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अब मेडिकल कॉलेज में होगी कैंसर मरीजों की सिकाई
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Updated Sat, 26 Mar 2016 02:21 AM IST
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medical college
- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर। अब कैंसर के मरीजों को इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज के कोबाल्ट यूनिट को शुरू करने के लिए दो रेडियो थिरेपी टेक्नोलॉजिस्ट मिल गए हैं। इसी वजह से यह यूनिट शुरू नहीं हो पा रही थी और कैंसर रोगियों को प्राइवेट में सिकाई कराना पड़ रहा था।
मेडिकल कॉलेज में मशीन को लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने साढ़े चार करोड़ रुपये दिए थे, जिससे कोबाल्ट यूनिट के लिए टेलीथेरेपी मशीन और ब्रेकीथेरेपी लगाई गई थी। करीब तीन महीने पहले ही मशीन लगाई जा चुकी है मगर एक के बाद एक पेंच फंस जाने की वजह से यहां पर यह सुविधा नहीं शुरू हो पा रही थी। अब सारी परेशानियां दूर हो गई है।
रेडिएशन से बचने के लिए दीवाल को मोटा करने का काम किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द इसे शुरू कर दिया जाए। रेडियो आंकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष मेजर डॉ. एमक्यू बेग ने बताया कि इसके लिए दो रेडियो टेक्नोलॉस्टि मिल गए हैं। सिविल का काम चल रहा है जिसके बाद इसे शुरू कर दिया जाएगा। टेलीथेरेपी से जहां बाहर से सिकाई होगी, वहीं ब्रेकीथेरेपी में अंदरुनी तौर पर कैंसर की जड़ को कमजोर किया जा सकेगा। मरीजों को इस थेरेपी के लिए प्राइवेट अस्पतालों में 15 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं मेडिकल कॉलेज में एक हजार रुपये में ही यह सुविध मिल जाएगी।
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बीपीएल कार्ड धारकों, तीन एकड़ से कम खेत वालों और 35 हजार रुपये से कम आय वालों के लिए यह सुविधा मुफ्त होगी। पहले यह मशीनें केंद्र सरकार की ओर से लगाई जानी थीं लेकिन रकम की उपयोगिता को लेकर कॉलेज से तालमेल नहीं बैठ सका तो पिछले दिनों गोरखपुर आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसकी जिम्मेदारी ले ली थी जिसके बाद ही मशीन लग सकी है। अप्रैल से यूनिट शुरू हो जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज में मशीन को लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने साढ़े चार करोड़ रुपये दिए थे, जिससे कोबाल्ट यूनिट के लिए टेलीथेरेपी मशीन और ब्रेकीथेरेपी लगाई गई थी। करीब तीन महीने पहले ही मशीन लगाई जा चुकी है मगर एक के बाद एक पेंच फंस जाने की वजह से यहां पर यह सुविधा नहीं शुरू हो पा रही थी। अब सारी परेशानियां दूर हो गई है।
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रेडिएशन से बचने के लिए दीवाल को मोटा करने का काम किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द इसे शुरू कर दिया जाए। रेडियो आंकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष मेजर डॉ. एमक्यू बेग ने बताया कि इसके लिए दो रेडियो टेक्नोलॉस्टि मिल गए हैं। सिविल का काम चल रहा है जिसके बाद इसे शुरू कर दिया जाएगा। टेलीथेरेपी से जहां बाहर से सिकाई होगी, वहीं ब्रेकीथेरेपी में अंदरुनी तौर पर कैंसर की जड़ को कमजोर किया जा सकेगा। मरीजों को इस थेरेपी के लिए प्राइवेट अस्पतालों में 15 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं मेडिकल कॉलेज में एक हजार रुपये में ही यह सुविध मिल जाएगी।
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बीपीएल कार्ड धारकों, तीन एकड़ से कम खेत वालों और 35 हजार रुपये से कम आय वालों के लिए यह सुविधा मुफ्त होगी। पहले यह मशीनें केंद्र सरकार की ओर से लगाई जानी थीं लेकिन रकम की उपयोगिता को लेकर कॉलेज से तालमेल नहीं बैठ सका तो पिछले दिनों गोरखपुर आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसकी जिम्मेदारी ले ली थी जिसके बाद ही मशीन लग सकी है। अप्रैल से यूनिट शुरू हो जाएगा।