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एमएमएमयूटी का ऊर्जा गैसीफायर फैक्ट्री के साथ काम करने का प्रस्ताव
Gorakhpur
Updated Sun, 20 Apr 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के कुलपति प्रो. ओंकार सिंह ने मोतीराम अड्डा के ऊर्जा गैसीफायर फैक्ट्री के साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया है। प्रो. सिंह ने शुक्रवार को फैक्ट्री का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने फैक्ट्री के निदेशक एचआर जायसवाल और अन्य पदाधिकारियों के साथ वार्ता की। उन्होंने गैसीफायर (बिजली बनाने का संयंत्र) आधारित बिजली उत्पादन का प्रस्ताव भी रखा।
प्रो. सिंह, यांत्रिक अभियंत्रण विभाग के अध्यक्ष प्रो. डीके सिंह के साथ फैक्ट्री का अवलोकन किया। कुलपति ने फैक्ट्री की समस्याएं विश्वविद्यालय से साझा करने की सलाह दी। बताया कि उन समस्याओं को जानने के बाद यांत्रिक अभियंत्रण के बीटेक और एमटेक के विद्यार्थी शोध परियोजनाओं के जरिए उसे दूर करेंगे। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय स्तर से परियोजना तैयार कर राज्य अथवा केंद्र सरकार की आर्थिक मदद करने वाली फंडिंग एजेंसी को भेजी जाएगी। मंजूरी मिलने पर शोध किया जाएगा। योजना का उद्देश्य छोटे उद्यमियों से मिलकर संयुक्त रूप से काम करना है। फैक्ट्री प्रबंधन के साथ वार्ता के दौरान गांवों में उपलब्ध बायोमास (कचरा) का उपयोग कर गैसीफायर के जरिए बिजली उत्पादन पर सहमति बनी है। परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए फंडिंग एंजेसी से संपर्क करने के बाद पायलट प्रोजेक्ट के तहत किसी एक गांव को चुनकर वहां बायोमास आधारित बिजली उत्पादन संयंत्रों के जरिए बिजली आपूर्ति की जाएगी। फैक्ट्री के प्रबंध निदेशक एके जायसवाल ने कुलपति के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
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प्रो. सिंह, यांत्रिक अभियंत्रण विभाग के अध्यक्ष प्रो. डीके सिंह के साथ फैक्ट्री का अवलोकन किया। कुलपति ने फैक्ट्री की समस्याएं विश्वविद्यालय से साझा करने की सलाह दी। बताया कि उन समस्याओं को जानने के बाद यांत्रिक अभियंत्रण के बीटेक और एमटेक के विद्यार्थी शोध परियोजनाओं के जरिए उसे दूर करेंगे। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय स्तर से परियोजना तैयार कर राज्य अथवा केंद्र सरकार की आर्थिक मदद करने वाली फंडिंग एजेंसी को भेजी जाएगी। मंजूरी मिलने पर शोध किया जाएगा। योजना का उद्देश्य छोटे उद्यमियों से मिलकर संयुक्त रूप से काम करना है। फैक्ट्री प्रबंधन के साथ वार्ता के दौरान गांवों में उपलब्ध बायोमास (कचरा) का उपयोग कर गैसीफायर के जरिए बिजली उत्पादन पर सहमति बनी है। परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए फंडिंग एंजेसी से संपर्क करने के बाद पायलट प्रोजेक्ट के तहत किसी एक गांव को चुनकर वहां बायोमास आधारित बिजली उत्पादन संयंत्रों के जरिए बिजली आपूर्ति की जाएगी। फैक्ट्री के प्रबंध निदेशक एके जायसवाल ने कुलपति के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
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