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एक और सरकारी कर्मचारी के शस्त्र रिकॉर्ड मिले, रद होगा निलंबन
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एक और सरकारी कर्मचारी के शस्त्र रिकॉर्ड मिले, रद होगा निलंबन
गोरखपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस के सनसनीखेज मामले में खोराबार थाने से जिन 10 बेगुनाहों को पुलिस ने जेल भेजा था, उनमें से एक और लाइसेंसधारी सरकारी कर्मचारी रामहित यादव पुत्र रामकवल यादव के मूल रिकॉर्ड कलेक्ट्रेट से मिल गए हैं। जिला प्रशासन ने उनका लाइसेंस सही होने की तस्दीक करते हुए जल्द विवेचना पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया है। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन का कहना है कि सभी बेगुनाह सरकारी कर्मचारियों का निलंबन निरस्त किया जा रहा है। रामहित का भी निलंबन निरस्त हो जाएगा।
रामहित, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग सरदारनगर में प्रधान सहायक के पद पर तैनात हैं। फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में उन्हें भी छह अक्तूबर को खोराबार पुलिस ने 10 बेगुनाहों के साथ जेल भेज दिया था। तभी से वह निलंबित चल रहे हैं। रामहित ने अमर उजाला को बताया कि पुलिस ने उनके साथ बहुत ज्यादती की। उनसे ऐसा व्यवहार किया जाता है जैसे वे अपराधी हैं। रामहित ने 14 अगस्त 2000 को सिंगल बैरल बंदूक (लाइसेंस संख्या3301/ खोराबार) ली थी।
इन्हें भेजा गया था जेल
दस्तावेज के मुताबिक खोराबार कुई बाजार निवासी विनोद कुमार, जर्दा गांव के भैंसहा टोला निवासी जगदीश शुक्ला, जंगल सिकरी निवासी मोहम्मद बिन कासिम, छपरा गांव निवासी रामहित यादव, मिर्जापुर निवासी राम आशीष, जंगल रामलखना निवासी विजय प्रताप सिंह, जंगल चौरी टोला शेख निवासी महताब आलम, रायगंज बाजार निवासी रामचन्द्र, नवां अव्वल निवासी राम नयन और राम निवास यादव निवासी जंगलचौरी को फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आधार पर हथियार रखने के आरोप में जेल भेजा गया था। इनमें से अब तक रामअशीष और जगदीश शुक्ला को छोड़कर सभी को मूल अभिलेख की सत्यापित कॉपी जारी की जा चुकी है।
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गोरखपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस के सनसनीखेज मामले में खोराबार थाने से जिन 10 बेगुनाहों को पुलिस ने जेल भेजा था, उनमें से एक और लाइसेंसधारी सरकारी कर्मचारी रामहित यादव पुत्र रामकवल यादव के मूल रिकॉर्ड कलेक्ट्रेट से मिल गए हैं। जिला प्रशासन ने उनका लाइसेंस सही होने की तस्दीक करते हुए जल्द विवेचना पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया है। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन का कहना है कि सभी बेगुनाह सरकारी कर्मचारियों का निलंबन निरस्त किया जा रहा है। रामहित का भी निलंबन निरस्त हो जाएगा।
रामहित, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग सरदारनगर में प्रधान सहायक के पद पर तैनात हैं। फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में उन्हें भी छह अक्तूबर को खोराबार पुलिस ने 10 बेगुनाहों के साथ जेल भेज दिया था। तभी से वह निलंबित चल रहे हैं। रामहित ने अमर उजाला को बताया कि पुलिस ने उनके साथ बहुत ज्यादती की। उनसे ऐसा व्यवहार किया जाता है जैसे वे अपराधी हैं। रामहित ने 14 अगस्त 2000 को सिंगल बैरल बंदूक (लाइसेंस संख्या3301/ खोराबार) ली थी।
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इन्हें भेजा गया था जेल
दस्तावेज के मुताबिक खोराबार कुई बाजार निवासी विनोद कुमार, जर्दा गांव के भैंसहा टोला निवासी जगदीश शुक्ला, जंगल सिकरी निवासी मोहम्मद बिन कासिम, छपरा गांव निवासी रामहित यादव, मिर्जापुर निवासी राम आशीष, जंगल रामलखना निवासी विजय प्रताप सिंह, जंगल चौरी टोला शेख निवासी महताब आलम, रायगंज बाजार निवासी रामचन्द्र, नवां अव्वल निवासी राम नयन और राम निवास यादव निवासी जंगलचौरी को फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आधार पर हथियार रखने के आरोप में जेल भेजा गया था। इनमें से अब तक रामअशीष और जगदीश शुक्ला को छोड़कर सभी को मूल अभिलेख की सत्यापित कॉपी जारी की जा चुकी है।
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