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लेहलें जनम आमिना के ललनवा खुशियां मनावे जहनवा

Mon, 11 Nov 2019 01:09 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 11 Nov 2019 01:09 AM IST
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barawafat news in gorakhpur
बारावफात पर जंगल मातादीन के मस्जिद से निकाला गया जुलूस।
लेहलें जनम आमिना के ललनवा खुशियां मनावे जहनवा
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गोरखपुर। दुनिया के लिए रहमत बनकर आए आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की यौम ए पैदाइश की खुशी में रविवार को ईद मिलादुन्नबी के जुलूस निकाले गए। लेहलें जनम आमिना के ललनवा, खुशिंया मनावे जहनवा के आए मोरे अरशी सजनवा जैसी नात और सरकार की आमद मरहबा, पुर नूर की आमद मरहबा के नारे लगाते हुए नबी पाक के शैदाई शहर भर में जुलूस की शक्ल में निकले।
शहर में ईद मिलादुन्नबी की शुरुआत रविवार को फज्र (भोर पहर) की नमाज के बाद दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद में परचम (झंडा) उठाने के साथ हुई। इसके साथ ही शहर भर में जुलूस निकालने का सिलसिला शुरू हुआ। बहरामपुर, पिपरापुर, मोहलालपुर, इलाहीबाग, पहाड़पुर, तुर्कमानपुर, बेनीगंज, असगरगंज, गोरखनाथ, रसूलपुर, जमुनिहाबाग, सिधारीपुर, घोषीपुरवा, गोलघर, सिविल लाइंस, धम्मान मोहल्ला, निजामपुर, बख्शीपुर, जाफरा बाजार, गोरखनाथ क्षेत्र में रसूलपुर, चक्सा हुसैन, जाहिदाबाद, शाहिदाबाद सहित अन्य इलाकों से नबी पाक के मोहब्बतियों ने जुलूस में शिरकत की। ईद मिलादुन्नबी के जुलूसों का सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
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लब पर नारा-ए-तकबीर और हाथ में तिरंगा
ईद मिलादुन्नबी पर नबी पाक के हाथ में तिरंगा लेकर नारा-ए-तकबीर अल्लाहो अकबर का नारा बुलंद कर रहे थे। नबी पाक के पैदाइश पर फरिश्तों ने अर्श पर हरे झंडे लगा कर खुशी का इजहार किया था। फरिश्तों की यह सुन्नत (परंपरा) नबी के उम्मतियों ने जुलूस में हरे झंडों के साथ शिरकत कर अदा की। नबी पाक की मोहब्बत के साथ ही जुलूस में शान से तिरंगा झंडा लहराते हुए लोग मुल्क से मोहब्बत का परिचय भी दे रहे थे।
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मक्का मदीना सहित पवित्र स्थलों के मॉडल बना कर निकाले
जुलूसों में इस्लाम के पवित्र स्थान मक्का और मदीना शरीफ, मस्जिद, बुुजुर्गाने दीन के आस्तानों के मॉडल निकाल कर नबी पाक के शैदाईयों ने अपनी मोहब्बत का इजहार किया। इन मॉडलों में सबसे खास शाहिदाबाद का रहा। यहां इस्लाम की पवित्र किताब कुरआन पाक, ईसाइयों की पवित्र पुस्तक इंजील (बाइबल), यहूदी धर्म की पवित्र पुस्तक तौरात और पैगंबर दाऊद अलै. (किंग डेविड) पर अवतरित हुई पवित्र पुस्तक जबूर का मॉडल पेश किया गया। इमामबाड़ा इस्टेट के प्रवक्ता मंजूर आलम उर्फ शब्बू ने बताया कि यह चारों पुस्तक आसमानी किताब मानी जाती हैं। यानी यह मानव रचित नहीं हैं बल्कि अल्लाह पाक के पैगंबरों पर अवतरित की गईं हैं।
गेरुआ साफा और रुमाल पहन मनाई नबी के आमद की खुशी
