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अल्लाह का नूर हैं नबी-ए-पाक - मुफ्ती अजहर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 23 Nov 2017 01:52 AM IST
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नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद
- फोटो : Amar Ujala
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नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद पर 12 दिवसीय महफिल-ए-सीरतुन्नबी दूसरे दिन भी जारी रहा। मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि आखिरी नबी-ए-पाक हजरत मुहम्मद अल्लाह के नूर हैं। हमारे नबी को अल्लाह ने अपने नूर से पैदा किया और नबी के नूर से कायनात को बनाया।
उन्होंने कहा कि नबी ने दुनिया में अपने नूर से जिहालत को इल्म, बदकिरदारी को अच्छे किरदार, जुल्म-सितम को अच्छे बर्ताव नाइंसाफी को इंसाफ और आपसी भाईचारा में बदल दिया। दरगाह मस्जिद के इमाम मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने कहा कि हम लोगों के वास्ते रबीउल अव्वल शरीफ का महीना बहुत अहम है। इसकी 12वीं तारीख हमारे प्यारे नबी की पैदाइश का दिन है। इसलिए यह दिन ईद से भी बढ़ी खुशी का है, क्योंकि हम मुसलमानों को अल्लाह की तरफ से जो भी सौगात मिली है वह नबी के सदके में ही मिली है। अगर हमें सुकून व इत्मिनान पाना है तो नबी के बताए रास्ते पर चलना होगा। इससे हमारे समाज की खामियां खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगी। इस मौके पर दरगाह सदर इकरार अहमद, मंजूर आलम, अब्दुल अजीज, सैफ अली, मोहम्मद अजीम, कैश रजा आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि नबी ने दुनिया में अपने नूर से जिहालत को इल्म, बदकिरदारी को अच्छे किरदार, जुल्म-सितम को अच्छे बर्ताव नाइंसाफी को इंसाफ और आपसी भाईचारा में बदल दिया। दरगाह मस्जिद के इमाम मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने कहा कि हम लोगों के वास्ते रबीउल अव्वल शरीफ का महीना बहुत अहम है। इसकी 12वीं तारीख हमारे प्यारे नबी की पैदाइश का दिन है। इसलिए यह दिन ईद से भी बढ़ी खुशी का है, क्योंकि हम मुसलमानों को अल्लाह की तरफ से जो भी सौगात मिली है वह नबी के सदके में ही मिली है। अगर हमें सुकून व इत्मिनान पाना है तो नबी के बताए रास्ते पर चलना होगा। इससे हमारे समाज की खामियां खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगी। इस मौके पर दरगाह सदर इकरार अहमद, मंजूर आलम, अब्दुल अजीज, सैफ अली, मोहम्मद अजीम, कैश रजा आदि मौजूद रहे।
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