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ब्लैक मनी खपाने में 250 फंसे
Updated Sat, 07 Oct 2017 01:03 AM IST
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राजन राय
गोरखपुर। नोटबंदी के बाद पूर्वोत्तर रेलवे में टिकट बुक कराकर ब्लैक मनी खपाने की कोशिश करने वाले 250 संदिग्ध यात्री फंस गए हैं। सभी यात्री यूपी, बिहार और उत्तराखंड के हैं। इन्होंने ज्यादा दूरी वाले स्टेशनों में फर्स्ट क्लास श्रेणी के टिकट बुक कराए थे और 500-1000 रुपये के नोट जमा किए थे। रिफंड के नियमों में रेलवे ने बदलाव कर खाते में रकम भेजनी शुरू की तो इनकी चालाकी पकड़ में आ गई। इस खेल में प्रति यात्री 40 से 60 हजार के पुराने नोट खपाने से एक करोड़ से ज्यादा का घपला माना जा रहा है। रेलवे ने इन यात्रियों को संदिग्ध मानकर न केवल इनका रिफंड रोक दिया है, बल्कि जांच भी शुरू कर दी है। इसमें आयकर विभाग की भी मदद ली जा रही है।
देश में आठ नवंबर की रात से 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे। लेकिन रेलवे में टिकट बुक कराने, बस, दवाएं, पेट्रोल-डीजल सहित कई सेक्टर्स में इन पुराने नोटों के चलन की अनुमति दी गई। इस छूट का फायदा उठाने के लिए रेलवे के आरक्षण केंद्रों पर भीड़ बढ़ गई। लेकिन दो दिन बाद ही रेलवे ने नियमों में बदलाव कर 5000 रुपये से अधिक का रिफंड कैश न देकर खाते में भेजने का नियम लागू कर दिया। इसके बाद टिकट बुक कराने वालों ने रिफंड लेने की कोशिश शुरू की तो मामला फंसता गया।
कई बेकसूर भी फंसे
पुराने नोट बदलने के इस खेल में रेलवे की सख्ती से कैशलेस रिजर्वेशन कराने वाले कई बेकसूर यात्रियों के भी रिफंड फंस गए हैं। अभी पूर्वोत्तर रेलवे में करीब 1350 यात्रियों के रिफंड फंसे हैं। इन यात्रियों ने 15 नवंबर के बाद शुरू हुई कैशलेस व्यवस्था के तहत टिकट बुक कराए थे। जांच पड़ताल और बैंक की चूक के चलते 23 जनवरी तक के कैशलेस रिफंड की वापसी नहीं हो सकी है। सभी ने टीडीआर (टिकट डिपॉजिट रीसिप्ट) भरा है।
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केस 1
नौ नवंबर को एक यात्री ने त्रिवेंद्रम राजधानी एक्सप्रेस (12432) में फर्स्ट क्लास के छह टिकट बनवाए। कुल 47,040 रुपये में उन्होंने 47,000 रुपये 500 व 1000 के नोट जमा किए। सप्ताह भर बाद जब रिफंड कराकर कैश के जरिए नए रिफंड लेने की कोशिश की तो मामला फंस गया। उन्हें टीडीआर भरना पड़ा और रुपये खाते में भेजने की बात कही गई। अभी तक उन्हें रिफंड नहीं मिला है। मामला जांच-पड़ताल में फंसा है।
केस 2
10 नवंबर को केरला संपर्क क्रांति (12218) ट्रेन में एक यात्री ने नई दिल्ली से कोचीवली और कोचीवली से नई दिल्ली के लिए 72,030 रुपये के छह टिकट बनवाए। यहां भी रिफंड में मामला फंस गया और उन्हें टीडीआर भरना पड़ा। अभी तक यात्री को रिफंड नहीं मिले हैं। रेलवे मामले को संदिग्ध मानकर बैंक एकाउंट से लेकर ट्रेन के आरक्षण चार्ट की रिपोर्ट खंगाली जा रही है।
कोट
रिफंड की जांच कराने के बाद खाते में रकम भेजी जा रही है। ज्यादा रकम के रिफंड में सतर्कता बरती जा रही है। ऐसे केस में कई बिंदुओं पर जांच हो रही है। कुछ मामलों में खाता नंबर गलत भरा गया है। कोशिश की जा रही है कि रिफंड की रकम जल्द यात्रियों को भेज दी जाए।
