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करवाचौथ पर सुहागिनें दुल्हन सी दिखीं
Updated Mon, 09 Oct 2017 12:59 AM IST
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गोरखपुर।
करवाचौथ पर रविवार रात व्रती सुहागिनों ने भगवान रजनीश को अर्घ्य देकर पति के दीर्घायु की मंगलकामना की। पति भी इस मौके पर हर काम छोड़कर घर पहुंचे और पूजा के दौरान पत्नी के पास रहे। अर्घ्य के बाद पत्नी को पानी पिलाकर व्रत का पारण कराया।
इससे पहले व्रती महिलाएं पूरे दिन घर पर पूजा की तैयारियों में जुटी रहीं। शाम को चंद्र पूजन के दौरान महिलाओं ने व्रत कथा सुनीं। इससे पहले महिलाओं ने शृंगार कर दुल्हन सा रूप बनाया। सूर्य विहार निवासी प्रीति ने बताया कि पहला करवाचौथ मनाते वक्त जो अहसास हुआ था, वैसा ही आज भी हासिल होता है। पति के लिए शृंगार कर तब शादी का दिन याद आ गया था। शादी के रोज दुल्हन बनने के लिए जैसा शृंगार किया था, कुछ वैसा ही करवाचौथ पर भी करती रही हूं। राप्तीनगर की प्रेमलता बताती हैं कि विवाह के रोज जिस तरह से आंचल की ओट से पति को देखा था, उसी तरह उनका अक्स करवाचौथ पर छननी से नजर आता है। साथ ही इस दिन शृंगार कर दुल्हन बनने की याद ताजा हो जाती है। पादरी बाजार की सरिता कहती हैं कि वह 10 साल से करवाचौथ व्रत कर रही हैं। व्रत हर बार पति के पहले दीदार की याद दिला जाता है। इस साल भी दुल्हन की तरह सज संवरकर त्योहार मनाया।
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पत्नी की जगह पति बने व्रती
मिर्जापुर की सुनीता देवी 17 साल से करवाचौथ का व्रत रख रही थीं। इस बार बीमारी के चलते वह व्रत करने में सक्षम नहीं थीं। उनकी जगह पति राकेश गुप्ता ने व्रत रखा। राकेश की तरह शहर के कई और पति भी अपनी पत्नी के लिए करवाचौथ का व्रत रखने वालों में शुमार थे। इन पतियों ने भी विधिविधान से चंद्र को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया।
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इंटरनेट पर पति को देखकर पारण
कई ऐसी व्रती महिलाएं भी शहर में थीं, जिनका सुहाग जरूरी काम के चलते उनसे दूर था। ऐसी सुहागिनों के लिए इंटरनेट बहुत काम आया। वीडियो कॉल के जरिये इन सुहागिनों ने अपने सुहाग का दर्शन कर व्रत की औपचारिकताएं पूरी कीं। ऐसी सुहागिनों को करवाचौथ पर पति के विरह का दर्द तो था, लेकिन इंटरनेट के चलते उन्हें काफी राहत मिली।
करवाचौथ पर रविवार रात व्रती सुहागिनों ने भगवान रजनीश को अर्घ्य देकर पति के दीर्घायु की मंगलकामना की। पति भी इस मौके पर हर काम छोड़कर घर पहुंचे और पूजा के दौरान पत्नी के पास रहे। अर्घ्य के बाद पत्नी को पानी पिलाकर व्रत का पारण कराया।
इससे पहले व्रती महिलाएं पूरे दिन घर पर पूजा की तैयारियों में जुटी रहीं। शाम को चंद्र पूजन के दौरान महिलाओं ने व्रत कथा सुनीं। इससे पहले महिलाओं ने शृंगार कर दुल्हन सा रूप बनाया। सूर्य विहार निवासी प्रीति ने बताया कि पहला करवाचौथ मनाते वक्त जो अहसास हुआ था, वैसा ही आज भी हासिल होता है। पति के लिए शृंगार कर तब शादी का दिन याद आ गया था। शादी के रोज दुल्हन बनने के लिए जैसा शृंगार किया था, कुछ वैसा ही करवाचौथ पर भी करती रही हूं। राप्तीनगर की प्रेमलता बताती हैं कि विवाह के रोज जिस तरह से आंचल की ओट से पति को देखा था, उसी तरह उनका अक्स करवाचौथ पर छननी से नजर आता है। साथ ही इस दिन शृंगार कर दुल्हन बनने की याद ताजा हो जाती है। पादरी बाजार की सरिता कहती हैं कि वह 10 साल से करवाचौथ व्रत कर रही हैं। व्रत हर बार पति के पहले दीदार की याद दिला जाता है। इस साल भी दुल्हन की तरह सज संवरकर त्योहार मनाया।
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पत्नी की जगह पति बने व्रती
मिर्जापुर की सुनीता देवी 17 साल से करवाचौथ का व्रत रख रही थीं। इस बार बीमारी के चलते वह व्रत करने में सक्षम नहीं थीं। उनकी जगह पति राकेश गुप्ता ने व्रत रखा। राकेश की तरह शहर के कई और पति भी अपनी पत्नी के लिए करवाचौथ का व्रत रखने वालों में शुमार थे। इन पतियों ने भी विधिविधान से चंद्र को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया।
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इंटरनेट पर पति को देखकर पारण
कई ऐसी व्रती महिलाएं भी शहर में थीं, जिनका सुहाग जरूरी काम के चलते उनसे दूर था। ऐसी सुहागिनों के लिए इंटरनेट बहुत काम आया। वीडियो कॉल के जरिये इन सुहागिनों ने अपने सुहाग का दर्शन कर व्रत की औपचारिकताएं पूरी कीं। ऐसी सुहागिनों को करवाचौथ पर पति के विरह का दर्द तो था, लेकिन इंटरनेट के चलते उन्हें काफी राहत मिली।