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50 हजार का इनामी तस्कर सुशील गिरफ्तार
siddharthnagar
Updated Wed, 11 Apr 2018 10:55 PM IST
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पुलिस की गिरफ्त में इनामी सुशील।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर।आठ वर्ष पहले पुलिस कस्टडी से फरार 50 हजार के इनामी सुशील तिवारी को गोरखपुर एसटीएफ व शोहरतगढ़ थाने की पुलिस टीम ने बुधवार को नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर के खुनुवा तिराहे से गिरफ्तार कर लिया। सुशील नेपाल के तौलिहवां का निवासी है। चरस तस्करी के मामले में वह लंबे समय से वांछित था। दो दिन पहले ही डीआईजी ने इनाम की राशि 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये की थी। पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार सुशील के तार माओवादियों से जुड़े रहे हैं।
बुधवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में प्रभारी एसपी अरविंद मिश्र ने बताया कि नेपाल के तौलिहवा थाने के नयाटोला निवासी सुशील तिवारी 38 किलो चरस के साथ 23 अगस्त 2008 में पकड़ा गया था। उसके साथी रोहित बरई को भी गिरफ्तार किया गया था। न्यायालय ने उसे 10 वर्ष की सजा सुनाई थी। एक मामले में 12 फरवरी 2010 को बस्ती न्यायालय में पेशी पर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान बांसी कोतवाली क्षेत्र के फजिहतवा नाले के पास पुलिस वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यही से सुशील फरार हो गया था। इस मामले में भी बांसी कोतवाली में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। सूत्रों के अनुसार, सुशील के नेपाल में होने की लोकेशन मिल रहा थी। उधर, गोरखपुर में एसटीएफ के इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि इनामी बदमाश किसी व्यक्ति से मिलने नेपाल से भारत आया था। उसे मंगलवार की रात नेपाल लौटना था लेकिन पुख्ता सूचना के आधार पर उसे धर दबोचा गया।
प्रभारी एसपी के मुताबिक बुधवार को गोरखपुर एसटीएफ को सुशील के सीमा से सटे खुनुवा क्षेत्र में आने की सूचना मिली थी। इसे संज्ञान में लेते हुए एटीएफ गोरखपुर के निरीक्षक सत्यप्रकाश सिंह व शोहरतगढ़ पुलिस की संयुक्त टीम खुनुवा तिराहे के पास पहुंच गई। सीमा पार करते ही टीम ने उसे दबोच लिया। सुशील के पकड़े जाने से सीमा क्षेत्र में मादक पदार्थ की तस्करी पर रोक लगेगा। इस दौरान सीओ सदर दिलीप कुमार सिंह, एसओ शोहरतगढ़ राधेश्याम राय, एसआई विक्रमाजीत राय व पुलिस टीम मौजूद रही। एसटीएफ की टीम में इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह, भानु प्रताप सिंह, अभिमीत तिवारी, अनूप राय, यशवंत सिंह, उमेश सिंह, महेंद्र सिंह, आशुतोष तिवारी, इंद्र प्रताप और संतोष सिंह शामिल रहे।
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...तो बस इनाम बढ़ने का था इंतजार
सुशील तिवारी पिछले आठ साल से फरार था। उस पर 25 हजार का इनाम घोषित था। पुलिस के मुताबिक उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार कोशिश हो रही थी। नौ अप्रैल को डीआईजी ने पुरस्कार की राशि 50 हजार रुपये कर दी। इसके 48 घंटे बाद ही पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए सुशील को गिरफ्तार कर लिया।
पत्नी बोली, नौ को ही नेपाल से आकर पकड़ा
सिद्धार्थनगर। पुलिस भले ही सुशील को बुधवार की सुबह गिरफ्तार करने के दावे कर रही है, मगर सुशील की पत्नी सीता तिवारी ने नौ अप्रैल को ही पति को नेपाल से उठाने का आरोप लगाया है। बुधवार को तौलिहवां में प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने यह आरोप लगाए। कहा कि नौ अप्रैल की सुबह 11 बजे पति घर से तौलिहवा में आयोजित कम्यूनिस्ट पार्टी माओवादी की बैठक में शामिल होने निकले थे। करीब 30 मिनट पार्टी कार्यालय पर रहे। उसके बाद सिद्धार्थनगर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सूचना मिलने के बाद शाम चार बजे फोन करने पर पति का फोन बंद था। इसके बाद से ही पति का कोई पता नहीं है। आठ साल पहले भी पति को फर्जी तरीके से चरस तस्करी में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इस बार भी पुलिस ने फर्जी ढंग से पकड़ा है।
