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एमएमएमयूटी देगा गैर पारंपरिक ऊर्जा को बढ़ावा
Gorakhpur
Updated Thu, 29 May 2014 05:31 AM IST
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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने आस्ट्रेलिया की संस्था आस्ट्रेेलियन विंड एनर्जी इंस्टीट्यूट एडब्ल्यूईआई से बुधवार को एक महत्वपूर्ण करार किया। करार के तहत दोनों मिलकर देश में गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देंगे और इस क्षेत्र में नए संसाधनों की तलाश करेंगे। आस्ट्रेलियन संस्था से करार करने वाला एमएमएमटीयू देश का पहला विश्वविद्यालय है। इस करार से देश में गैर पारंपरिक ऊर्जा के क्षेत्र के नए शोध सामने आने की उम्मीद है।
बुधवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओंकार सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि हमारा देश गैर पारंपकि उर्जा के क्षेत्र में काफी पीछे है। देश में इसे लेकर न तो कोई ठोस मानक है और न ही दक्ष मानवीय क्षमता। हालांकि गैर पारंपरिक ऊर्जा की देश में काफी गुंजाइश है। उन्होेंने कहा कि एडब्ल्यूईआई ग्लोबल स्तर की संस्था है। विश्वविद्यालय व एडब्ल्यूईआई मिलकर इस क्षेत्र में नवीनतम जानकारी जुटाएंगे।
एडब्ल्यूईआई के एशियाई क्षेत्र के सोमन दासगुप्ता ने बताया कि उनकी संस्था विंड, वायोगैस, वुड गैस, वेस्ट एनर्जी, सीवरेज एनर्जी, हाइड्रो एनर्जी के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रही है। इस करार के तहत दोनों संस्थान मिलकर नई विधा की तलाश करेंगे ताकि गैर परंपरागत ऊर्जा को आमजन के लिए सुलभ बनाया जा सके। चीनी तकनीक को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने इस बात अफसोस जताया कि कुछ गैर जानकार लोग चीन से रिजेक्टेड तकनीक लाकर भारत में स्थापित कर रहे हैं। इस मौके पर मौजूद एडब्ल्यूईआई तथा व्यवसायिक संस्था इंडस्ट्रीयल एंड कम्युनिटी एनर्जी ग्रुप के प्रभारी साइगफ्राइड ऐंगरर ने कहा कि संस्था का प्रयास भारत में स्वच्छ वातावरण, शुद्घ पेयजल तथा साफ-सफाई देना है।
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बुधवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओंकार सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि हमारा देश गैर पारंपकि उर्जा के क्षेत्र में काफी पीछे है। देश में इसे लेकर न तो कोई ठोस मानक है और न ही दक्ष मानवीय क्षमता। हालांकि गैर पारंपरिक ऊर्जा की देश में काफी गुंजाइश है। उन्होेंने कहा कि एडब्ल्यूईआई ग्लोबल स्तर की संस्था है। विश्वविद्यालय व एडब्ल्यूईआई मिलकर इस क्षेत्र में नवीनतम जानकारी जुटाएंगे।
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एडब्ल्यूईआई के एशियाई क्षेत्र के सोमन दासगुप्ता ने बताया कि उनकी संस्था विंड, वायोगैस, वुड गैस, वेस्ट एनर्जी, सीवरेज एनर्जी, हाइड्रो एनर्जी के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रही है। इस करार के तहत दोनों संस्थान मिलकर नई विधा की तलाश करेंगे ताकि गैर परंपरागत ऊर्जा को आमजन के लिए सुलभ बनाया जा सके। चीनी तकनीक को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने इस बात अफसोस जताया कि कुछ गैर जानकार लोग चीन से रिजेक्टेड तकनीक लाकर भारत में स्थापित कर रहे हैं। इस मौके पर मौजूद एडब्ल्यूईआई तथा व्यवसायिक संस्था इंडस्ट्रीयल एंड कम्युनिटी एनर्जी ग्रुप के प्रभारी साइगफ्राइड ऐंगरर ने कहा कि संस्था का प्रयास भारत में स्वच्छ वातावरण, शुद्घ पेयजल तथा साफ-सफाई देना है।
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