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मौत पर अफसरों के झूठ से उठा परदा
Updated Sat, 12 Aug 2017 01:44 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौतों का आंकड़ा जिला और मेडिकल प्रशासन छुपाने में जुटा है। डीएम राजीव रौतला ने 10 और 11 जुलाई को सिर्फ 30 मौत होने का दावा किया था लेकिन मेडिकल कॉलेज के रिकार्ड के मुताबिक इन तारीखों में 48 से ज्यादा मरीजों की मौत हुई है। मेडिकल कॉलेज में ही मरीजों के भर्ती और मौत का रिकार्ड उपलब्ध हैं, फिर भी मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। बड़ी संख्या में नवजात बच्चों की मौत हुई है। इन सबके नाम के आगे मां (बेबी ऑफ प्रीति) का नाम लिखा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी की वजह से 48 से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसके रिकार्ड भी उपलब्ध हैं। वार्ड नंबर 10 में भर्ती नेपाल के रूपन देही जिला के भगवती की मौत शुक्रवार को सुबह 10 बजे हुई है। इसी वार्ड में भर्ती गोरखपुर के रामजी भी काल के गाल में समा गए हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अफसर मामले को दबाने में लगे हैं। 48 लोगों की मौत हो गई, फिर भी किसी का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। मेडिकल कॉलेज का भर्ती रिकार्ड भी नहीं मिल रहा है। इन मौतों की असली वजह बीमारियों को बताने की तैयारी है लेकिन प्रशासनिक अफसर मामले को नहीं दबा सकेंगे। जांच में सारी पोल खुल जाएगी। बहरहाल, इन मौतों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जिले के आला अफसरों की परेशानी बढ़ा दी है। मामला मुख्यमंत्री के जिले से जुड़ा है। लखनऊ के आला अफसर मामले की पल-पल की रिपोर्ट भी ले रहे हैं। माना जा रहा है कि जिले और मेडिकल कॉलेज के बड़े अफसरों पर गाज गिरनी है।
10 अगस्त की रात बजे से 11 अगस्त को शाम पांच बजे के बीच बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौतें।
बड़ों की मौत
एकेडमिक वार्ड में भर्ती वीरेंद्र गोपाल, अनिरुद्ध सिंह, गायत्री देवी, बलिकरन, पूरन यादव, घनश्याम, रुबिना खान, इंदु सिंह, विजय बहादुर, उमाशंकर, राम करन, राम नरेश, हीरालाल, राज कुमार, भगवती, रामजी और वार्ड नंबर चार महिला वार्ड में भर्ती शंकेषा देवी सहित अन्य।
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बच्चों की मौत
शालू, ज्योति, वंदना, प्रतिज्ञा, मंजू, आरुषि, शिवानी, फ्रूटी, खुशी, दीपक, शाहन, सदीमुन्ननिशां, लवकुश, अब्दुल रहमान, बेबी ऑफ प्रमिला, बेबी ऑफ अंतिमा, बेबी ऑफ कंचन, बेबी ऑफ सीमा, बेबी ऑफ ऋतु, बेबी ऑफ सुमन, बेबी ऑफ जीना, बेबी ऑफ रंभा, बेबी ऑफ रंभा, बेबी ऑफ कंचन, बेबी ऑफ केसी, बेबी ऑफ लक्ष्मी, बेबी ऑफ सारिका, बेबी ऑफ प्रीति और बेबी ऑफ मनोरमा सहित अन्य।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौतों का आंकड़ा जिला और मेडिकल प्रशासन छुपाने में जुटा है। डीएम राजीव रौतला ने 10 और 11 जुलाई को सिर्फ 30 मौत होने का दावा किया था लेकिन मेडिकल कॉलेज के रिकार्ड के मुताबिक इन तारीखों में 48 से ज्यादा मरीजों की मौत हुई है। मेडिकल कॉलेज में ही मरीजों के भर्ती और मौत का रिकार्ड उपलब्ध हैं, फिर भी मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। बड़ी संख्या में नवजात बच्चों की मौत हुई है। इन सबके नाम के आगे मां (बेबी ऑफ प्रीति) का नाम लिखा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी की वजह से 48 से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसके रिकार्ड भी उपलब्ध हैं। वार्ड नंबर 10 में भर्ती नेपाल के रूपन देही जिला के भगवती की मौत शुक्रवार को सुबह 10 बजे हुई है। इसी वार्ड में भर्ती गोरखपुर के रामजी भी काल के गाल में समा गए हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अफसर मामले को दबाने में लगे हैं। 48 लोगों की मौत हो गई, फिर भी किसी का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। मेडिकल कॉलेज का भर्ती रिकार्ड भी नहीं मिल रहा है। इन मौतों की असली वजह बीमारियों को बताने की तैयारी है लेकिन प्रशासनिक अफसर मामले को नहीं दबा सकेंगे। जांच में सारी पोल खुल जाएगी। बहरहाल, इन मौतों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जिले के आला अफसरों की परेशानी बढ़ा दी है। मामला मुख्यमंत्री के जिले से जुड़ा है। लखनऊ के आला अफसर मामले की पल-पल की रिपोर्ट भी ले रहे हैं। माना जा रहा है कि जिले और मेडिकल कॉलेज के बड़े अफसरों पर गाज गिरनी है।
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10 अगस्त की रात बजे से 11 अगस्त को शाम पांच बजे के बीच बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौतें।
बड़ों की मौत
एकेडमिक वार्ड में भर्ती वीरेंद्र गोपाल, अनिरुद्ध सिंह, गायत्री देवी, बलिकरन, पूरन यादव, घनश्याम, रुबिना खान, इंदु सिंह, विजय बहादुर, उमाशंकर, राम करन, राम नरेश, हीरालाल, राज कुमार, भगवती, रामजी और वार्ड नंबर चार महिला वार्ड में भर्ती शंकेषा देवी सहित अन्य।
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बच्चों की मौत
शालू, ज्योति, वंदना, प्रतिज्ञा, मंजू, आरुषि, शिवानी, फ्रूटी, खुशी, दीपक, शाहन, सदीमुन्ननिशां, लवकुश, अब्दुल रहमान, बेबी ऑफ प्रमिला, बेबी ऑफ अंतिमा, बेबी ऑफ कंचन, बेबी ऑफ सीमा, बेबी ऑफ ऋतु, बेबी ऑफ सुमन, बेबी ऑफ जीना, बेबी ऑफ रंभा, बेबी ऑफ रंभा, बेबी ऑफ कंचन, बेबी ऑफ केसी, बेबी ऑफ लक्ष्मी, बेबी ऑफ सारिका, बेबी ऑफ प्रीति और बेबी ऑफ मनोरमा सहित अन्य।