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सीएम ने दी कर्जमाफी, बैंकों ने बढ़ाई आपाधापी
Updated Wed, 11 Oct 2017 01:43 AM IST
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टीपी शाही
गोरखपुर।
गगहा ब्लॉक के रियांव गांव के किसान रामलखन यादव ने एसबीआई की रकहट ब्रांच से 2014 में 73 हजार रुपये कर्ज लिया था। पिछले दिनों गोरखपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में समारोह के बीच मुख्यमंत्री के हाथों उन्हें 78 हजार रुपये कर्जमाफी का प्रमाणपत्र मिला, कर्ज से आजादी से उनकी खुशियां बढ़ीं तो घर वालों की उम्मीदें। लेकिन ये खुशी और उम्मीद टिकाऊ साबित नहीं हुई। क्लियरेंस का सपना लेकर रामलखन बैंक पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि कर्ज मुक्त किसान की श्रेणी में आने के लिए 20 हजार रुपये और जमा करने होंगे। बीस हजार की इस मांग की स्पष्ट वजह पता न चलने से रामलखन यह समझ नहीं पा रहे कि उन्हें कर्जमाफी का पूरा लाभ मिला भी अथवा नहीं।
रामलखन की तरह कर्जमाफी का प्रमाणपत्र हासिल कर चुके जिले के कई और किसान भी ऐसे हालात का सामना कर रहे हैं। रियांव गांव के सूरजनाथ निषाद को भी एसबीआई से लिए 60 हजार रुपये कर्ज की आंशिक अदायगी के बाद दस हजार की बकायेदारी पर 11,652 रुपये कर्जमाफी का प्रमाणपत्र मिला था। बैंक ने उनसे भी खाता क्लियर कराने के एवज में 8500 रुपये की मांग की है। एक अन्य उदाहरण है किसान रामपलट गुप्ता का, जिन्होंने साल 2013 में बैंक से 13 हजार का कर्ज लिया था। उनको 21,043 रुपये की कर्ज माफी का प्रमाणपत्र मिला लेकिन बैंक के मुताबिक उन पर अभी 5800 रुपये की बकायेदारी बरकरार है।
इन स्थितियों को लेकर बैंकों के प्रबंधतंत्र की तरफ से भी स्पष्ट बयानी नहीं है। कहीं किसानों को बताया जा रहा है कि सरकार ने मूलधन माफ किया है, ब्याज नहीं, तो कहीं कुछ और कारण बताए जा रहे हैं। यहीं नहीं कुछ बैंकों में एनओसी देने के एवज में भी किसानों से रकम की मांग की जा रही है।
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बड़ी धनराशि की मांग अव्यावहारिक, जांच कराएंगे
मुख्य विकास अधिकारी अनुज सिंह कर्जमाफी की श्रेणी में आए किसानों से बैंकों की इस तरह की मांग पर हैरानी जता रहे हैं। उनका कहना है कि मार्च 2016 तक का जो भी कर्ज किसानों का था उसे माफ किया जा चुका है। कुछ ब्याज बकाया हो सकता है लेकिन इतनी बड़ी धनराशि बकाया होना संभव नहीं है। बैंकों की ओर से किसानों से बड़ी रकम की मांग के मामले की जांच कराएंगे।
गोरखपुर।
गगहा ब्लॉक के रियांव गांव के किसान रामलखन यादव ने एसबीआई की रकहट ब्रांच से 2014 में 73 हजार रुपये कर्ज लिया था। पिछले दिनों गोरखपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में समारोह के बीच मुख्यमंत्री के हाथों उन्हें 78 हजार रुपये कर्जमाफी का प्रमाणपत्र मिला, कर्ज से आजादी से उनकी खुशियां बढ़ीं तो घर वालों की उम्मीदें। लेकिन ये खुशी और उम्मीद टिकाऊ साबित नहीं हुई। क्लियरेंस का सपना लेकर रामलखन बैंक पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि कर्ज मुक्त किसान की श्रेणी में आने के लिए 20 हजार रुपये और जमा करने होंगे। बीस हजार की इस मांग की स्पष्ट वजह पता न चलने से रामलखन यह समझ नहीं पा रहे कि उन्हें कर्जमाफी का पूरा लाभ मिला भी अथवा नहीं।
रामलखन की तरह कर्जमाफी का प्रमाणपत्र हासिल कर चुके जिले के कई और किसान भी ऐसे हालात का सामना कर रहे हैं। रियांव गांव के सूरजनाथ निषाद को भी एसबीआई से लिए 60 हजार रुपये कर्ज की आंशिक अदायगी के बाद दस हजार की बकायेदारी पर 11,652 रुपये कर्जमाफी का प्रमाणपत्र मिला था। बैंक ने उनसे भी खाता क्लियर कराने के एवज में 8500 रुपये की मांग की है। एक अन्य उदाहरण है किसान रामपलट गुप्ता का, जिन्होंने साल 2013 में बैंक से 13 हजार का कर्ज लिया था। उनको 21,043 रुपये की कर्ज माफी का प्रमाणपत्र मिला लेकिन बैंक के मुताबिक उन पर अभी 5800 रुपये की बकायेदारी बरकरार है।
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इन स्थितियों को लेकर बैंकों के प्रबंधतंत्र की तरफ से भी स्पष्ट बयानी नहीं है। कहीं किसानों को बताया जा रहा है कि सरकार ने मूलधन माफ किया है, ब्याज नहीं, तो कहीं कुछ और कारण बताए जा रहे हैं। यहीं नहीं कुछ बैंकों में एनओसी देने के एवज में भी किसानों से रकम की मांग की जा रही है।
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बड़ी धनराशि की मांग अव्यावहारिक, जांच कराएंगे
मुख्य विकास अधिकारी अनुज सिंह कर्जमाफी की श्रेणी में आए किसानों से बैंकों की इस तरह की मांग पर हैरानी जता रहे हैं। उनका कहना है कि मार्च 2016 तक का जो भी कर्ज किसानों का था उसे माफ किया जा चुका है। कुछ ब्याज बकाया हो सकता है लेकिन इतनी बड़ी धनराशि बकाया होना संभव नहीं है। बैंकों की ओर से किसानों से बड़ी रकम की मांग के मामले की जांच कराएंगे।