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150 एकड़ भूमि आवंटन की विजिलेंस जांच के आदेश
Sat, 19 Jan 2019 12:34 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Sat, 19 Jan 2019 12:34 AM IST
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- फोटो : डेमो
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गोरखपुर। रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र में शहर के एक उद्यमी और एक बिल्डर को 150 एकड़ भूमि के आवंटन की जांच शासन ने विजिलेंस को सौंप दी है। जीडीए सचिव ने आवंटन में पूर्व के अफसरों द्वारा गड़बड़ी का हवाला देते हुए शासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। जिसपर 17 जनवरी को प्रमुख सचिव आवास ने उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) को जांच दे दी है।
प्राधिकरण ने साल 1997 में 150 एकड़ भूमि मेसर्स जालान कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स भव्या कॉलोनाइजर्स को नीलामी में दी थी। मेसर्स जालान ने 8 करोड़ 31 लाख रुपये और भव्या कॉलोनाइजर्स ने लगभग 5 करोड़ रुपये चुकाए थे। बाद में ब्याज का मामला फंसा जिसपर उद्योगपति और बिल्डर कोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट दोनों ही जगह जीडीए को इस मामले में शिकस्त मिली थी। मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों के साथ पिछले दो दिनों से प्राधिकरण के सचिव लखनऊ में जमे हुए थे।
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प्राधिकरण ने साल 1997 में 150 एकड़ भूमि मेसर्स जालान कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स भव्या कॉलोनाइजर्स को नीलामी में दी थी। मेसर्स जालान ने 8 करोड़ 31 लाख रुपये और भव्या कॉलोनाइजर्स ने लगभग 5 करोड़ रुपये चुकाए थे। बाद में ब्याज का मामला फंसा जिसपर उद्योगपति और बिल्डर कोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट दोनों ही जगह जीडीए को इस मामले में शिकस्त मिली थी। मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों के साथ पिछले दो दिनों से प्राधिकरण के सचिव लखनऊ में जमे हुए थे।
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भूमि का बाजार मूल्य 750 करोड़ बताया
नीलाम की गई 150 एकड़ भूमि का वर्तमान बाजार मूल्य करीब 750 करोड़ बताया जा रहा है। इतना ही नहीं जीडीए के मुताबिक इस मामले में उसे ब्याज के तौर पर करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वर्तमान अधिकारियों का मानना है कि करोड़ों के नुकसान के लिए जीडीए के पूर्व के अफ सर ही जिम्मेदार हैं। पिछले 22 वर्ष में इस मामले में अफ सरों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए सचिव ने प्रमुख सचिव आवास को पत्र लिखा गया था।
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