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आईएमए सदस्यों ने उपवास रखकर बुलंद की आवाज
Updated Mon, 02 Oct 2017 08:43 PM IST
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गोरखपुर।
आईएमए के डॉक्टरों ने सोमवार को सुबह छह से शाम छह बजे तक उपवास रखकर अपनी मांगें पूरी करने को आवाज बुलंद की। हालांकि इस दौरान उन्होंने चिकित्सकीय कार्य जारी रखा। शाम साढ़े चार बजे चिकित्सक सीतापुर नेत्र चिकित्सालय पर एकत्रित हुए। इसके बाद टाउनहाल गांधी प्रतिमा के पास धरना दिया और फिर सात सूत्री मांगों के संबंध में प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा।
आईएमए की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर गोरखपुर शाखा के सदस्यों की ओर से उपवास रखा गया। अध्यक्ष डॉ. बीबी गुप्ता और सचिव डॉ. शशांक ने बताया कि छह जून को दिल्ली में राजघाट से इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम तक 10 हजार डॉक्टरों ने मार्च निकाला था। तब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. जेपी नड्डा ने विभिन्न मंत्रालयों की बैठक बुलाई थी। इसमें आईएमए के पदाधिकारी भी शामिल थे। इसमें आईएमए के सदस्यों ने कई सुझाव दिए थे, लेकिन इन पर आज तक अमल नहीं हुआ। इस बीच हालात लगातार खराब होते गए। चिकित्साकर्मियों पर लगातार हमले हो रहे हैं। सरकार क्लीनिकल स्टैबलिशमेंट एक्ट और अन्य कानूनों के जरिये डॉक्टरों का उत्पीड़न कर रही है।
डॉक्टरों की मांगें
- चिकित्सा कर्मियों के साथ हिंसा रोकने के लिए केंद्रीय कानून बने
- पीसी-पीएनडीटी एक्ट में संशोधन कर छोटी लिपिकीय गलती के लिए डॉक्टरों को सजा न दी जाए
- क्लीनिकल स्टैबलिशमेंट एक्ट और पीसी-पीएनडीटी एक्ट के उन प्रावधानों में जल्द संशोधन किया जाए जिन पर सहमति बन चुकी है
- चिकित्सकीय लापरवाही से होने वाली क्षतिपूर्ति के लिए उच्चतम सीमा तय की जाए
- नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल और एग्जिट एग्जाम के प्रस्ताव को वापस लिया जाए
आईएमए के डॉक्टरों ने सोमवार को सुबह छह से शाम छह बजे तक उपवास रखकर अपनी मांगें पूरी करने को आवाज बुलंद की। हालांकि इस दौरान उन्होंने चिकित्सकीय कार्य जारी रखा। शाम साढ़े चार बजे चिकित्सक सीतापुर नेत्र चिकित्सालय पर एकत्रित हुए। इसके बाद टाउनहाल गांधी प्रतिमा के पास धरना दिया और फिर सात सूत्री मांगों के संबंध में प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा।
आईएमए की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर गोरखपुर शाखा के सदस्यों की ओर से उपवास रखा गया। अध्यक्ष डॉ. बीबी गुप्ता और सचिव डॉ. शशांक ने बताया कि छह जून को दिल्ली में राजघाट से इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम तक 10 हजार डॉक्टरों ने मार्च निकाला था। तब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. जेपी नड्डा ने विभिन्न मंत्रालयों की बैठक बुलाई थी। इसमें आईएमए के पदाधिकारी भी शामिल थे। इसमें आईएमए के सदस्यों ने कई सुझाव दिए थे, लेकिन इन पर आज तक अमल नहीं हुआ। इस बीच हालात लगातार खराब होते गए। चिकित्साकर्मियों पर लगातार हमले हो रहे हैं। सरकार क्लीनिकल स्टैबलिशमेंट एक्ट और अन्य कानूनों के जरिये डॉक्टरों का उत्पीड़न कर रही है।
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डॉक्टरों की मांगें
- चिकित्सा कर्मियों के साथ हिंसा रोकने के लिए केंद्रीय कानून बने
- पीसी-पीएनडीटी एक्ट में संशोधन कर छोटी लिपिकीय गलती के लिए डॉक्टरों को सजा न दी जाए
- क्लीनिकल स्टैबलिशमेंट एक्ट और पीसी-पीएनडीटी एक्ट के उन प्रावधानों में जल्द संशोधन किया जाए जिन पर सहमति बन चुकी है
- चिकित्सकीय लापरवाही से होने वाली क्षतिपूर्ति के लिए उच्चतम सीमा तय की जाए
- नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल और एग्जिट एग्जाम के प्रस्ताव को वापस लिया जाए