ईद मिलादुन्नबी पर धम्मान मोहल्ले के युवाओं ने हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की। युवा गेरुआ साफा और गले में गेरुआ रुमाल डाल कर जुलूस में शामिल हुए। गेरुए रंग में रंगे यह युवा सरकार की आमद मरहबा, या नबी सलाम अलैका, या रसूल सलाम अलैका और नबी पाक की शान में दरूद ओ सलाम पेश करते हुए जुलूस के आकर्षण का केंद्र रहे। इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी गोरखपुर के जिलाध्यक्ष सैयद इरशाद अहमद ने बताया कि गेरुआ रंग इस्लाम में खुशी का प्रतीक है, चिश्तिया सिलसिले में भी इस रंग का महत्व है।
घरों में हुई फातिहा ख्वानी, कलामे पाक की तिलावत हुई
ईद मिलादुन्नबी की खुशियां घर, मदरसों, बुजुर्गाने दीन की मजारों पर भी मनाई गई। घरों में लजीज व्यंजन तैयार कर नबी पाक की नज्र पेश की गई। मदरसों में कलामे पाक की तिलावत पाठ, कुरआन ख्वानी और नबी पाक की शान में नात पेश की गईं। फातिहाख्वानी के बाद शीरीनी और तबर्रुक तक्सीम किया गया। बुजुर्गाने दीन के आस्तानों मजार पर कुरआन ख्वानी, तिलावत का कार्यक्रम हुआ। नबी पाक की शान में कलाम पेश किए गए और दरूद ओ सलाम का नजराना पेश किया गया।
लंगर, फल, मिठाई तक्सीम हुई
नबी पाक की यौम-ए-पैदाइश की खुशी में लोगों ने लंगर का एहतमाम किया, गरीबों में फल और मिठाई बांटी। तंजीम कारवाने अहले सुन्नत की ओर से दरगाह हजरत नक्को शाह धर्मशाला बाजार और दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद नार्मल में गरीबों को फल बांटे। घरों में भी मिठाई और पकवान बनाकर गरीबों को बांटा गया।
जुलूसों का जगह-जगह हुआ स्वागत
जुलूसों का जगह-जगह स्वागत हुआ। लोगों ने पानी, चाय, जर्दा, बिरयानी, शरबत, चाय, खुरमा, खीर आदि स्टाल लगाकर जुलूस वालों को तक्सीम किए। जुलूस-ए-मोहम्मदी निकलने का सिलसिला जो शुरू हुआ तो देर रात जारी रहा। जुलूस का केंद्र नखास चौक रहा। इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी गोरखपुर के जिलाध्यक्ष सैयद इरशाद अहमद की अगुवाई में कई जगहों पर जुलूसों का स्वागत किया गया।
महफिलों में बयान हुई सीरत ए नबी
ईद मिलादुन्नबी की खुशी में महफिल ए सीरत ए नबी का भी आयोजन किया गया। दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद नार्मल में मुफ्ती अख्तर हुसैन ने पैगंबर-ए-आजम की अजमत बयान की। बताया कि नबी पाक सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नहीं सारी दुनिया और हर धर्म के लिए रहमत बन कर आए। बयान के बाद सलाम पेश किया गया और शीरीनी तक्सीम की गई।

मू ए मुबारक की हुई जियारत
छोटे काजीपुर में जोहर (दोपहर) की नमाज के बाद अकीदतमंदों को पैगंबर-ए-आजम के नबी पाक के मू ए मुबारक (पवित्र बाल) की जियारत कराई गई। सैयद अतीकुर्रहमान, सैयद महबूब हसन, कारी शम्सुद्दीन, कारी अय्यूब, कारी उस्मान की मौजूदगी में पहले नबी पाक की शान में सलातो सलाम पेश किया गया इसके बाद पवित्र मू ए मुबारक की जियारत कराई गई। इस मौकेपर हबीब अहमद, मनोव्वर अहमद, अब्दुल कादिर, गुलामे मुस्तफा निजामी, अरशद, मोईद अहमद आदि मौजूद रहे।
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