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अफसरों तक पहुंचेगी जांच की आंच

Thu, 29 Aug 2019 02:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Aug 2019 02:18 AM IST
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arms license
फ्लैग - फर्जी लाइसेंस पर असलहा बेचे जाने का मामला
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हेडिंग - अफसरों तक पहुंचेगी जांच की आंच
- हर महीने सिटी मजिस्ट्रेट को करना होता है सत्यापन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। लाइसेंस पर असलहा और कारतूस बिकने का पूरा रिकॉर्ड कलेक्ट्रेट में होता है। नियम है कि दुकानदार खुद बेचे गए असलहे और कारतूस की जानकारी रोजाना असलहा बाबू को देंगे तो दूसरा नियम यह भी है कि हर महीने सिटी मजिस्ट्रेट दुकानों पर जाकर बिक्री और मौजूद असलहे, कारतूस की जांच कर सत्यापित करेंगे। ऐसे में जिले में इतनी संख्या में फर्जी लाइसेंस बन जाना और उस पर असलहा, कारतूस खरीद लिए जाने के मामले में कलेक्ट्रेट कर्मचारी का शामिल ना होना किसी के गले के नीचे नहीं उतर रहा। इस पूरी प्रक्रिया की यदि पुलिस ने गहनता से जांच की तो कर्मचारी के साथ कुछ अफसर भी लपेटे में आ सकते हैं।
दरअसल, फर्जी लाइसेंस पर असलहा बेचे जाने का मामला पकड़ में आने के बाद से ही लीपापोती शुरू कर दी गई थी। 14 अगस्त को तनवीर के पास से फर्जी लाइसेंस और असलहा बरामद होने के बाद पूरे दिन मामले को रफा दफा करने की कोशिश की गई। एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता के आदेश पर गोरखनाथ थाने में केस दर्ज करने की तैयारी भी शुरू की गई लेकिन इसी बीच डीएम के आदेश पर असलहा बाबू ने कैंट थाने में तहरीर देकर केस दर्ज करा दिया। जिसमें रवि गन हाउस के मालिक समेत चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया। केस के मुताबिक एक शख्स ने कलेक्ट्रेट में आकर शिकायत की थी जिसके बाद मामला खुला। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की तो पूरा मामला सामने आने लगा है। जांच में यह तथ्य भी सामने आ चुका है कि रवि गन हाउस से ही कई असलहे खरीदे गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर रवि गन हाउस से असलहे फर्जी लाइसेंस पर बेचे गए तो सत्यापन के दौरान मामला क्यों नहीं पकड़ा गया।
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आईजी ने पकड़ी थी कारतूस की धांधली
करीब तीन साल पहले तत्कालीन आईजी मोहित अग्रवाल ने कलेक्ट्रेट और दुकानों के रिकॉर्ड में कारतूस के अंतर को पकड़ा था। करीब बीस हजार कारतूस ऐसे पाए गए थे जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं था। उन्होंने सीओ को प्रशासनिक अफसर के साथ जाकर रिकॉर्ड जांच करने का आदेश भी दिया था लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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