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टेरर फंडिंग : व्यापारी भाइयों समेत चार पर दर्ज होगा देशद्रोह का केस

Wed, 28 Mar 2018 01:06 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Wed, 28 Mar 2018 01:06 AM IST
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टेरर फंडिंग : व्यापारी भाइयों समेत चार पर दर्ज होगा देशद्रोह का केस
पकड़े गए व्यापारी भाई। - फोटो : Amar Ujala
टेरर फंडिंग मामले में एटीएस ने दस लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि इसमें चार आरोपियों व्यापारी भाई, प्रतापगढ़ तथा रीवा, मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किए गए दो अन्य आरोपियों का पाकिस्तानी हैंडलर से सीधा संबंध था। उसके कहने पर ही यह लोग काम करते थे। आईजी असीम अरुण ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में पाकिस्तानी हैंडलर से जो लोग सीधे जुड़े थे, उनके खिलाफ देशद्रोह का केस होगा। अन्य आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी आदि धाराओं में केस चलेगा।
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सीज होंगे आतंकियों के मददगार व्यापारी भाइयों के खाते
टेरर फंडिंग मामले में पकड़े गए शहर के मोबाइल व्यापारी भाईयों नसीम और नईम अरशद के बैंक खातों को सीज किया जाएगा। कई खाते फर्जी नाम-पते से खोले गए हैं। एटीएस की जांच में पता चला है कि इनका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए रकम के इंतजाम में किया जाता था। एटीएस के आईजी असीम अरुण ने बताया कि इन खातों से लेनदेन पर रोक लगाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं कारोबारी भाइयों सहित उनके साथियों से पूछताछ के लिए कोर्ट ने बुधवार को पांच दिन की कस्टडी रिमांड की मंजूरी दे दी है। इनसे पूछताछ के लिए नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी समेत देश की सुरक्षा से जुड़ी खुफिया एजेंसियों के विशेषज्ञों की टीम लखनऊ पहुंच गई है। आईजी ने बताया कि इस दौरान पाकिस्तानी हैंडलर से उनके संबंध और देश के अन्य हिस्सों में उनके नेटवर्क के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाएगी।
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टेरर फंडिंग के मामले में अभी तक दस लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। एटीएस की टीम ने शनिवार को गोरखपुर से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला था कि मोबाइल व्यापारी भाइयों का आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकी से संबंध है। वे फोन पर एक-दूसरे से बातचीत करते थे। एटीएस ने कैंट क्षेत्र के गोलघर स्थित बलदेव प्लाजा और कोतवाली क्षेत्र स्थित दो शापिंग कांपलेक्स में स्थित उनकी दुकानों में छापेमारी की और कंप्यूटर हार्ड डिस्क, लैपटाप, पेन ड्राइव तथा कई दस्तावेज जब्त किया। आईजी असीम अरुण के मुताबिक दोनों भाई पाकिस्तानी आका के कहने पर फर्जी नाम व पते पर खाते खुलवाते थे। बाद में विभिन्न श्रोत से उन खातों में रकम जमा कराते थे। अपने खाते से भी वे इनमें रकम भेजते थे। इनके अलावा इस नेटवर्क से प्रतापगढ़ निवासी संजय सरोज, रीवा, मध्य प्रदेश निवासी शंकर सिंह भी सीधे जुड़े थे। वे दोनों भी गिरफ्तार किए गए हैं।
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जांच के दायरे में 300 से ज्यादा खाते
मोबाइल कारोबारी नसीम और नईम अरशद से जुड़े लोगों के 300 से ज्यादा खातों का ब्योरा सामने आया है। पुलिस इनकी जांच कर रही है। इसमें तमाम ऐसे लोग है जो सीधे तौर पर व्यापारी भाइयों से जुड़े है तो कई ऐसे है जो नेपाल में रहकर इस काम को कर रहे हैं। इस कवायद के बाद कई और लोगों के पकड़े जाने की संभावना है।

व्यापारी भाइयों के और संपत्तियों की तलाश
पकड़े गए नसीम और नईम अरशद की और संपत्तियों की तलाश भी शुरू हो गई है। एटीएस दिल्ली में रहने वाले इसके पिता और भाई की भी जांच कर रही है। स्थानीय पुलिस भी जिले में अन्य संपत्तियों की संभावना को देखते हुए जांच कर रही है।

हवाला कारोबारियों पर भी निगाहें
आतंकवादियों को फंडिंग मामले में एटीएस और पुलिस हवाला कारोबारियों की भी जांच करेगी। मामले में पकड़े गए खोराबार के दयाशंकर समेत कई ऐसे है जो रकम की लालच में फंसे है। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि आतंकवादियों के लिए काम कर रहे हैं। एटीएस की पूछताछ में इस बात का खुलासा होने के बाद ही हवाला कारोबारियों की कुंडली खंगाली जा रही है।

परिवार ताला बंद कर लापता
नसीम और नईम अरशद के पकड़े जाने के बाद अब गोलघर के गांधी गली में स्थित आशियाना अपार्टमेंट की चौथी मंजिल पर रहने वाला उनका परिवार भी ताला बंद कर गायब है। शनिवार को गिरफ्तारी के समय दोनों भाइयों की पत्नियां व बच्चे घर में ही मौजूद थे। कारोबारी भाइयों के पिता तथा उनकी फर्म नईम एंड संस के मालिक नईम अहमद भी रविवार को गोरखपुर आ गए थे। सोमवार की देर शाम तक परिवार के लोग अपार्टमेंट में मौजदू थे लेकिन मंगलवार को सुबह उनके फ्लैट में ताला लगा मिला।


मकान में आने वाली महिला और कथित भाई की भी तलाश
पडरौना, कुशीनगर निवासी मुशर्रफ उर्फ निखिल राय और जीयनपुर, आजमगढ़ निवासी सुशील राय उर्फ अंकुर भरवालिया के जिस मकान में किराए पर रहते थे, वहां एक युवती भी रहती थी जो सुशील की बहन बताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि वहां एक महिला भी आती थी जो दोनों को अपना बेटा बताती थी। एटीएस उसकी भूमिका को भी संदिग्ध मान कर तलाश में लगी है। इसके अलावा उनसे मिलने एक युवक भी आता था। मकान मालिक और पड़ोसियों से उसका परिचय उन्होंने तीसरे भाई के रूप में कराया था तथा उसे लखनऊ में एक निजी फर्म में कार्यरत बताते थे। वह युवक करीब-करीब हर माह उनसे मिलने आता था। आईजी असीम अरुण ने बताया कि तीसरे युवक की तलाश की जा रही है।

 
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