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जेई-एईएस की रिपोर्ट रोजाना नहीं भेजते लैब के अधिकारी
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जेई-एईएस की रिपोर्ट रोजाना नहीं भेजते लैब के अधिकारी
गोरखपुर। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) की रिपोर्टिंग के प्रति जिले के निजी और सरकारी अस्पताल संवेदनशील नहीं हैं। जेई और एईएस केसों की जांच रिपोर्ट रोजाना भेजने की जगह कुछ अस्पतालों ने दो दिन तक देरी की। बुधवार को जिला अस्पताल और इंसेफेलाइटिस लैब का निरीक्षण करने आए अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. जनार्दन त्रिपाठी ने यह खामियां पकड़ीं। रिकॉर्ड रखने में लापरवाही बरतने पर उन्होंने मातहतों को जमकर डांटा।
एडी हेल्थ डॉ. जनार्दन त्रिपाठी बुधवार दोपहर जिला अस्पताल पहुंचे। ओपीडी परिसर का निरीक्षण किया। वहां मरीजों की सहायता और जानकारी देेने वाला इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड बंद मिला। यहां जांच के बाद वह सीधे एसआईसी डॉ. राजकुमार गुप्ता के कमरे में पहुंचे। यहां कर्मचारियों की हाजिरी जांची और डिस्प्ले बंद होने का कारण पूछा। डॉ. राजकुमार ने बताया कि डिस्प्ले का स्विच पंखे और लाइट के साथ ही है कभी कभी मरीज या उनके तीमारदार ही बंद कर देते हैं। एडी हेल्थ ने तुरंत डिस्प्ले चालू करवाने के निर्देश दिए। इसके बाद वह इंसेफेलाइटिस लैब का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां इंसेफेलाइटिस के मरीजों के सीरम की जांच की जाती है। निरीक्षण के दौरान उन्होेंने पाया कि कई निजी अस्पतालों के सैंपल पॉजिटिव पाए गए लेकिन उनकी रिपोर्ट जिला अस्पताल और संबंधित अस्पतालों को दो दिन बाद भेजी गई। जांच रिपोर्ट भेजने में लापरवाही करने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए इस तुरंत दुरुस्त करने का आदेश दिया। उन्होंने ऑपरेशन थियेटर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने ऑपरेशन थियेटर को विसंक्रमित किए जाने का निर्देश दिया।
बिना तैयारी पहुंचे सीएचसी-पीएचसी प्रभारी, डांट पड़ी
एडी हेल्थ डॉ. जनार्दन त्रिपाठी ने निरीक्षण से पहले सीएमओ कार्यालय के प्रेरणाश्री सभागार में सीएचसी-पीएचसी प्रभारियों के साथ बैठक की। एडी हेल्थ ने प्रभारियों से उनके स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजोें की जानकारी मांगी। कोई भी प्रभारी रिकॉर्ड लेकर नहीं पहुंचा था। जवाब नहीं मिलने पर एडी हेल्थ ने नाराजगी जताई और सभी को जमकर डांटा। सोमवार को पूरे दस्तावेज लेकर हाजिर होने का आदेश दिया।
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गोरखपुर। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) की रिपोर्टिंग के प्रति जिले के निजी और सरकारी अस्पताल संवेदनशील नहीं हैं। जेई और एईएस केसों की जांच रिपोर्ट रोजाना भेजने की जगह कुछ अस्पतालों ने दो दिन तक देरी की। बुधवार को जिला अस्पताल और इंसेफेलाइटिस लैब का निरीक्षण करने आए अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. जनार्दन त्रिपाठी ने यह खामियां पकड़ीं। रिकॉर्ड रखने में लापरवाही बरतने पर उन्होंने मातहतों को जमकर डांटा।
एडी हेल्थ डॉ. जनार्दन त्रिपाठी बुधवार दोपहर जिला अस्पताल पहुंचे। ओपीडी परिसर का निरीक्षण किया। वहां मरीजों की सहायता और जानकारी देेने वाला इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड बंद मिला। यहां जांच के बाद वह सीधे एसआईसी डॉ. राजकुमार गुप्ता के कमरे में पहुंचे। यहां कर्मचारियों की हाजिरी जांची और डिस्प्ले बंद होने का कारण पूछा। डॉ. राजकुमार ने बताया कि डिस्प्ले का स्विच पंखे और लाइट के साथ ही है कभी कभी मरीज या उनके तीमारदार ही बंद कर देते हैं। एडी हेल्थ ने तुरंत डिस्प्ले चालू करवाने के निर्देश दिए। इसके बाद वह इंसेफेलाइटिस लैब का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां इंसेफेलाइटिस के मरीजों के सीरम की जांच की जाती है। निरीक्षण के दौरान उन्होेंने पाया कि कई निजी अस्पतालों के सैंपल पॉजिटिव पाए गए लेकिन उनकी रिपोर्ट जिला अस्पताल और संबंधित अस्पतालों को दो दिन बाद भेजी गई। जांच रिपोर्ट भेजने में लापरवाही करने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए इस तुरंत दुरुस्त करने का आदेश दिया। उन्होंने ऑपरेशन थियेटर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने ऑपरेशन थियेटर को विसंक्रमित किए जाने का निर्देश दिया।
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बिना तैयारी पहुंचे सीएचसी-पीएचसी प्रभारी, डांट पड़ी
एडी हेल्थ डॉ. जनार्दन त्रिपाठी ने निरीक्षण से पहले सीएमओ कार्यालय के प्रेरणाश्री सभागार में सीएचसी-पीएचसी प्रभारियों के साथ बैठक की। एडी हेल्थ ने प्रभारियों से उनके स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजोें की जानकारी मांगी। कोई भी प्रभारी रिकॉर्ड लेकर नहीं पहुंचा था। जवाब नहीं मिलने पर एडी हेल्थ ने नाराजगी जताई और सभी को जमकर डांटा। सोमवार को पूरे दस्तावेज लेकर हाजिर होने का आदेश दिया।
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