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आयुष्मान योजना की सूची से चार अस्पताल बाहर
Mon, 03 Jun 2019 11:00 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 03 Jun 2019 11:00 PM IST
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गोरखपुर। गरीबों को मुफ्त में इलाज देने के लिए शुरू किए गए आयुष्मान योजना में जिले के प्राइवेट अस्पताल उदासीन हैं। चार ऐसे अस्पताल सामने आए है जहां पर मरीजों को इलाज देने में हीलाहवाली की गई थी। इतना ही नहीं योजना शुरू होने के बाद से आज तक इन अस्पतालों में एक भी मरीज का उपचार नहीं हुआ। बीते दिनों डीएम के संज्ञान में मामला आने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की। सीएमओ को कार्रवाई का आदेश भी दिया। जांच में इलाज में लापरवाही की पुष्टि होने पर चार अस्पतालों को आयुष्मान की सूची से बाहर कर नोटिस जारी कर दिया गया है। योजना से जुड़े अन्य अस्पतालों की भी समीक्षा शुरू कर दी गई है।
आयुष्मान योजना से जिले के 64 प्राइवेट अस्पतालों को जोड़ा गया है। इसके पीछे का उद्देश्य था कि सरकारी अस्पताल में भीड़ या फिर दूरी होने की दशा में मरीज पास के ही प्राइवेट अस्पताल में मुफ्त और बेहतर इलाज पा सकें। जिले में इसके तहत चयनित कई अस्पताल से लापरवाही की खबरें आ चुकी है। पिछले महीने ही शहर के एक बड़े अस्पताल में आयुष्मान का कार्ड देखाने पर भी मरीज से रुपये वसूलने का मामला सामने आया था जिस पर सीएमओ ने सख्ती कर कार्रवाई की थी। इसके बाद से ही अस्पताल अब गरीबों का योजना के तहत इलाज करने में हिचकने लगे हैं। जिले के जेपी हास्पिटल, रियाज नर्सिंग होम, मल्ल मैटरनिटी और पीएन हास्पिटल में गरीबों का उपचार नहीं किया गया है।
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आयुष्मान योजना से जिले के 64 प्राइवेट अस्पतालों को जोड़ा गया है। इसके पीछे का उद्देश्य था कि सरकारी अस्पताल में भीड़ या फिर दूरी होने की दशा में मरीज पास के ही प्राइवेट अस्पताल में मुफ्त और बेहतर इलाज पा सकें। जिले में इसके तहत चयनित कई अस्पताल से लापरवाही की खबरें आ चुकी है। पिछले महीने ही शहर के एक बड़े अस्पताल में आयुष्मान का कार्ड देखाने पर भी मरीज से रुपये वसूलने का मामला सामने आया था जिस पर सीएमओ ने सख्ती कर कार्रवाई की थी। इसके बाद से ही अस्पताल अब गरीबों का योजना के तहत इलाज करने में हिचकने लगे हैं। जिले के जेपी हास्पिटल, रियाज नर्सिंग होम, मल्ल मैटरनिटी और पीएन हास्पिटल में गरीबों का उपचार नहीं किया गया है।
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फीस की अदायगी में देरी से बचते है नर्सिंग होम
सरकारी योजना के तहत इलाज करने पर मरीज से एक भी रुपये फीस नहीं मिलती है। इस फीस की अदायगी सरकार करती है। वित्तीय वर्ष के हिसाब से रुपये नर्सिंग होम के खाते मेें भेजे जाते हैं। इसकी प्रक्रिया कई बार लंबी हो जाती है और वित्तीय वर्ष में समय से भुगतान नहीं हो पाता है। यही वजह है कि प्राइवेट अस्पताल वाले योजना के तहत इलाज करने से बचते हैं।
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चार अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत एक भी मरीज का इलाज नहीं किया गया था। इनको सरकारी सूची से बाहर कर दिया गया है। अन्य अस्पतालों की भी समीक्षा की जा रही है।
डॉ. एनके पांडेय, एडिशनल सीएमओ