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गोरखपुर की राजनीति के लिहाज से तीन दिन अहम

Sat, 29 Jul 2017 01:42 AM IST
Updated Sat, 29 Jul 2017 01:42 AM IST
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गोरखपुर की राजनीति के लिहाज से तीन दिन अहम

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गोरखपुर।
गोरखपुर की राजनीति के लिहाज से तीन दिन (शनिवार, रविवार और सोमवार) अहम साबित हो सकते हैं। इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने या फिर चुनाव क्षेत्र पर फैसला संभव है। गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में कौन उतरेगा, इस पर भी मुहर लग सकती है। इसी सिलसिले में भाजपा की संगठनात्मक बैठक शनिवार से लखनऊ में होगी। इसमें गोरखपुर के पदाधिकारी भी बुलाए गए हैं।
विधानसभा चुनावों में जीत के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पहली बार संगठन के कामकाज की समीक्षा करेंगे। इसी सिलसिले में वह शनिवार को लखनऊ आ रहे हैं। संगठन की बैठक के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष ही सीएम योगी के चुनाव क्षेत्र का एलान कर सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि पांच अगस्त के बाद सीएम सांसद का पद छोड़ेंगे। इससे पहले ही चुनाव क्षेत्र पर फैसला लिया जाएगा। सब कुछ ठीकठाक रहा तो सीएम योगी गोरखपुर से ही चुनाव लड़ेंगे। इसकी संभावना पार्टी पदाधिकारी पहले ही जता चुके हैं। सीएम भी विधानसभा चुनाव जीतकर सदन में जाना चाहते हैं। अब विधानसभा क्षेत्र का नाम फाइनल होना है। हालांकि सीएम के विधान परिषद में जाने का विकल्प भी खुला है। सूत्रों ने बताया कि लोकसभा चुनाव 2019 में होगा। इससे पहले ही भाजपा को गोरखपुर संसदीय क्षेत्र का उपचुनाव लड़ना पड़ेगा। इस सीट के लिए प्रत्याशी की तलाश चल रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की बैठक में सांसद पद का प्रत्याशी भी तय हो जाएगा। इसे लेकर ही भाजपा गोरखपुर के जिला प्रभारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष सहित तमाम संगठन के पदाधिकारियों को फीडबैक के लिए लखनऊ बुलाया गया है। फीडबैक से ही सीट और प्रत्याशी के नाम फाइनल तय किए जाएंगे।
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विपक्ष उतार सकता है संयुक्त प्रत्याशी
भाजपा को घेरने में जुटी विपक्षी पार्टियां सीएम योगी आदित्यनाथ और संसदीय क्षेत्र का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी के खिलाफ संयुक्त प्रत्याशी उतार सकती हैं। इस पर चर्चा भी चल रही है। भाजपा विरोधी मोर्चे में कांग्रेस, बसपा और सपा के शामिल होने की उम्मीद है। विपक्ष की मंशा है कि 2019 के चुनाव से पहले भाजपा को घेरा जाए। जनता को संदेश दिया जाए कि भाजपा के खिलाफ विपक्ष एकजुट है।
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