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बाबा लोगों के लिए बने रहे पहेली
basti
Updated Fri, 22 Dec 2017 11:47 PM IST
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अाश्रम पर लगा ताला।
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती/कुदरहा। बाबा सच्चिदानंद का आश्रम भले ही कुदरहा के सेल्हरा में है। पर, इस संत कुटीर आश्रम की गतिविधियाें का स्थानीय सरोकार ज्यादा नहीं रहा। ऐसे में स्थानीय लोगों के लिए बाबा की जीवन शैली एक पहेली की तरह रही। यहां बाहरी अनुयायियों, विशेषकर साध्वियों की संख्या ज्यादा होने पर लोगों को कुछ आशंका जरूर होती थी। ऐसे में आश्रम से जुड़े छह लोगों पर दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद आसपास के लोगों की आश्रम को लेकर जिज्ञासा बढ़ गई है। एपीएन पीजी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही सेल्हरा के श्यामचंद्र बाबा सच्चिदानंद के संपर्क में आए थे। इसके बाद बाबा श्यामचंद्र के घर आने-जाने लगे। धीरे-धीरे पूरा परिवार उनका भक्त बन गया और श्यामचंद संन्यास लेकर तपस्यानंद बन गए। क्रम आगे बढ़ा तो चार बहनें भी साध्वी बन गईं। कुनबा बढ़ता देखकर बाबा सच्चिदानंद ने आश्रम बनाने के लिए जमीन मांगी तो परिवार के बुजुर्ग रुपई चौधरी बहकावे में आ गए और पांच बीघा जमीन आश्रम के लिए दे दी। इसके पीछे उनकी सोच यह थी कि श्यामचंद्र से तपस्यानंद बने परिवार के बेटे को कोई दिक्कत न हो। बाबा ने गुमराह कर आश्रम की जमीन को अपने नाम करा लिया। पक्का निर्माण होने के बाद यहां करीब 50 की संख्या में साध्वियां आकर रहने लगीं। इच्छानुसार बाबा भी आते। ऐसे में बाबा की गतिविधियों पर लोगों को शक होने लगा। आश्रम के पास के लोनियापुरवा के राम लौट बताते हैं कि कभी भी हम लोगों को आश्रम में नहीं बुलाया गया। न तो कभी यहां कोई धार्मिक अनुष्ठान होते देखा गया। राम उजागिर बताते हैं कि आते-जाते जब भी बाबा दिखे तो साध्वियों के बीच ही घिरे रहते थे। महिलाएं ही स्नान करातीं और अन्य व्यवस्थाएं करतीं। परसांव के रहने वाले संदीप का कहना है कि शुरू में आसपास के लोगों ने आश्रम में भक्ति भाव से जाने का प्रयास किया तो उनके साथ रूखा व्यवहार हुआ। ऐसे में लोगों ने धीरे-धीरे दूरी बना ली। कुड़वा गांव के सुरेश कुमार बताते हैं कि आने जाने का रास्ता हमारे गांव से ही है। बाबा सच्चिदानंद मंगलवार रात ही साध्वियों को लेकर वहां से जाने लगे। बुधवार सुबह आश्रम पर ताला लटकने से कुछ गड़बड़ी की आशंका हुई।
परिवार को दो माह से तपस्यानंद का पता नहीं
तपस्यानंद बने श्यामचंद्र का परिवार अपने को ठगा महसूस कर रहा है। भाई गिरिजाशंकर का कहना है कि हम लोग भक्तिभाव से जुड़े रहे। बाबा का आदर सम्मान करते रहे, लेकिन कभी भी संदेह नहीं हुआ कि बाबा इस प्रकार के हैं। परिवार के सदस्यों को इस आश्रम पर नहीं लाया गया। सभी को बस्ती के मूड़घाट स्थित संत कुटीर में ही रखा जाता था। मेरे भाई को बाबा का आचार-विचार कुछ महीनों से खराब लगने लगा। जिससे उन्होंने आश्रम छोड़ दिया। करीब दो महीने से भाई श्यामचंद्र उर्फ तपस्यानंद की जानकारी भी नहीं मिल सकी है। भाई के अनुसार यदि जल्द ही जानकारी नहीं मिली तो तहरीर देंगे।
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परिवार को दो माह से तपस्यानंद का पता नहीं
तपस्यानंद बने श्यामचंद्र का परिवार अपने को ठगा महसूस कर रहा है। भाई गिरिजाशंकर का कहना है कि हम लोग भक्तिभाव से जुड़े रहे। बाबा का आदर सम्मान करते रहे, लेकिन कभी भी संदेह नहीं हुआ कि बाबा इस प्रकार के हैं। परिवार के सदस्यों को इस आश्रम पर नहीं लाया गया। सभी को बस्ती के मूड़घाट स्थित संत कुटीर में ही रखा जाता था। मेरे भाई को बाबा का आचार-विचार कुछ महीनों से खराब लगने लगा। जिससे उन्होंने आश्रम छोड़ दिया। करीब दो महीने से भाई श्यामचंद्र उर्फ तपस्यानंद की जानकारी भी नहीं मिल सकी है। भाई के अनुसार यदि जल्द ही जानकारी नहीं मिली तो तहरीर देंगे।
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