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17 साल बाद बहरामपुर की फाइल मिली, रुकेगा जमीनों का फर्जीवाड़ा
Sat, 07 Dec 2019 11:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 07 Dec 2019 11:02 AM IST
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जिला प्रशासन का दावा है कि बहरामपुर इलाके से जुड़े सभी अभिलेख 17 साल बाद उसे मिल गए हैं। काफी तलाश के बाद सदर तहसील से इस इलाके की जमीनों से जुड़े अभिलेख की दूसरी प्रति मिल गई है। अभिलेखों की फाइल मिलने से अब वहां जमीनों का फर्जीवाड़ा तो रोका ही जा सकेगा, डेढ़ दशक से लटके नामांतरण, वरासत, खारिज-दाखिल के सैकड़ों लंबित मामलों का भी निस्तारण हो सकेगा।
2002 में ही सीबीआई बहरामपुर से जुड़ी जमीनों की मूल फाइल उठा ले गई थी। तबसे आजतक न तो सीबीआई ने ही उसे लौटाया और न जिला प्रशासन की ही तरफ से उसे वापस लाने के लिए कोई कारगर प्रयास हो सका था। नतीजतन जमीन पर अवैध कब्जे की घटनाएं तो बढ़ी हीं रिकार्ड न होने से नामांतरण, वरासत और दाखिल- खारिज के सैकड़ों मामले डेढ़ दशक से अधिक समय से लटके पड़े थे।
इस संबंध में डीएम के. विजयेंद्र पांडियन का कहना है कि बहरामपुर की मूल फाइल सीबीआई के उठा ले जाने से लंबे समय से वहां फर्जीवाड़े की शिकायतें मिल रही थी। सीलिंग की जमीन पर भी कब्जा हो रहा था। फाइलों की तलाश की गई तो सदर तहसील से मूल फाइल की दूसरी प्रति मिल गई है। उसी के मुताबिक गत दिनों बहरामपुर में सीलिंग की जमीन की पैमाइश कराकर उसे चिह्नित किया गया। बहरामपुर में करीब तीन एकड़ सीलिंग की जमीन है। इसमें से पौने दो एकड़ जमीन से कब्जा हटवाकर उसे जीडीए को सुपुर्द कर दिया गया है।
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हाईकोर्ट के आदेश पर बैठी सीबीआई जांच
एक ही भूखंड पर कई लोगों की दावेदारी समेत बहरामपुर के अभिलेखों में हेराफेरी का मामला प्रशासन स्तर पर नहीं सुलझा तो कुछ लोग हाईकोर्ट चले गए थे। सूत्रों के अनुसार, कोर्ट ने संबंधित लोगों के दस्तावेज के अलावा पूरे इलाके के अभिलेखों में हेरफेर की आशंका जताते हुए इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सितंबर 2002 में सीबीआई इंस्पेक्टर देवेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में एक टीम यहां आई थी।
टीम ने 15 दिनों तक जांच की और फि र बहरामपुर एहतमाली और बहरामपुर मुश्तकिल के सभी मूल रिकार्ड ही साथ लेते गई जो आज तक वापस नहीं मिली। सूत्रों के मुताबिक, 1979 में बहरामपुर में सुरेंद्र नारायण शुक्ला की जमीन उप्र सरकार के नाम दर्ज हो गई थी।
इस मामले में सीलिंग की जमीन पर अपना कब्जा होने का दावा कर सुरेंद्र नारायण ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में याचिका दाखिल की थी मगर सब जगह से उन्हें नाकामी मिली। 2013 में वह सुप्रीम कोर्ट में भी हार गए। इसी बीच भू-माफियाओं ने फर्जी नामांतरण आदेश जारी कर कई लोगों के नाम जमीन दर्ज कर दी।
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2002 में ही सीबीआई बहरामपुर से जुड़ी जमीनों की मूल फाइल उठा ले गई थी। तबसे आजतक न तो सीबीआई ने ही उसे लौटाया और न जिला प्रशासन की ही तरफ से उसे वापस लाने के लिए कोई कारगर प्रयास हो सका था। नतीजतन जमीन पर अवैध कब्जे की घटनाएं तो बढ़ी हीं रिकार्ड न होने से नामांतरण, वरासत और दाखिल- खारिज के सैकड़ों मामले डेढ़ दशक से अधिक समय से लटके पड़े थे।
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इस संबंध में डीएम के. विजयेंद्र पांडियन का कहना है कि बहरामपुर की मूल फाइल सीबीआई के उठा ले जाने से लंबे समय से वहां फर्जीवाड़े की शिकायतें मिल रही थी। सीलिंग की जमीन पर भी कब्जा हो रहा था। फाइलों की तलाश की गई तो सदर तहसील से मूल फाइल की दूसरी प्रति मिल गई है। उसी के मुताबिक गत दिनों बहरामपुर में सीलिंग की जमीन की पैमाइश कराकर उसे चिह्नित किया गया। बहरामपुर में करीब तीन एकड़ सीलिंग की जमीन है। इसमें से पौने दो एकड़ जमीन से कब्जा हटवाकर उसे जीडीए को सुपुर्द कर दिया गया है।
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हाईकोर्ट के आदेश पर बैठी सीबीआई जांच
एक ही भूखंड पर कई लोगों की दावेदारी समेत बहरामपुर के अभिलेखों में हेराफेरी का मामला प्रशासन स्तर पर नहीं सुलझा तो कुछ लोग हाईकोर्ट चले गए थे। सूत्रों के अनुसार, कोर्ट ने संबंधित लोगों के दस्तावेज के अलावा पूरे इलाके के अभिलेखों में हेरफेर की आशंका जताते हुए इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सितंबर 2002 में सीबीआई इंस्पेक्टर देवेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में एक टीम यहां आई थी।
टीम ने 15 दिनों तक जांच की और फि र बहरामपुर एहतमाली और बहरामपुर मुश्तकिल के सभी मूल रिकार्ड ही साथ लेते गई जो आज तक वापस नहीं मिली। सूत्रों के मुताबिक, 1979 में बहरामपुर में सुरेंद्र नारायण शुक्ला की जमीन उप्र सरकार के नाम दर्ज हो गई थी।
इस मामले में सीलिंग की जमीन पर अपना कब्जा होने का दावा कर सुरेंद्र नारायण ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में याचिका दाखिल की थी मगर सब जगह से उन्हें नाकामी मिली। 2013 में वह सुप्रीम कोर्ट में भी हार गए। इसी बीच भू-माफियाओं ने फर्जी नामांतरण आदेश जारी कर कई लोगों के नाम जमीन दर्ज कर दी।