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2000 करोड़ से विकसित होगा मानबेला
Updated Sat, 29 Jul 2017 01:38 AM IST
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गोरखपुर।
एक दशक से अधिक समय से आंदोलन की मार झेल रहे मानबेला के विकास पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसके लिए प्राधिकरण ने योजना बनाने के साथ ही आर्किटेक्ट की तलाश भी शुरू कर दी है। मल्टीस्टोरी आवासीय योजनाओं के साथ मानबेला की 250 एकड़ जमीन पर कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। क्षेत्र के समुचित विकास के लिए प्राधिकरण देश के बड़े आर्किटेक्ट का चयन करने के साथ ही पूरी प्लानिंग भी एक साथ करेगा।
करीब 10 एकड़ में स्टेडियम के साथ ही मानबेला में इंटरटेनमेंट पार्क, मिनी मार्ट, क्लब समेत कई आधुनिक सुविधाएं होंगी। जलभराव की मार झेल रहे आधे शहर को ध्यान में रखते हुए मानबेला में ड्रेनेज सिस्टम और एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) पर प्राधिकरण संजीदा है। सर्वे के बाद पहले ड्रेनेज पाइपलाइनों का जाल बिछाने के बाद ही प्राधिकरण वहां आवासीय कालोनी और अन्य सुविधाओं की शुरूआत करेगा। प्राधिकरण के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। मानबेला के किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा और राप्तीनगर आवासीय योजना के आवंटियों को कब्जा दिलाने के बाद मानबेला के विकास को लेकर काम शुरू कर देने की योजना है।
डेढ़ दशक पहले पड़ी मानबेला के विकास की नींव
गोरखपुर। करीब एक दशक पहले 2003 में जीडीए ने मानबेला के विकास की नींव डाली थी। किसानों से ढाई सौ एकड़ जमीन अधिग्रहित करने के साथ ही जीडीए ने राप्तीनगर आवासीय योजना से वहां विकास की शुरूआत की। योजना के तहत एक हजार भूखंडों के आवंटन के साथ ही जीडीए ने सड़क, बिजली, ड्रेनेज और पीने के पानी की पाइपलाइनें डालनी शुरू क ी थी। इसपर करोड़ों रुपये भी खर्च हो चुके थे मगर इसी बीच मानबेला के किसानों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। इससे सब कुछ वहीं ठप पड़ गया। अब इलाके के विकास को लेकर जीडीए ने दोबारा कवायद शुरू की है।
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पांच तक शुरू हो जाएगा मुआवजा वितरण
गोरखपुर। मानबेला के करीब 1200 किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने के लिए पांच अगस्त तक कैंप की शुरूआत कर दी जाएगी। किसानों में बढ़े हुए मुआवजे के तौर पर करीब 48 करोड़ रुपये बांटे जाने हैं। शुक्रवार को जीडीए उपाध्यक्ष ने मुआवजा वितरण की तैयारियां जांची और हर हाल में अगले सप्ताह से वितरण का काम शुरू कर देने के निर्देश दिए। मुआवजा वितरित होने के बाद जीडीए मानबेला की अधिग्रहित की गई ढाई सौ एकड़ जमीन में से 56 एकड़ में शुरू की गई राप्तीनगर आवासीय योजना के आवंटियों को कब्जा दिलाने का काम शुरू करेगा।
ये सुविधाएं होंगी
मल्टीस्टोरी वाले आवास, ड्रेेनेज पाइपलाइनें, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, स्टेडियम, जॉगर्स ट्रैक समेत पार्क, बच्चों के लिए इंटरटेनमेंट पार्क, मिनी मार्ट, क्लब
मानबेला को विकसित करने के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। देश के बड़े आर्किटेक्ट से पूरे क्षेत्र का एक साथ विकास का खाका तैयार कराया जाएगा ताकि सुव्यवस्थित तरीके से अधिग्रहित की गई जमीन का विकास किया जा सके। करीब दो हजार करोड़ रुपये की योजनाएं बनाई जा रही हैं। प्रस्ताव तैयार होने के बाद जीडीए बोर्ड रखा जाएगा और वहां स्वीकृति मिलते ही चरणवार काम शुरू किया जाएगा।
