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...तो कमीशनखोरी से सूखी ऑक्सीजन
Updated Sat, 12 Aug 2017 01:44 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 36 घंटे में 48 मौतों ने हर आम-ओ-खास की संवेदना झकझोर दी। इसके साथ ही व्यवस्था को लेकर तरह-तरह के सवाल भी खड़े हो गए। आखिर फर्म को ऑक्सीजन गैस की सप्लाई ठप करने का रुख क्यों अपनाना पड़ा, कई बार नोटिस के बाद भी बकाया भुगतान क्यों नहीं हुआ जैसे कई सवाल शहर की आब-ओ-हवा में तैर रहे थे। इसके साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई में कमीशनखोरी के खेल की बातें भी उठने लगीं।
मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कमीशनखोरी की लत के चलते ही यह स्थिति बनी। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म के बकाया की फाइल इसी लिए ही लटकाई जाती रही। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के एक अफसर की पत्नी पर बकाया भुगतान कराने के लिए ओबलाइज करने का सुझाव देने की बात भी चर्चाओं में है। सूत्रों की मानें तो अफसर की पत्नी की राय फर्म के अफसर ने सिरे से खारिज कर दी। इसके बाद फर्म की ओर से बकाया भुगतान के लिए जब भी मुलाकात की गई तो बजट न होने की बात कहते हुए जल्द व्यवस्था करने का आश्वासन दिया गया। एक अगस्त को फर्म की ओर से चार-पांच दिन के लिए गैस की सप्लाई करने के साथ ही स्पष्ट चेतावनी देते हुए बकाया भुगतान न होने की सूरत आगे सप्लाई देने में असमर्थता जताई गई थी।
शाम तक फर्म को मिले 20 लाख 84 हजार
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से धड़ाधड़ मौतें शुरू हुईं तो आननफानन पुष्पा सेल्स को बकाया भुगतान की कवायद शुरू हुई। फर्म के अधिकारी दीपांकर शर्मा ने बताया कि शाम तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से 20 लाख 84 हजार रुपये का भुगतान फर्म को कर दिया गया था। इसके साथ ही फोन पर 30 लाख रुपये और भुगतान देने का आश्वासन मिला था। हालांकि, शाम तक उस संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं मिली।
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फर्म ने कंपनी को भेजी रकम, टैंकर रास्ते में
दीपांकर शर्मा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से मिली रकम आननफानन आरटीजीएस के जरिए कंपनी को भेजते हुए वहां से टैंकर डिस्पैच करा दिया गया है। राजस्थान होते हुए तीन दिनों में टैंकर शहर तक आता है, लेकिन इस बार 24 घंटे टैंकर चलाने के लिए कहा गया है। शनिवार रात तक या रविवार सुबह तक टैंकर मेडिकल कॉलेज पहुंच जाएगा।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 36 घंटे में 48 मौतों ने हर आम-ओ-खास की संवेदना झकझोर दी। इसके साथ ही व्यवस्था को लेकर तरह-तरह के सवाल भी खड़े हो गए। आखिर फर्म को ऑक्सीजन गैस की सप्लाई ठप करने का रुख क्यों अपनाना पड़ा, कई बार नोटिस के बाद भी बकाया भुगतान क्यों नहीं हुआ जैसे कई सवाल शहर की आब-ओ-हवा में तैर रहे थे। इसके साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई में कमीशनखोरी के खेल की बातें भी उठने लगीं।
मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कमीशनखोरी की लत के चलते ही यह स्थिति बनी। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म के बकाया की फाइल इसी लिए ही लटकाई जाती रही। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के एक अफसर की पत्नी पर बकाया भुगतान कराने के लिए ओबलाइज करने का सुझाव देने की बात भी चर्चाओं में है। सूत्रों की मानें तो अफसर की पत्नी की राय फर्म के अफसर ने सिरे से खारिज कर दी। इसके बाद फर्म की ओर से बकाया भुगतान के लिए जब भी मुलाकात की गई तो बजट न होने की बात कहते हुए जल्द व्यवस्था करने का आश्वासन दिया गया। एक अगस्त को फर्म की ओर से चार-पांच दिन के लिए गैस की सप्लाई करने के साथ ही स्पष्ट चेतावनी देते हुए बकाया भुगतान न होने की सूरत आगे सप्लाई देने में असमर्थता जताई गई थी।
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शाम तक फर्म को मिले 20 लाख 84 हजार
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से धड़ाधड़ मौतें शुरू हुईं तो आननफानन पुष्पा सेल्स को बकाया भुगतान की कवायद शुरू हुई। फर्म के अधिकारी दीपांकर शर्मा ने बताया कि शाम तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से 20 लाख 84 हजार रुपये का भुगतान फर्म को कर दिया गया था। इसके साथ ही फोन पर 30 लाख रुपये और भुगतान देने का आश्वासन मिला था। हालांकि, शाम तक उस संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं मिली।
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फर्म ने कंपनी को भेजी रकम, टैंकर रास्ते में
दीपांकर शर्मा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से मिली रकम आननफानन आरटीजीएस के जरिए कंपनी को भेजते हुए वहां से टैंकर डिस्पैच करा दिया गया है। राजस्थान होते हुए तीन दिनों में टैंकर शहर तक आता है, लेकिन इस बार 24 घंटे टैंकर चलाने के लिए कहा गया है। शनिवार रात तक या रविवार सुबह तक टैंकर मेडिकल कॉलेज पहुंच जाएगा।