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ठेकेदार कराते थे लिपिकों का टूर
Updated Sun, 03 Sep 2017 01:43 AM IST
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गोरखपुर।
ठेकेदारों और लिपिकों की साठगांठ की रोज नई बातें सामने आ रही हैं। मेडिकल कॉलेज में भुगतान से जुड़े लिपिकों ने मोटी कमाई की। हर साल उन्हें दो से तीन बार टूर पर भेजा जाता था। कुछ ठेकेदार पूरा खर्च उठाते थे। इसमें प्लेन के टिकट से लेकर लिपिकों को लग्जरी कार तक उपलब्ध कराया जाता था।
मेडिकल कॉलेज के सूत्रों के मुताबिक सैरसपाटे के शौकीन इन लिपिकों ने इसके बदले उन कामों के नाम पर भी भुगतान किया जो असलियत में हुए ही नहीं। इसके बदले में परिवार के साथ टूर पैकेज से लेकर कमीशन उन्हें समय-समय पर मिलता रहा। अब पुलिस इन लिपिकों की कुंडली खंगाल रही है। साथ ही चहेते ठेकेदारों से भी पूछताछ करने की तैयारी है।
बंद फर्म के नाम पर जारी हुआ काम
मेडिकल कॉलेज सूत्रों ने बताया कि 2015 में इसी तरह एक ऐसी फर्म को काम दिया गया जो कि बंद हो चुकी थी। इस काम में सिलेंडर से होने वाली ऑक्सीजन सप्लाई के उपकरणों की मरम्मत एवं अनुरक्षण का काम कराना था। इसके बाद भी इस नाम पर भुगतान हुआ।
ठेकेदारों और लिपिकों की साठगांठ की रोज नई बातें सामने आ रही हैं। मेडिकल कॉलेज में भुगतान से जुड़े लिपिकों ने मोटी कमाई की। हर साल उन्हें दो से तीन बार टूर पर भेजा जाता था। कुछ ठेकेदार पूरा खर्च उठाते थे। इसमें प्लेन के टिकट से लेकर लिपिकों को लग्जरी कार तक उपलब्ध कराया जाता था।
मेडिकल कॉलेज के सूत्रों के मुताबिक सैरसपाटे के शौकीन इन लिपिकों ने इसके बदले उन कामों के नाम पर भी भुगतान किया जो असलियत में हुए ही नहीं। इसके बदले में परिवार के साथ टूर पैकेज से लेकर कमीशन उन्हें समय-समय पर मिलता रहा। अब पुलिस इन लिपिकों की कुंडली खंगाल रही है। साथ ही चहेते ठेकेदारों से भी पूछताछ करने की तैयारी है।
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बंद फर्म के नाम पर जारी हुआ काम
मेडिकल कॉलेज सूत्रों ने बताया कि 2015 में इसी तरह एक ऐसी फर्म को काम दिया गया जो कि बंद हो चुकी थी। इस काम में सिलेंडर से होने वाली ऑक्सीजन सप्लाई के उपकरणों की मरम्मत एवं अनुरक्षण का काम कराना था। इसके बाद भी इस नाम पर भुगतान हुआ।
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