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40 लाख रुपये का चेक कटा, फिर भी मौतें
Updated Sun, 13 Aug 2017 02:11 AM IST
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गोरखपुर।
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के बाद आरोपों से घिरे कॉलेज प्रशासन का दावा है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली पुष्पा सेल्स कंपनी के 69 लाख के बकाए में से 40 लाख रुपये का चेक एसबीआई एकाउंट में डाला गया था। निलंबित प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा की मानें तो फर्म का एकाउंट यूनियन बैंक का था, जिस वजह से ट्रांसफर होने में समय लगा और फिर ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी गई। इसी को आधार बनाते हुए कंपनी पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही थी, लेकिन देर शाम तक कोई तहरीर नहीं दी गई थी।
दो साल पहले पुष्पा कंपनी से मेडिकल कॉलेज का करार हुआ था। बकाया भुगतान को लेकर कई बार पुष्पा कंपनी की ओर से चेतावनी भी दी जाती थी, मगर भुगतान होने पर सप्लाई जारी रहती थी। अभी एक साल पहले ही कंपनी ने ऑक्सीजन सप्लाई ठप करने का पत्र दिया था, तब डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए फर्म पर केस करने की चेतावनी दी थी और बिना भुगतान ही सप्लाई आ गई थी। इस बार प्रशासनिक स्तर पर बड़ी चूक हुई। भुगतान करने के बाद भी फर्म को या तो इसकी समय से जानकारी नहीं दी गई या फिर चेक कटने के बाद इसके भुगतान में हीलाहवाली की गई। फिलहाल इस पूरे मामले का शासन स्तर से ही जांच का आदेश दे दिया गया है। इसके बाद ही फर्म की भूमिका साफ हो पाएगी।
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फर्म का ठेकेदार फरार
फर्म की लापरवाही और फिर केस दर्ज होने की चर्चा के बीच ही फर्म का ठेकेदार फरार हो गया। शुक्रवार रात ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से फोन कर केस दर्ज करने की तैयारी की जा रही थी। शनिवार की सुबह शाहपुर इलाके में रहने वाले ठेकेदार के यहां पुलिस पहुंची भी थी लेकिन वह नहीं मिला। पुलिस को अभी कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई तहरीर भी नहीं दी गई है।
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के बाद आरोपों से घिरे कॉलेज प्रशासन का दावा है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली पुष्पा सेल्स कंपनी के 69 लाख के बकाए में से 40 लाख रुपये का चेक एसबीआई एकाउंट में डाला गया था। निलंबित प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा की मानें तो फर्म का एकाउंट यूनियन बैंक का था, जिस वजह से ट्रांसफर होने में समय लगा और फिर ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी गई। इसी को आधार बनाते हुए कंपनी पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही थी, लेकिन देर शाम तक कोई तहरीर नहीं दी गई थी।
दो साल पहले पुष्पा कंपनी से मेडिकल कॉलेज का करार हुआ था। बकाया भुगतान को लेकर कई बार पुष्पा कंपनी की ओर से चेतावनी भी दी जाती थी, मगर भुगतान होने पर सप्लाई जारी रहती थी। अभी एक साल पहले ही कंपनी ने ऑक्सीजन सप्लाई ठप करने का पत्र दिया था, तब डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए फर्म पर केस करने की चेतावनी दी थी और बिना भुगतान ही सप्लाई आ गई थी। इस बार प्रशासनिक स्तर पर बड़ी चूक हुई। भुगतान करने के बाद भी फर्म को या तो इसकी समय से जानकारी नहीं दी गई या फिर चेक कटने के बाद इसके भुगतान में हीलाहवाली की गई। फिलहाल इस पूरे मामले का शासन स्तर से ही जांच का आदेश दे दिया गया है। इसके बाद ही फर्म की भूमिका साफ हो पाएगी।
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फर्म का ठेकेदार फरार
फर्म की लापरवाही और फिर केस दर्ज होने की चर्चा के बीच ही फर्म का ठेकेदार फरार हो गया। शुक्रवार रात ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से फोन कर केस दर्ज करने की तैयारी की जा रही थी। शनिवार की सुबह शाहपुर इलाके में रहने वाले ठेकेदार के यहां पुलिस पहुंची भी थी लेकिन वह नहीं मिला। पुलिस को अभी कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई तहरीर भी नहीं दी गई है।
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