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किस्सा मौजपुर का से कन्या भ्रूण हत्या पर चोट
Updated Mon, 16 Oct 2017 01:19 AM IST
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नाटक का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : Amar Ujala
गोरखपुर।
गोरखपुर थिएटर एसोसिएशन की ओर से मासिक नाट्य श्रृंखला की 17वीं कड़ी में रंगाश्रम के कलाकारों ने ‘किस्सा मौजपुर का’ के मंचन से कन्या भ्रूण हत्या पर चोट की। इसका निर्देशन लेखक किसन चंद्र सेन ने किया।
कथानक एक खुशहाल गांव के दृश्य से शुरू होता है। इस गांव में एक डॉक्टर आलराइट आता है। ये डॉक्टर बोर्ड लगाकर लिंग परीक्षण करता है। इसके बाद लोग बेटा पैदा करने की चाह में लिंग परीक्षण कराने लगते हैं। गर्भ में बेटी देखकर उसकी हत्या कराने लगते हैं। जब गांव के लड़के शादी के लायक होते हैं तब असली समस्या खड़ी होती है। गांव की सच्चाई जानकर लड़की वाले भाग खड़े होते हैं। शादी की मजबूरी में लड़कों को लड़कियों की तरह विदा होना पड़ता है। नाटक में अभिनेत्री प्राची ने जीवंत अभिनय से खूब वाहवाही बटोरी। आकाश, सौरभ, विशाल, राकेश, अजय शंकर और हिमांशु ने भी अपने अभिनय से कथानक में प्राण फूंका। धन्यवाद ज्ञापन एसोसिएशन के सचिव रवींद्र रंगधर ने किया। रूप सज्जा पीयूष श्रीवास्तव ने संभाली। लाइट व्यवस्था तुषार रूंगटा ने की।
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गोरखपुर थिएटर एसोसिएशन की ओर से मासिक नाट्य श्रृंखला की 17वीं कड़ी में रंगाश्रम के कलाकारों ने ‘किस्सा मौजपुर का’ के मंचन से कन्या भ्रूण हत्या पर चोट की। इसका निर्देशन लेखक किसन चंद्र सेन ने किया।
कथानक एक खुशहाल गांव के दृश्य से शुरू होता है। इस गांव में एक डॉक्टर आलराइट आता है। ये डॉक्टर बोर्ड लगाकर लिंग परीक्षण करता है। इसके बाद लोग बेटा पैदा करने की चाह में लिंग परीक्षण कराने लगते हैं। गर्भ में बेटी देखकर उसकी हत्या कराने लगते हैं। जब गांव के लड़के शादी के लायक होते हैं तब असली समस्या खड़ी होती है। गांव की सच्चाई जानकर लड़की वाले भाग खड़े होते हैं। शादी की मजबूरी में लड़कों को लड़कियों की तरह विदा होना पड़ता है। नाटक में अभिनेत्री प्राची ने जीवंत अभिनय से खूब वाहवाही बटोरी। आकाश, सौरभ, विशाल, राकेश, अजय शंकर और हिमांशु ने भी अपने अभिनय से कथानक में प्राण फूंका। धन्यवाद ज्ञापन एसोसिएशन के सचिव रवींद्र रंगधर ने किया। रूप सज्जा पीयूष श्रीवास्तव ने संभाली। लाइट व्यवस्था तुषार रूंगटा ने की।
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