{"_id":"59ca8a0a4f1c1bae538b48ed","slug":"81506445834-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जांच में 250 परियोजनाओं का एस्टीमेट नहीं दे सकी जिपं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जांच में 250 परियोजनाओं का एस्टीमेट नहीं दे सकी जिपं
Updated Tue, 26 Sep 2017 10:40 PM IST
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सिद्धार्थनगर। जिला पंचायत में बिना एस्टीमेट ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की शिकायत पुष्ट हो गई। जिन 288 परियोजनाओं के लिए टेंडर मांगे गए हैं, उनमें 250 के एस्टीमेट नदारद हैं। सोमवार को हुई जांच के बाद यह खुलासा हुआ है। जांच समिति के समक्ष परियोजनाओं की तकनीकी स्वीकृति की फाइल तो रखी गई, लेकिन बार-बार मांगने के बाद भी जिम्मेदार सोमवार देर शाम तक एस्टीमेट उपलब्ध नहीं करा सके। समिति ने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दी है। इसमें स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि जिला पंचायत के पास जांच होने तक एस्टीमेट मौजूद नहीं था। बता दें कि बिना एस्टीमेट टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की खबर ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद हुई जांच में भी यह पुष्ट हुआ है। शासकीय अनुदान से कार्य कराने के लिए जिला पंचायत ने शनिवार को 288 परियोजनाओं के टेंडर प्रकाशित कराए थे। तकरीबन 18 करोड़ की लागत वाली इन परियोजनाओं में 38 गड्ढा मुक्ति योजना की हैं, जबकि शेष नए कार्य हैं। नियमों के तहत एस्टीमेट पर वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के बाद ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इससे इतर जिला पंचायत में बिना एस्टीमेट के ही टेंडर बुला लिए गए। जिपं सदस्यों ने आपत्ति जताई तो रविवार को दफ्तर खोलकर एस्टीमेट तैयार होने लगा। मीडिया के माध्यम से डीएम को पता चला तो उन्होंने सीडीओ के निर्देशन में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच के निर्देश दिए थे। सोमवार को समिति के सदस्य परियोजना निदेशक संत कुमार व वरिष्ठ कोषाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव ने जिला पंचायत पहुंचकर जांच शुरू की। टेंडर से जुड़े सभी दस्तावेज जब्त कर छानबीन शुरू की तो एस्टीमेट नदारद मिला। जिला पंचायत के जिम्मेदार तकनीकी स्वीकृति के कागजात तो सामने रखते रहे, लेकिन एस्टीमेट मांगने पर भी नहीं दे सके। यह तर्क दिया जाता रहा कि जीएसटी लागू होने के बाद पूर्व में तैयार एस्टीमेट को संबंधित अभियंताओं को संशोधन के लिए दिया गया है।
पूरे दिन इंतजार के बावजूद जिला पंचायत के अधिकारी न तो संशोधित एस्टीमेट पेश कर सके और न ही पूर्व में तैयार एस्टीमेट ही दिखा सके। जांच टीम ने सभी दस्तावेज खंगालने के बाद इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दी है। इस संबंध में परियोजना निदेशक संत कुमार ने बताया कि दो बिंदुओं पर जांच सौंपी गई है। पहला बिना एस्टीमेट टेंडर कराने को लेकर था। जांच के दौरान गड्ढा मुक्ति योजना की 38 परियोजनाओं के एस्टीमेट तो दिए गए, लेकिन 250 अन्य कार्यों का कोई एस्टीमेट उपलब्ध नहीं कराया गया। जांच तिथि तक एस्टीमेट न देने का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट सीडीओ को भेज दी गई है। उधर, सीडीओ अनिल कुमार मिश्र का कहना था कि जांच के दौरान गड़बड़ी की बात सामने आई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
पहले भी चर्चा में रहे हैं एएमए : जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी अरविंद आनंद पहले भी चर्चा में रहे हैं। देवरिया सहित कई जनपदों में तैनाती के दौरान भी कई अनियमितताएं रहीं। मंगलवार को इनके पूर्व के कार्यों से जुड़े दस्तावेज सीडीओ को उपलब्ध कराते हुए कार्रवाई की मांग की है। पुराने रिकार्ड देते हुए ताजा प्रकरण में उनकी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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वर्ष 2016-17 के कार्यों की हो जांच : जिला पंचायत सदस्य मो.उमर, सदस्य श्रीमति के प्रतिनिधि रामसमूझ चौधरी व किसमाती देवी के प्रतिनिधि मुनीराम ने मंगलवार को सीडीओ को पत्र देकर वित्तीय सत्र 2016-17 में हुए जिला पंचायत के कार्यों की जांच की मांग की। सौंपे पत्र में कहा कि इस सत्र में किन-किन योजनाओं के तहत किन-किन परियोजनाओं पर काम कराया गया है, इसकी विस्तृत जांच कराई जाए तो बड़ी गड़बड़ी सामने आएगी। सीडीओ ने कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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पूरे दिन इंतजार के बावजूद जिला पंचायत के अधिकारी न तो संशोधित एस्टीमेट पेश कर सके और न ही पूर्व में तैयार एस्टीमेट ही दिखा सके। जांच टीम ने सभी दस्तावेज खंगालने के बाद इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दी है। इस संबंध में परियोजना निदेशक संत कुमार ने बताया कि दो बिंदुओं पर जांच सौंपी गई है। पहला बिना एस्टीमेट टेंडर कराने को लेकर था। जांच के दौरान गड्ढा मुक्ति योजना की 38 परियोजनाओं के एस्टीमेट तो दिए गए, लेकिन 250 अन्य कार्यों का कोई एस्टीमेट उपलब्ध नहीं कराया गया। जांच तिथि तक एस्टीमेट न देने का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट सीडीओ को भेज दी गई है। उधर, सीडीओ अनिल कुमार मिश्र का कहना था कि जांच के दौरान गड़बड़ी की बात सामने आई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
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पहले भी चर्चा में रहे हैं एएमए : जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी अरविंद आनंद पहले भी चर्चा में रहे हैं। देवरिया सहित कई जनपदों में तैनाती के दौरान भी कई अनियमितताएं रहीं। मंगलवार को इनके पूर्व के कार्यों से जुड़े दस्तावेज सीडीओ को उपलब्ध कराते हुए कार्रवाई की मांग की है। पुराने रिकार्ड देते हुए ताजा प्रकरण में उनकी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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वर्ष 2016-17 के कार्यों की हो जांच : जिला पंचायत सदस्य मो.उमर, सदस्य श्रीमति के प्रतिनिधि रामसमूझ चौधरी व किसमाती देवी के प्रतिनिधि मुनीराम ने मंगलवार को सीडीओ को पत्र देकर वित्तीय सत्र 2016-17 में हुए जिला पंचायत के कार्यों की जांच की मांग की। सौंपे पत्र में कहा कि इस सत्र में किन-किन योजनाओं के तहत किन-किन परियोजनाओं पर काम कराया गया है, इसकी विस्तृत जांच कराई जाए तो बड़ी गड़बड़ी सामने आएगी। सीडीओ ने कार्रवाई का आश्वासन दिया।