- संजय यादव, सीपीआरओ एनईआर
गोरखपुर। नोटबंदी के बाद पूर्वोत्तर रेलवे में टिकट बुक कराकर ब्लैक मनी खपाने की कोशिश करने वाले 250 संदिग्ध यात्री फंस गए हैं। सभी यात्री यूपी, बिहार और उत्तराखंड के हैं। इन्होंने ज्यादा दूरी वाले स्टेशनों में फर्स्ट क्लास श्रेणी के टिकट बुक कराए थे और 500-1000 रुपये के नोट जमा किए थे। रिफंड के नियमों में रेलवे ने बदलाव कर खाते में रकम भेजनी शुरू की तो इनकी चालाकी पकड़ में आ गई। इस खेल में प्रति यात्री 40 से 60 हजार के पुराने नोट खपाने से एक करोड़ से ज्यादा का घपला माना जा रहा है। रेलवे ने इन यात्रियों को संदिग्ध मानकर न केवल इनका रिफंड रोक दिया है, बल्कि जांच भी शुरू कर दी है। इसमें आयकर विभाग की भी मदद ली जा रही है।
देश में आठ नवंबर की रात से 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे। लेकिन रेलवे में टिकट बुक कराने, बस, दवाएं, पेट्रोल-डीजल सहित कई सेक्टर्स में इन पुराने नोटों के चलन की अनुमति दी गई। इस छूट का फायदा उठाने के लिए रेलवे के आरक्षण केंद्रों पर भीड़ बढ़ गई। लेकिन दो दिन बाद ही रेलवे ने नियमों में बदलाव कर 5000 रुपये से अधिक का रिफंड कैश न देकर खाते में भेजने का नियम लागू कर दिया। इसके बाद टिकट बुक कराने वालों ने रिफंड लेने की कोशिश शुरू की तो मामला फंसता गया।
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कई बेकसूर भी फंसे
पुराने नोट बदलने के इस खेल में रेलवे की सख्ती से कैशलेस रिजर्वेशन कराने वाले कई बेकसूर यात्रियों के भी रिफंड फंस गए हैं। अभी पूर्वोत्तर रेलवे में करीब 1350 यात्रियों के रिफंड फंसे हैं। इन यात्रियों ने 15 नवंबर के बाद शुरू हुई कैशलेस व्यवस्था के तहत टिकट बुक कराए थे। जांच पड़ताल और बैंक की चूक के चलते 23 जनवरी तक के कैशलेस रिफंड की वापसी नहीं हो सकी है। सभी ने टीडीआर (टिकट डिपॉजिट रीसिप्ट) भरा है।
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केस 1
नौ नवंबर को एक यात्री ने त्रिवेंद्रम राजधानी एक्सप्रेस (12432) में फर्स्ट क्लास के छह टिकट बनवाए। कुल 47,040 रुपये में उन्होंने 47,000 रुपये 500 व 1000 के नोट जमा किए। सप्ताह भर बाद जब रिफंड कराकर कैश के जरिए नए रिफंड लेने की कोशिश की तो मामला फंस गया। उन्हें टीडीआर भरना पड़ा और रुपये खाते में भेजने की बात कही गई। अभी तक उन्हें रिफंड नहीं मिला है। मामला जांच-पड़ताल में फंसा है।
केस 2
10 नवंबर को केरला संपर्क क्रांति (12218) ट्रेन में एक यात्री ने नई दिल्ली से कोचीवली और कोचीवली से नई दिल्ली के लिए 72,030 रुपये के छह टिकट बनवाए। यहां भी रिफंड में मामला फंस गया और उन्हें टीडीआर भरना पड़ा। अभी तक यात्री को रिफंड नहीं मिले हैं। रेलवे मामले को संदिग्ध मानकर बैंक एकाउंट से लेकर ट्रेन के आरक्षण चार्ट की रिपोर्ट खंगाली जा रही है।
कोट
रिफंड की जांच कराने के बाद खाते में रकम भेजी जा रही है। ज्यादा रकम के रिफंड में सतर्कता बरती जा रही है। ऐसे केस में कई बिंदुओं पर जांच हो रही है। कुछ मामलों में खाता नंबर गलत भरा गया है। कोशिश की जा रही है कि रिफंड की रकम जल्द यात्रियों को भेज दी जाए।
- संजय यादव, सीपीआरओ एनईआर