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छत गिरी, दबने से महिला की मौत

Thu, 13 Jul 2017 12:28 AM IST
Updated Thu, 13 Jul 2017 12:28 AM IST
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छत गिरी, दबने से महिला की मौत
अड्डा बाजार। कौलहीं गांव में बुधवार को अपरान्ह लगभग साढ़े चार बजे कमरे में झाड़ू लगा रही करीब 36 वर्षीय महिला के ऊपर दीवार समेत ईंट का जर्जर छत गिर पड़ा। उसकी मौके पर दर्दनाक मौत हो गई। सूचना पाकर कानूनगो अनारूल्लाह खान मौके का जायजा लिया।
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बताया जाता है कि नौतनवां थाना क्षेत्र के कौलही की रंगीना गिरी पत्नी छेदी गिरी कमरे में झाड़ू लगा रही थी। अचानक उसी दरम्यान दीवार समेत ईंट की जर्जर आंशिक छत उनके ऊपर गिर पड़ा। जिससे मौके पर उनकी दर्दनाक मौत हो गई। दीवार गिरने की आवाज सुनकर ग्रामीण पहुंचे और मलबा हटाकर उन्हें बाहर निकाला। घटना सुनकर गांव में सनसनी फैल गई। सूचना पाकर हल्का लेखपाल के साथ राजस्व निरीक्षक नईकोट अनारूल्ला खान मौके पर पहुंचकर जायजा लिए। उन्होंने बताया कि जर्जर छत का एक हिस्सा बगैर दीवार का था। तहसीलदार अनिल कुमार रस्तोगी ने कहा कि कानूनगो मौके पर गए हैं। नियमानुसार अगली कार्रवाई की जाएगी।
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बाबाधाम के रास्ते में मिली पत्नी की मौत की सूचना
अड्डा बाजार। कौलही गांव में बुधवार को शाम साढ़े चार बजे छत से दबकर जब पत्नी रंगीना की मौत हुई तो पति छेदी गिरी बाबाधाम में घर लौटने की तैयारी में थे। फोन से सूचना मिलते ही वह फफक पड़े। हालांकि साथ के लोगों ने वहां उन्हें संभाला और ट्रेन पर बैठा दिया है। रंगीना के सभी छह बच्चे नाबालिग हैं। बड़ा बेटा गुलशन (12), मोहित (09), गुड़िया (08), शत्रुघन (06), कृष्णा (05) और संध्या (02) है। पति पल्लेदारी, मजदूरी या ड्राइविंग कर परिवार का गुजर बसर करते हैं। रंगीता घर और बच्चों को संभालती थी। मां की मौत के बाद बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी पिता पर आ गई है। ऐसे में मेहनत मजदूरी करके जीविकोपार्जन और बच्चों को पालना उस पिता के लिए कठिन चुनौती बन गई है। घर पर मां का शव देखकर बच्चों का रोरोकर बुरा हाल है। मौके पर पहुंचे हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
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बारिश से रिहायशी मकान ध्वस्त
पनियरा। थानाक्षेत्र के ग्राम सभा खैंचा निवासी रंजीत सिंह यादव व जयनाथ यादव का रिहायसी मकान तेज बारिश से बीती रात ध्वस्त हो गया। मकान में सो रहे रंजीत सिंह यादव की मां और उनका भाई बाल बाल बच गए। लेकिन मकान में रखा सारा सामान नष्ट हो गया। रंजीत सिंह यादव और जयनाथ यादव का रहने के लिए वही एक मकान था जो ध्वस्त हो जाने से उन लोगों को रहने के लिए अब कोई मकान नहीं रह गया है। ये लोग मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। मकान गिरने की सूचना हल्का लेखपाल को दे दी गई है।
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