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अफरातफरी के बीच आंसुओं की बाढ़
Updated Sat, 12 Aug 2017 01:44 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक के बाद एक मौतों के बाद अफरातफरी का आलम हो गया। तीमारदार अपनों का हाल जानने के लिए बेचैन हो गए तो वहीं सूचना पर विभिन्न दलों के नेता और कार्यकर्ताओं की भीड़ भी जुट गई। कहीं हंगामा होने लगा तो किसी ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस बीच कोई अपनों को खोकर जार-जार रो रहा था तो कोई अपने बच्चे को तलाशते हुए फूट फूटकर। कहीं खाकी माहौल संभालने की कोशिश में थी तो कहीं बेसाख्ता रो रहे अपनों को ढांढस बंधाने का प्रयास चल रहा था। मेडिकल कॉलेज के तारी अफरातफरी के इस आलम के बीच अपनों को खोने वालों के लगातार आंसू बहते रहे।
शाम होते-होते मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रशासन के अफसरों ने डेरा डाल दिया था। बवाल की आशंका को लेकर भारी पैमाने पर फोर्स भी मौके पर बुला ली गई थी। प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश में जुटा रहा। हालांकि, वक्त बीतने के साथ प्रशासन के झूठ से पर्दा उठता गया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की खामियां सामने आती गईं और इसके साथ ही खुलती गईं अपनों को गंवाने वाले परिवारों की पीड़ा की अंतहीन व्यथा। देर रात मासूम विवेक को लिए परिवारवाले परिसर में फफक रहे थे। आरोप था कि इलाजरत विवेक को बाहर कर दिया गया था। इससे कुछ घंटे पहले एक मां अफरातफरी के माहौल में अपने बेटे को तलाशती हुई सुध-बुध खो दे रही थीं। बेजार रो रहे लोगों में बड़ी संख्या उनकी भी थी जिन्हें मेडिकल कॉलेज प्रशासन उनके बच्चों के शव नहीं दे रहा था।
फर्म के बाद स्टाफ नेे भी चिट्ठी लिखकर चेताया था
गोरखपुर। एक अगस्त को बकाया के चलते आगे ऑक्सीजन सप्लाई न कर पाने की मजबूरी बताते हुए फर्म ने मेडिकल कॉलेज समेत जिला प्रशासन को पत्र भेजा था। इसके बाद भी न तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया न ही जिला प्रशासन ने इस पर ध्यान दिया। हालात, बेकाबू होता देखकर सेंट्रल ऑक्सीजन पाइप लाइन के ऑपरेटरों ने गुरुवार सुबह को मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखकर आने वाली भयावह स्थिति को लेकर सचेत किया था। इस पत्र पर भी जिम्मेदार जाग जाते तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक के बाद एक मौतों के बाद अफरातफरी का आलम हो गया। तीमारदार अपनों का हाल जानने के लिए बेचैन हो गए तो वहीं सूचना पर विभिन्न दलों के नेता और कार्यकर्ताओं की भीड़ भी जुट गई। कहीं हंगामा होने लगा तो किसी ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस बीच कोई अपनों को खोकर जार-जार रो रहा था तो कोई अपने बच्चे को तलाशते हुए फूट फूटकर। कहीं खाकी माहौल संभालने की कोशिश में थी तो कहीं बेसाख्ता रो रहे अपनों को ढांढस बंधाने का प्रयास चल रहा था। मेडिकल कॉलेज के तारी अफरातफरी के इस आलम के बीच अपनों को खोने वालों के लगातार आंसू बहते रहे।
शाम होते-होते मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रशासन के अफसरों ने डेरा डाल दिया था। बवाल की आशंका को लेकर भारी पैमाने पर फोर्स भी मौके पर बुला ली गई थी। प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश में जुटा रहा। हालांकि, वक्त बीतने के साथ प्रशासन के झूठ से पर्दा उठता गया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की खामियां सामने आती गईं और इसके साथ ही खुलती गईं अपनों को गंवाने वाले परिवारों की पीड़ा की अंतहीन व्यथा। देर रात मासूम विवेक को लिए परिवारवाले परिसर में फफक रहे थे। आरोप था कि इलाजरत विवेक को बाहर कर दिया गया था। इससे कुछ घंटे पहले एक मां अफरातफरी के माहौल में अपने बेटे को तलाशती हुई सुध-बुध खो दे रही थीं। बेजार रो रहे लोगों में बड़ी संख्या उनकी भी थी जिन्हें मेडिकल कॉलेज प्रशासन उनके बच्चों के शव नहीं दे रहा था।
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फर्म के बाद स्टाफ नेे भी चिट्ठी लिखकर चेताया था
गोरखपुर। एक अगस्त को बकाया के चलते आगे ऑक्सीजन सप्लाई न कर पाने की मजबूरी बताते हुए फर्म ने मेडिकल कॉलेज समेत जिला प्रशासन को पत्र भेजा था। इसके बाद भी न तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया न ही जिला प्रशासन ने इस पर ध्यान दिया। हालात, बेकाबू होता देखकर सेंट्रल ऑक्सीजन पाइप लाइन के ऑपरेटरों ने गुरुवार सुबह को मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखकर आने वाली भयावह स्थिति को लेकर सचेत किया था। इस पत्र पर भी जिम्मेदार जाग जाते तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता।
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