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‘आपसी समझ से विधि व नैतिकता को सुदृढ़ करें’
Sun, 10 Mar 2019 11:32 PM IST
ajay Kumar
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Published by: ajay Kumar
Updated Sun, 10 Mar 2019 11:32 PM IST
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यूनिवर्सिटी के संवाद भवन में ला डिपार्टमेंट में आयोजित संगोष्ठी में मंचाशीन जस्टिस राहुल चतुर्वेदी।,
- फोटो : amar ujala
गोरखपुर। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने कहा कि विधि और नैतिकता एक-दूसरे के पूरक हैं, विपरीत नही। विधि और नैतिकता के आपसी समन्वय से ही आदर्श कानून का निर्माण होता है। नैतिकता की आवश्यकता विधि को प्रवर्तित कराने में पड़ती है। हमें नैतिक मूल्यों को बचाए रखना होगा। यथासंभव कोशिश करनी होगी कि हम एक बेहतर समाज बनाने के लिए विधि एवं नैतिकता को आपसी समझ से सुदृढ़ करें।
वह गोरखपुर विश्वविद्यालय के विधि विभाग की ओर से ‘विधि, नैतिकता और समकालीन समाज’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्य अतिथि डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी लखनऊ के कुलपति प्रो. एसके भटनागर ने कहा कि नैतिकता का कार्य समाज के व्यवस्थाओं को मजबूत बनाना होता है। नैतिक नियम जब विधि द्वारा प्रवर्तित हो जाते हैं तो वह विधिक नियम बन जाते हैं। इस समय सामाजिक नैतिकता और संवैधानिक नैतिकता में तनाव चल रहा है। यह समय की मांग है कि विधि और नैतिकता में सामंजस्य स्थापित हो।
विशिष्ट अतिथि मेयर सीताराम जायसवाल ने कहा कि भारत की संस्कृति में हमेशा से नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया गया है। आज के समय में नैतिकता का ह्रास हुआ है। अध्यक्षता करते हुए प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि कानून सबसे ज्यादा मान्य तब होता है, जब उसके पीछे नैतिकता का प्रभाव होता है। स्वागत भाषण विधि विभाग के संकायाध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा तथा संचालन व आभार ज्ञापन आयोजन सचिव टीएन मिश्रा ने किया। इस मौके पर प्रोफेसर उपेंद्र नाथ त्रिपाठी, प्रो. संजय बैजल, प्रो. सतीश चंद्र पांडेय प्रो. नसीम अहमद, प्रो. चंद्रशेखर सिंह, डॉ. शैलेश सिंह, डॉ. अभय मल्ल, डॉ. आशीष शुक्ला, डॉ. हरिश्चंद्र पांडेय, डॉ. मनीष राय, डॉ. शिवपूजन सिंह, डॉ. ओपी सिंह, डॉ. वेद प्रकाश राय आदि उपस्थित थे।
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वह गोरखपुर विश्वविद्यालय के विधि विभाग की ओर से ‘विधि, नैतिकता और समकालीन समाज’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्य अतिथि डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी लखनऊ के कुलपति प्रो. एसके भटनागर ने कहा कि नैतिकता का कार्य समाज के व्यवस्थाओं को मजबूत बनाना होता है। नैतिक नियम जब विधि द्वारा प्रवर्तित हो जाते हैं तो वह विधिक नियम बन जाते हैं। इस समय सामाजिक नैतिकता और संवैधानिक नैतिकता में तनाव चल रहा है। यह समय की मांग है कि विधि और नैतिकता में सामंजस्य स्थापित हो।
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विशिष्ट अतिथि मेयर सीताराम जायसवाल ने कहा कि भारत की संस्कृति में हमेशा से नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया गया है। आज के समय में नैतिकता का ह्रास हुआ है। अध्यक्षता करते हुए प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि कानून सबसे ज्यादा मान्य तब होता है, जब उसके पीछे नैतिकता का प्रभाव होता है। स्वागत भाषण विधि विभाग के संकायाध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा तथा संचालन व आभार ज्ञापन आयोजन सचिव टीएन मिश्रा ने किया। इस मौके पर प्रोफेसर उपेंद्र नाथ त्रिपाठी, प्रो. संजय बैजल, प्रो. सतीश चंद्र पांडेय प्रो. नसीम अहमद, प्रो. चंद्रशेखर सिंह, डॉ. शैलेश सिंह, डॉ. अभय मल्ल, डॉ. आशीष शुक्ला, डॉ. हरिश्चंद्र पांडेय, डॉ. मनीष राय, डॉ. शिवपूजन सिंह, डॉ. ओपी सिंह, डॉ. वेद प्रकाश राय आदि उपस्थित थे।
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