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कानूनगो-लेखपाल समेत तीन पर मुकदमा

Wed, 03 Oct 2018 01:29 AM IST
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर Updated Wed, 03 Oct 2018 01:29 AM IST
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कानूनगो-लेखपाल समेत तीन पर मुकदमा
एफआईआर
गोरखपुर। कानूनगो और लेखपाल की मदद से कोटेदार सेठ हरिकृष्ण उर्फ गुल्ली ने बांसगांव के मलांव में गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास की सवा छह एकड़ सरकारी भूमि फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपने नाम कराई और फिर इसका चार करोड़ से ज्यादा का मुआवजा ले लिया। मामला खुलने पर जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन ने कड़ा रुख अपनाते हुए छानबीन कर कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया। तहसीलदार बांसगांव शशिभूषण पांडेय ने मंगलवार को तहरीर देकर तत्कालीन कानूनगो विजय, लेखपाल अनिल कुमार गौतम और आरोपी कोटेदार सेठ हरिकृष्ण के खिलाफ बांसगांव थाने में कूटरचित दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है।
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1991 में हरिकृष्ण ने गोरखपुर-वाराणसी मार्ग के आसपास की सरकारी भूमि के फर्जी दस्तावेज तैयार करा लिए थे। कानूनगो विजय और लेखपाल अनिल की मदद से भूमि का हस्तांतरण गलत तरीके से कराया गया। 2014-15 में गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग को हरी झंडी मिलने के बाद नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएएचआई) ने फोरलेन बनाने के लिए सड़क के आसपास की भूमि का अधिग्रहण शुरू किया। इसके बाद हरिकृष्ण ने कानूनगो और लेखपाल की मदद से 26 अप्रैल 2018 को खतौनी में अपना नाम भी दर्ज करा लिया। फर्जीवाड़े का नतीजा रहा कि भूमि एवं अध्याप्ति से रिपोर्ट मिलने के बाद गलत तरीके से हड़पी गई इस जमीन के अधिग्रहण के लिए हरिकृष्ण को चार करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा भी दे दिया गया। इसी बीच खतौनी की बारीकी से जांच हुई तो मामला खुल गया। अब जिलाधिकारी के सख्त रुख को देखते हुए तहसीलदार ने आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है।
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एनएचएआई भी जता चुका है आपत्ति

गोरखपुर। गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन की जद में आने वाली भूमि-मकानों के मुआवजा निर्धारण पर एनएचएआई आपत्ति दर्ज करा चुकी है। सदर तहसील क्षेत्र के करीब 11 गांवों में सर्वे के बाद तय हुए मुआवजे के संबंध में विभाग की तरफ से पहले डीएम कोर्ट और वहां मामला खारिज होने के बाद सिविल न्यायालय में अपील दायर की जा चुकी है। एनएचएआई के अफसरों के मुताबिक इन गांवों में मुआवजा निर्धारण में मानक की अनदेखी की गई है। इसे दुरुस्त नहीं किया गया तो करोड़ों की चपत लग सकती है। उनका कहना है कि जहां खाली जमीन है वहां भी मकान, दुकान या पेड़ दिखाकर अधिक मुआवजे की रिपोर्ट तैयार की गई है। इसी तरह जिस जमीन का आंशिक हिस्सा फोरलेन की जद में आ रहा है उसे भी अधिक बताया गया है। क्षतिग्रस्त मकानों को भी मुकम्मल बताया गया है।
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