देवरिया की बची खबर

Gorakhpur Bureauगोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 26 Nov 2018 12:06 AM IST
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गांववालों को उग्र देख भाग गए विद्युतकर्मी
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उपकेंद्र पर किसी के नहीं मिलने से भड़के लोगों ने लगा दिया जाम
डेढ़ घंटे बाद पहुंची पुलिस, उसके बाद आए प्रशासनिक अफसर
लोगों के अड़ने व वाहनों की कतार लगने पर लाठी भांजकर खदेड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
लार (देवरिया)। शव लेकर गुस्साए गांव वाले जब नारेबाजी करते हुए विद्युत उपकेंद्र पर पहुंचे तो कर्मचारी उपकेंद्र में ताला जड़ फरार हो गए। यह देख लोगों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने वहीं शव रखकर रामजानकी मार्ग जाम कर दिया। जैसे-जैसे समय बीत रहा था लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा था। जाम लगने की सूचना पर करीब डेढ़ घंटे बाद पुलिसकर्मी पहुंचे, लेकिन लोगों का उग्र रूप देख मूकदर्शक बने रहे। कई बार लोगों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वह बड़े अधिकारियों को बुलाने पर अड़े रहे। इसके बाद पहले अतिरिक्त पुलिस फोर्स पहुंची फिर सीओ शितांशु यादव, एसडीएम शशिभूषण और तहसीलदार संजीव राय आए। उन्होंने भी वार्ता करने का प्रयास किया। लेकिन मुआवजे और कार्रवाई की जिद पर अड़े लोग कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। वहीं दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार बढ़ती देख उन्होंने पुलिस को बल प्रयोग कर लोगों को हटाने को कह दिया।
अपराह्न करीब दो बजे पुलिस ने लाठी भांज कर सबको खदेड़ना शुरू किया। जिससे वहां भगदड़ मच गई। भागते हुए युवकों ने पुलिस पर ईंट-पत्थर चलाने शुरू कर दिए। इसके साथ ही डंडे व ईंट मारकर करीब आधा दर्जन वाहनों के शीशे तोड़ दिए। पुलिस ने कई युवकों को हिरासत में ले लिया। भीड़ के छंटने के बाद अधिकारियों के निर्देश पर उन युवकों को तत्काल छोड़ दिया गया। इसके बाद घरवाले शव लेकर दाह संस्कार के लिए चले गए। सीओ शितांशु यादव ने बताया कि लाइनमैन की पत्नी प्रेमशीला की तहरीर पर जेई राजारंजन, एसएसओ कन्हैयालाल, ठेकेदार ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव और अवध किशोर सिंह पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। लाठीचार्ज नहीं किया गया, प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया था।

बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
लार। सुरेश चौहान अपने घर का अकेला कमाऊ सदस्य था। प्राइवेट लाइनमैन का कार्य कर अपने परिवार की गाड़ी खींचता था। व्यवहार कुशल होने के कारण वह इलाके में लोकप्रिय था। उसके झुलसने की खबर मिलते ही कई लोग गोरखपुर मेडिकल कॉलेज तक पहुंच गए और आर्थिक मदद भी की। उसकी मौत के बाद पत्नी और तीन बच्चे शशिभूषण, चंद्रभूषण और बेटी विभा बची है। तीनों अभी 8-12 वर्ष के बीच के हैं। कम उम्र में बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाने से परिवार के समक्ष दो जून की रोटी का संकट गहरा गया है।

लापरवाही से कई लाइनमैनों की जा चुकी है जान
लार। इसके पहले भी एसएसओ की लापरवाही से लार में प्राइवेट लाइनमैनों की मौत हो चुकी है। कुछ माह पूर्व बलिंद्र की मौत करंट की चपेट में आने से हुई थी। विद्युत उपकेंद्र पर अराजक तत्वों का जमावड़ा हमेशा लगा रहता था। ठेकेदार के वर्कर के अलावा गैर जिम्मेदार लोग भी बिजली बंद व चालू करने का कार्य करते हैं। पुलिस कई बार रात में पहुंचकर हिदायत भी दे चुकी है, लेकिन विभागीय अफसरों की उदासीनता से अराजक तत्वों का वर्चस्व बना हुआ है। जिस दिन लाइनमैन झुलसा उस दिन एसएसओ कन्हैयालाल की ड्यूटी थी। उसी दिन से वह फरार चल रहा है।
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