{"_id":"5a7daaf54f1c1b93268b930c","slug":"71518185205-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्ची की हत्या के आरोपी को उम्रकैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्ची की हत्या के आरोपी को उम्रकैद
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Fri, 09 Feb 2018 08:13 PM IST
विज्ञापन
court
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दस वर्षीय बच्ची की हत्या कर शव जलाने और साक्ष्य छिपाने का जुर्म सिद्ध पाए जाने पर विशेष न्यायाधीश अवधेश कुमार ने अभियुक्त श्रीराम केवट उर्फ सीरी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर आठ माह की सजा अलग से भुगतनी होगी।
कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी संतोष कुमार यादव का कहना था कि वारदात तीन जून 1998 को हुई थी। आरोपी श्रीराम केवट जयराम का पड़ोसी है। घटना के समय श्रीराम पड़ोसी जयराम के घर आया और कहा कि उसके यहां कोई है नहीं, वह अपनी लड़की से पानी भेजवा दे। जयराम ने विश्वास करके अपनी दस वर्षीय बच्ची प्रेमशीला को पानी लेकर भेज दिया। बच्ची के काफी देर बाद भी वापस न आने पर उसके पिता देखने गए तो पता चला कि श्रीराम के घर ताला लगा हुआ था। पिता अपनी बेटी और श्रीराम को खोजता रहा।
अगले दिन श्रीराम के घर से बदबू आने पर शाम चार बजे कुछ लोगों की मौजूदगी में मकान का ताला तोड़ा गया तो बच्ची का अधजला शव कमरे में चारपाई की आड़ में छिपाई हुई मिली। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोपी पर हत्या और साक्ष्य छिपाने के आरोप में केस दर्ज हुआ था। कोर्ट में विचारण के दौरान अभियुक्त ने जुर्म से इन्कार किया और रंजिशन फंसाए जाने की बात कही। न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध सबूतों के आधार पर सजा सुनाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी संतोष कुमार यादव का कहना था कि वारदात तीन जून 1998 को हुई थी। आरोपी श्रीराम केवट जयराम का पड़ोसी है। घटना के समय श्रीराम पड़ोसी जयराम के घर आया और कहा कि उसके यहां कोई है नहीं, वह अपनी लड़की से पानी भेजवा दे। जयराम ने विश्वास करके अपनी दस वर्षीय बच्ची प्रेमशीला को पानी लेकर भेज दिया। बच्ची के काफी देर बाद भी वापस न आने पर उसके पिता देखने गए तो पता चला कि श्रीराम के घर ताला लगा हुआ था। पिता अपनी बेटी और श्रीराम को खोजता रहा।
विज्ञापन
अगले दिन श्रीराम के घर से बदबू आने पर शाम चार बजे कुछ लोगों की मौजूदगी में मकान का ताला तोड़ा गया तो बच्ची का अधजला शव कमरे में चारपाई की आड़ में छिपाई हुई मिली। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोपी पर हत्या और साक्ष्य छिपाने के आरोप में केस दर्ज हुआ था। कोर्ट में विचारण के दौरान अभियुक्त ने जुर्म से इन्कार किया और रंजिशन फंसाए जाने की बात कही। न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध सबूतों के आधार पर सजा सुनाई।
विज्ञापन