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साधना कर जीवन बना सकते है सार्थक
Updated Sun, 09 Jul 2017 08:49 PM IST
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आशुतोष महाराज की शिष्या ब्रह्मज्ञान देती हुईं।
- फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर। साधना से ही जीवन सार्थक बन सकता है। इससे जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है और कष्ट दूर होते हैं। ये कहना है आशुतोष महाराज की शिष्य साध्वी अध्या भारती और साध्वी मैत्री भारती का। दोनों गुरु पूर्णिमा पर रविवार को तारामंडल स्थित माधव लॉन में संगत को ब्रह्मज्ञान से अवगत करा रही थीं।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान तारामंडल इकाई की ओर से आयोजित कार्यक्रम में साध्वी अध्या भारती ने कहा कि गुरु शरीर नहीं बल्कि एक शक्ति है। साधना की अनंत गहराइयों में उतरकर कोई भी मुनष्य इन शक्तियों को महसूस कर सकता है। इसके लिए साधना ही आसान मार्ग है। जब परमात्मा साकार रूप में धरती पर आते हैं तो वह पूर्ण सद्गुरु के रूप में आते हैं और अपनी लीलाओं से लोगों को समझाने का प्रयास करते हैं। साधक तो लीला को समझ लेते हैं लेकिन अज्ञानी भटक कर रह जाते हैं। साध्वी मैत्री भारती ने ब्रह्मज्ञान का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करने को प्रेरित किया। साथ ही अपनी मधुर आवाज की संगीत से संगत को सराबोर कर दिया। गोविंद कुमार ने बताया कि गोरखपुर के 30 हजार लोगों ने ब्रह्मज्ञान दीक्षा के लिए नामांकन कराया है। महोत्सव में आजमगढ़, देवरिया, बस्ती, खुखुंदु से भी लोग पहुंचे थे। इस दौरान महाराज आशुतोष से जुड़ी किताबों और कई अन्य सामानों के स्टॉल भी लगाए गए थे। महोत्सव की अध्यक्षता स्वामी अर्जुनानंद महाराज, स्वामी प्रबुद्धानंद महाराज और स्वामी विश्वरूपानंद महाराज ने की। इस मौके ब्रह्मेशानंद और विष्णु प्रकाशानंद आदि उपस्थित रहे।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान तारामंडल इकाई की ओर से आयोजित कार्यक्रम में साध्वी अध्या भारती ने कहा कि गुरु शरीर नहीं बल्कि एक शक्ति है। साधना की अनंत गहराइयों में उतरकर कोई भी मुनष्य इन शक्तियों को महसूस कर सकता है। इसके लिए साधना ही आसान मार्ग है। जब परमात्मा साकार रूप में धरती पर आते हैं तो वह पूर्ण सद्गुरु के रूप में आते हैं और अपनी लीलाओं से लोगों को समझाने का प्रयास करते हैं। साधक तो लीला को समझ लेते हैं लेकिन अज्ञानी भटक कर रह जाते हैं। साध्वी मैत्री भारती ने ब्रह्मज्ञान का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करने को प्रेरित किया। साथ ही अपनी मधुर आवाज की संगीत से संगत को सराबोर कर दिया। गोविंद कुमार ने बताया कि गोरखपुर के 30 हजार लोगों ने ब्रह्मज्ञान दीक्षा के लिए नामांकन कराया है। महोत्सव में आजमगढ़, देवरिया, बस्ती, खुखुंदु से भी लोग पहुंचे थे। इस दौरान महाराज आशुतोष से जुड़ी किताबों और कई अन्य सामानों के स्टॉल भी लगाए गए थे। महोत्सव की अध्यक्षता स्वामी अर्जुनानंद महाराज, स्वामी प्रबुद्धानंद महाराज और स्वामी विश्वरूपानंद महाराज ने की। इस मौके ब्रह्मेशानंद और विष्णु प्रकाशानंद आदि उपस्थित रहे।
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