- वैभव श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, गोरखपुर विकास प्राधिकरण
एक दशक से अधिक समय से आंदोलन की मार झेल रहे मानबेला के विकास पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसके लिए प्राधिकरण ने योजना बनाने के साथ ही आर्किटेक्ट की तलाश भी शुरू कर दी है। मल्टीस्टोरी आवासीय योजनाओं के साथ मानबेला की 250 एकड़ जमीन पर कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। क्षेत्र के समुचित विकास के लिए प्राधिकरण देश के बड़े आर्किटेक्ट का चयन करने के साथ ही पूरी प्लानिंग भी एक साथ करेगा।
करीब 10 एकड़ में स्टेडियम के साथ ही मानबेला में इंटरटेनमेंट पार्क, मिनी मार्ट, क्लब समेत कई आधुनिक सुविधाएं होंगी। जलभराव की मार झेल रहे आधे शहर को ध्यान में रखते हुए मानबेला में ड्रेनेज सिस्टम और एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) पर प्राधिकरण संजीदा है। सर्वे के बाद पहले ड्रेनेज पाइपलाइनों का जाल बिछाने के बाद ही प्राधिकरण वहां आवासीय कालोनी और अन्य सुविधाओं की शुरूआत करेगा। प्राधिकरण के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। मानबेला के किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा और राप्तीनगर आवासीय योजना के आवंटियों को कब्जा दिलाने के बाद मानबेला के विकास को लेकर काम शुरू कर देने की योजना है।
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डेढ़ दशक पहले पड़ी मानबेला के विकास की नींव
गोरखपुर। करीब एक दशक पहले 2003 में जीडीए ने मानबेला के विकास की नींव डाली थी। किसानों से ढाई सौ एकड़ जमीन अधिग्रहित करने के साथ ही जीडीए ने राप्तीनगर आवासीय योजना से वहां विकास की शुरूआत की। योजना के तहत एक हजार भूखंडों के आवंटन के साथ ही जीडीए ने सड़क, बिजली, ड्रेनेज और पीने के पानी की पाइपलाइनें डालनी शुरू क ी थी। इसपर करोड़ों रुपये भी खर्च हो चुके थे मगर इसी बीच मानबेला के किसानों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। इससे सब कुछ वहीं ठप पड़ गया। अब इलाके के विकास को लेकर जीडीए ने दोबारा कवायद शुरू की है।
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पांच तक शुरू हो जाएगा मुआवजा वितरण
गोरखपुर। मानबेला के करीब 1200 किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने के लिए पांच अगस्त तक कैंप की शुरूआत कर दी जाएगी। किसानों में बढ़े हुए मुआवजे के तौर पर करीब 48 करोड़ रुपये बांटे जाने हैं। शुक्रवार को जीडीए उपाध्यक्ष ने मुआवजा वितरण की तैयारियां जांची और हर हाल में अगले सप्ताह से वितरण का काम शुरू कर देने के निर्देश दिए। मुआवजा वितरित होने के बाद जीडीए मानबेला की अधिग्रहित की गई ढाई सौ एकड़ जमीन में से 56 एकड़ में शुरू की गई राप्तीनगर आवासीय योजना के आवंटियों को कब्जा दिलाने का काम शुरू करेगा।
ये सुविधाएं होंगी
मल्टीस्टोरी वाले आवास, ड्रेेनेज पाइपलाइनें, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, स्टेडियम, जॉगर्स ट्रैक समेत पार्क, बच्चों के लिए इंटरटेनमेंट पार्क, मिनी मार्ट, क्लब
मानबेला को विकसित करने के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। देश के बड़े आर्किटेक्ट से पूरे क्षेत्र का एक साथ विकास का खाका तैयार कराया जाएगा ताकि सुव्यवस्थित तरीके से अधिग्रहित की गई जमीन का विकास किया जा सके। करीब दो हजार करोड़ रुपये की योजनाएं बनाई जा रही हैं। प्रस्ताव तैयार होने के बाद जीडीए बोर्ड रखा जाएगा और वहां स्वीकृति मिलते ही चरणवार काम शुरू किया जाएगा।
- वैभव श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, गोरखपुर विकास प्राधिकरण