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भटगांवा में निर्माण कार्यो में अनियमितता का मामला
Updated Wed, 22 Aug 2018 12:17 AM IST
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ग्राम प्रधान पर कार्रवाई, पंचायत सचिव पर नरमी
डीपीआरओ की जांच शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी सामने आने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
हाटा। सुकरौली ब्लॉक के ग्राम पंचायत भटगांवा में निर्माण कार्य में अनियमितता के आरोप में ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार पर रोक तो लगा दिया, लेकिन तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ विभाग ने नरमी दिखाते हुए कोई कार्रवाई नहीं की। इस मसले पर अब यह चर्चा हो रही है कि अनियमितता की जांच करने गांव में गए डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत को ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ एफआईआर कराने का निर्देश दिया था। ऐसे में सिर्फ प्रधान के ही वित्तीय अधिकार पर क्यों रोक लगाई गई। पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सुकरौली ब्लॉक के भटगांवा में गत वर्ष जून माह में गांव में हो रहे विकास कार्य में अनियमितता की शिकायत मिलने पर डीपीआरओ वहां जांच करने पहुंचे थे। जांच के दौरान शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की बात सामने आई। वर्ष 2017-18 में इस गांव में 70 शौचालयों के लिए धन आया था। जिसमें से 40 शौचालयों का निर्माण पूर्ण होने की सूचना तय प्रोफार्मा पर ग्राम पंचायत सचिव ने डीपीआरओ कार्यालय को दी थी। जबकि जांच के दौरान शौचालय का निर्माण 40 से कम पाया गया और कुछ आधे अधूरे भी थे। ग्राम पंचायत की ओर से दोनों किस्तों की धनराशि अवमुक्त कर दी गई थी। इसके अलावा जांच में नाली और सड़क को चौड़ा किए जाने के कार्य में भी गड़बड़ी सामने आई। इस पर डीपीआरओ ने एडीओ सुकरौली को ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देकर पूरे मामले की विधिवत जांच करने का निर्देश दिया था। निर्देश के बाद भी ब्लॉक के अधिकारियों ने काफी दिनों तक इस मामले को ठंडे बस्ते में रखा। इसी बीच ब्लॉक मुख्यालय पर आयोजित बैठक में शामिल होने आए सीडीओ के सामने यह मामला फिर से उठ गया। इसके बाद सीडीओ ने भी गांव में पहुंच कर स्थलीय निरीक्षण किया। मामला तूल पकड़ते देख ब्लॉक के अधिकारियों ने अनियमितता की पुष्टि करते हुए ग्राम प्रधान उषा देवी का वित्तीय अधिकार सीज कर ग्राम पंचायत के खाते का संचालन कराने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी। जबकि अनियमितता के समय तैनात ग्राम पंचायत सचिव को उस गांव से हटाकर दूसरे गांव में कर तैनात कर दिया गया। ऐसे में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि प्रधान पर कार्रवाई और तत्कालीन सचिव के प्रति नरमी क्यों बरती जा रही है। बीडीओ चित्रा मिश्रा ने बताया कि भटगांवा मामले में जो भी कार्रवाई और जांच हुई है, उच्चाधिकारियों के निर्देश पर हुई है। इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। डीएम डॉक्टर अनिल कुमार सिंह ने कहा कि इस मामले की पत्रावली देखी जाएगी। अगर अनियमितता में सचिव की भी भूमिका मिलेगी तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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डीपीआरओ की जांच शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी सामने आने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
हाटा। सुकरौली ब्लॉक के ग्राम पंचायत भटगांवा में निर्माण कार्य में अनियमितता के आरोप में ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार पर रोक तो लगा दिया, लेकिन तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ विभाग ने नरमी दिखाते हुए कोई कार्रवाई नहीं की। इस मसले पर अब यह चर्चा हो रही है कि अनियमितता की जांच करने गांव में गए डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत को ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ एफआईआर कराने का निर्देश दिया था। ऐसे में सिर्फ प्रधान के ही वित्तीय अधिकार पर क्यों रोक लगाई गई। पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सुकरौली ब्लॉक के भटगांवा में गत वर्ष जून माह में गांव में हो रहे विकास कार्य में अनियमितता की शिकायत मिलने पर डीपीआरओ वहां जांच करने पहुंचे थे। जांच के दौरान शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की बात सामने आई। वर्ष 2017-18 में इस गांव में 70 शौचालयों के लिए धन आया था। जिसमें से 40 शौचालयों का निर्माण पूर्ण होने की सूचना तय प्रोफार्मा पर ग्राम पंचायत सचिव ने डीपीआरओ कार्यालय को दी थी। जबकि जांच के दौरान शौचालय का निर्माण 40 से कम पाया गया और कुछ आधे अधूरे भी थे। ग्राम पंचायत की ओर से दोनों किस्तों की धनराशि अवमुक्त कर दी गई थी। इसके अलावा जांच में नाली और सड़क को चौड़ा किए जाने के कार्य में भी गड़बड़ी सामने आई। इस पर डीपीआरओ ने एडीओ सुकरौली को ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देकर पूरे मामले की विधिवत जांच करने का निर्देश दिया था। निर्देश के बाद भी ब्लॉक के अधिकारियों ने काफी दिनों तक इस मामले को ठंडे बस्ते में रखा। इसी बीच ब्लॉक मुख्यालय पर आयोजित बैठक में शामिल होने आए सीडीओ के सामने यह मामला फिर से उठ गया। इसके बाद सीडीओ ने भी गांव में पहुंच कर स्थलीय निरीक्षण किया। मामला तूल पकड़ते देख ब्लॉक के अधिकारियों ने अनियमितता की पुष्टि करते हुए ग्राम प्रधान उषा देवी का वित्तीय अधिकार सीज कर ग्राम पंचायत के खाते का संचालन कराने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी। जबकि अनियमितता के समय तैनात ग्राम पंचायत सचिव को उस गांव से हटाकर दूसरे गांव में कर तैनात कर दिया गया। ऐसे में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि प्रधान पर कार्रवाई और तत्कालीन सचिव के प्रति नरमी क्यों बरती जा रही है। बीडीओ चित्रा मिश्रा ने बताया कि भटगांवा मामले में जो भी कार्रवाई और जांच हुई है, उच्चाधिकारियों के निर्देश पर हुई है। इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। डीएम डॉक्टर अनिल कुमार सिंह ने कहा कि इस मामले की पत्रावली देखी जाएगी। अगर अनियमितता में सचिव की भी भूमिका मिलेगी तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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