भारत से फरार बदमाशों को शरण देता था सुशील
भारत से फरार अपराधियों को सुशील नेपाल में शरण देता था। तस्करी की गतिविधियों में उसके संलिप्त होने की सूचना भी मिली है। इसकी छानबीन में एसटीएफ की टीम लगी है। सुशील से संपर्क रखने वाले तस्करों की तलाश की जा रही है।
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बुधवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में प्रभारी एसपी अरविंद मिश्र ने बताया कि नेपाल के तौलिहवा थाने के नयाटोला निवासी सुशील तिवारी 38 किलो चरस के साथ 23 अगस्त 2008 में पकड़ा गया था। उसके साथी रोहित बरई को भी गिरफ्तार किया गया था। न्यायालय ने उसे 10 वर्ष की सजा सुनाई थी। एक मामले में 12 फरवरी 2010 को बस्ती न्यायालय में पेशी पर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान बांसी कोतवाली क्षेत्र के फजिहतवा नाले के पास पुलिस वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यही से सुशील फरार हो गया था। इस मामले में भी बांसी कोतवाली में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। सूत्रों के अनुसार, सुशील के नेपाल में होने की लोकेशन मिल रहा थी। उधर, गोरखपुर में एसटीएफ के इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि इनामी बदमाश किसी व्यक्ति से मिलने नेपाल से भारत आया था। उसे मंगलवार की रात नेपाल लौटना था लेकिन पुख्ता सूचना के आधार पर उसे धर दबोचा गया।
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प्रभारी एसपी के मुताबिक बुधवार को गोरखपुर एसटीएफ को सुशील के सीमा से सटे खुनुवा क्षेत्र में आने की सूचना मिली थी। इसे संज्ञान में लेते हुए एटीएफ गोरखपुर के निरीक्षक सत्यप्रकाश सिंह व शोहरतगढ़ पुलिस की संयुक्त टीम खुनुवा तिराहे के पास पहुंच गई। सीमा पार करते ही टीम ने उसे दबोच लिया। सुशील के पकड़े जाने से सीमा क्षेत्र में मादक पदार्थ की तस्करी पर रोक लगेगा। इस दौरान सीओ सदर दिलीप कुमार सिंह, एसओ शोहरतगढ़ राधेश्याम राय, एसआई विक्रमाजीत राय व पुलिस टीम मौजूद रही। एसटीएफ की टीम में इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह, भानु प्रताप सिंह, अभिमीत तिवारी, अनूप राय, यशवंत सिंह, उमेश सिंह, महेंद्र सिंह, आशुतोष तिवारी, इंद्र प्रताप और संतोष सिंह शामिल रहे।
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...तो बस इनाम बढ़ने का था इंतजार
सुशील तिवारी पिछले आठ साल से फरार था। उस पर 25 हजार का इनाम घोषित था। पुलिस के मुताबिक उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार कोशिश हो रही थी। नौ अप्रैल को डीआईजी ने पुरस्कार की राशि 50 हजार रुपये कर दी। इसके 48 घंटे बाद ही पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए सुशील को गिरफ्तार कर लिया।
पत्नी बोली, नौ को ही नेपाल से आकर पकड़ा
सिद्धार्थनगर। पुलिस भले ही सुशील को बुधवार की सुबह गिरफ्तार करने के दावे कर रही है, मगर सुशील की पत्नी सीता तिवारी ने नौ अप्रैल को ही पति को नेपाल से उठाने का आरोप लगाया है। बुधवार को तौलिहवां में प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने यह आरोप लगाए। कहा कि नौ अप्रैल की सुबह 11 बजे पति घर से तौलिहवा में आयोजित कम्यूनिस्ट पार्टी माओवादी की बैठक में शामिल होने निकले थे। करीब 30 मिनट पार्टी कार्यालय पर रहे। उसके बाद सिद्धार्थनगर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सूचना मिलने के बाद शाम चार बजे फोन करने पर पति का फोन बंद था। इसके बाद से ही पति का कोई पता नहीं है। आठ साल पहले भी पति को फर्जी तरीके से चरस तस्करी में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इस बार भी पुलिस ने फर्जी ढंग से पकड़ा है।
भारत से फरार बदमाशों को शरण देता था सुशील
भारत से फरार अपराधियों को सुशील नेपाल में शरण देता था। तस्करी की गतिविधियों में उसके संलिप्त होने की सूचना भी मिली है। इसकी छानबीन में एसटीएफ की टीम लगी है। सुशील से संपर्क रखने वाले तस्करों की तलाश की जा रही है।