछ की थी। बताते हैं कि संदिग्धों की सूची में शामिल अन्य लोगों से भी पूछताछ की तैयारी चल रही है। उनके मोबाइल काल डिटेल, बैंकों से की गई लेनदेन तथा उनसे संपर्क रखने वाले लोगों के बारे में पता लगाया जा रहा है।
रिमांड पर लिए गए आरोपी जेल भेजे गए
रिमांड पर लिए गए सभी आरोपियों को रविवार को जेल भेज दिया गया। टेरर फंडिंग नेटवर्क से जुड़े आरोपियों को पांच दिन की कस्टडी रिमांड पर लिया गया था। एटीएस ने रविवार की शाम को रिमांड अवधि पूरी होने से पहले सभी अभियुक्तों का चिकित्सकीय परीक्षण कराने के बाद लखनऊ जेल पहुंचा दिया।
इनकम, सेल्स टैक्स डिमार्टमेंट और बैंक ने भी शुरू की जांच
एटीएस, पुलिस के साथ ही अन्य एजेंसियों ने भी जांच शुरू कर दी है। जिन व्यापारियों का नाम सामने आया है उनकी इनकम टैक्स, सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट और बैंक ने भी जांच शुरू कर दी है। बैंक डिटेल से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आए हैं।
रिमांड अवधि बढ़ाने की तैयारी
एटीएस आरोपियों को दोबारा रिमांड पर लेने की पहल करेगी। एटीएस के मुताबिक अब तक की जांच और पूछताछ में इस नेटवर्क के बारे में तमाम बातें सामने आई हैं। बावजूद इसके इस नेटवर्क का पूरी तरह भंडाफोड़ करने के लिए कई आरोपियों की रिमांड बढ़ाने की कोर्ट में अर्जी दी जाएगी। आईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि पूछताछ में सामने आए तथ्य के आधार पर नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। रिमांड बढ़ाने के लिए कोर्ट में अर्जी दी जाएगी।
पुलिस ने किराएदारों का सत्यापन किया शुरू
किराए के कमरे में अपना ठिकाना बनाकर आतंकियों के मददगार बनने वालों की गिरफ्तारी के बाद जिले की पुलिस ने सक्रियता बढ़ा दी है। अब पुलिस ने शहर में किराएदारों के सत्यापन के लिए अभियान शुरू किया है। रविवार को पहले दिन एसपी सिटी विनय सिंह और एसपी नार्थ गणेश साहा की अगुवाई में 316 किराएदारों का सत्यापन कर उनकी जानकारी जुटाई गई। शहर से 24 मार्च को एटीएस ने टेरर फंडिंग में शामिल छह लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें मुकेश, सुशील राय और निखिल राय उर्फ मुशर्रफ किराए के कमरे में रहते थे। सुशील और मुशर्रफ भरवलिया में और मुकेश झरना टोला में रहता था। इनकी गिरफ्तारी के बाद से ही मकान मालिक भी इनके बारे में हकीकत जान सके थे। इसके बाद ही पुलिस ने किराएदारों के सत्यापन का काम शुरू किया। एसएसपी ने शहर और कस्बे में किराए पर रहने वाले लोगों के सत्यापन का आदेश दिया था। रविवार को एसएसपी ने शहर के थानेदारों को अपने क्षेत्र के किरायदारों के सत्यापन कराया। एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि सत्यापन का अभियान जारी रहेगा।
मकान मालिकों से भी सत्यापन कराने की अपील
पुलिस ने मकान मालिकों से भी अपील किया है कि यदि उनके यहां किराएदार हैं तो उसका सत्यापन कराएं। थाना और चौकी की मदद से इस काम को कराकर पुलिस का सहयोग करें।
जनधन खातों को बनाया आतंकियों की मदद का ‘हथियार’
सरकारी योजना के तहत खुलवाए गए जनधन खातों को भी आतंकियों की मदद के लिए हथियार बना लिया गया। गरीबों के नाम पर खोले गए खातों की पासबुक और अन्य जरूरी दस्तावेज आतंकियों के मददगार अपने पास रखते थे। खाताधारक को लालच देकर उनके खातों से लेनदेन करते थे। पूछताछ में इसका खुलासा होने के बाद एटीएस ने बैंक से खातों का ब्योरा मांगा है। जनधन खातों की कई पासबुक भी एटीएस के हाथ लगी हैं, जिनकी जांच शुरू कर दी गई है।
गोरखपुर से व्यापारी भाइयों नसीम और नईम अरशद समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद से ही हवाला कारोबारियों का भी नेटवर्क खंगाला जा रहा है। शनिवार को दोबारा आई एटीएस टीम ने आतंकियों की मदद में पकड़े गए आरोपियों के मकान मालिकों से पूछताछ की। आरोपियों के कमरों से कई पासबुक और अहम दस्तावेज को भी टीम ने कब्जे में ले लिया। व्यापारी भाइयों की दुकान पर दोबारा पहुंची एटीएस ने 200 से ज्यादा पासबुकों को कब्जे में लिया है। इसमें से ज्यादातर पासबुक जनधन खातों से जुड़ी हैं। जांच में सामने आया है कि कर्मचारी और गरीब लोगों के नाम से जनधन खाते खोलवाकर उनके पासबुक व जरूरी दस्तावेज को आरोपी अपने पास रख लेते थे। उससे लेनदेन करते थे और जरूरत पड़ने पर खाताधारक को रकम की लालच देकर काम करवाते थे।