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योगी सरकार की नाराजगी के शिकार हुए डीएम रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sat, 17 Mar 2018 12:45 AM IST
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डीएम राजीव रौतेला।
- फोटो : Amar Ujala
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डीएम राजीव रौतेला का गोरखपुर से तबादला उपचुनाव में बीजेपी सरकार को मिली करारी शिकस्त से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के जिले में मिली इस हार की प्रदेश और केंद्र दोनों ही सरकारें समीक्षा कर रहीं हैं।
सूत्रों की माने तो हार की वजहों में एक अहम वजह प्रशासनिक मशीनरी में लापरवाही भी मानी जा रही है। जनता की समस्याओं को गंभीरता से न लेना। कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं देना। मतदान के दिन बड़ी संख्या में ईवीएम का ख़राब होना, उसे समय से नहीं बदल पाना और तमाम वोटरों तक वोटर पर्ची नहीं पंहुचा पाना जैसी भी कई लापरवाही इसमें शामिल हैं। यूं तो डीएम राजीव रौतेला पिछले महीने ही प्रोन्नति पा गए थे, मगर देवीपाटन जैसे कम महत्व के मंडल का उन्हें कमिश्नर बनाया जाना इस ओर इशारा करता है कि कहीं न कहीं सरकार उनसे नाराज है।
पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री के करीबी अफसरों में से एक माने जाने वाले राजीव रौतेला पर जल्द कोई कार्रवाई की चर्चा मतगणना के दिन से ही उठने लगी थी। अब देखना ये है कि खनन के मामले में हाईकोर्ट की सख्ती से उन्हें बचाने में सरकार उनकी कितनी मददगार साबित हो रही है। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अप्रैल 2017 में राजीव रौतेला ने जिले के डीएम की कुर्सी संभाली थी। बाढ़ के दौरान राहत-बचाव कार्यों पर उनकी सक्रियता पर जनता से लेकर मुख्यमंत्री तक से उन्हें शाबाशी मिली थी। हालांकि लंबी बैठकों और अपनी कार्य संस्कृति से मातहतों में भीतर ही भीतर उनके प्रति थोड़ा आक्रोश था, मगर सरकार में अच्छी पैठ की वजह से कोई कभी इस आक्रोश को बयां करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
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सूत्रों की माने तो हार की वजहों में एक अहम वजह प्रशासनिक मशीनरी में लापरवाही भी मानी जा रही है। जनता की समस्याओं को गंभीरता से न लेना। कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं देना। मतदान के दिन बड़ी संख्या में ईवीएम का ख़राब होना, उसे समय से नहीं बदल पाना और तमाम वोटरों तक वोटर पर्ची नहीं पंहुचा पाना जैसी भी कई लापरवाही इसमें शामिल हैं। यूं तो डीएम राजीव रौतेला पिछले महीने ही प्रोन्नति पा गए थे, मगर देवीपाटन जैसे कम महत्व के मंडल का उन्हें कमिश्नर बनाया जाना इस ओर इशारा करता है कि कहीं न कहीं सरकार उनसे नाराज है।
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पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री के करीबी अफसरों में से एक माने जाने वाले राजीव रौतेला पर जल्द कोई कार्रवाई की चर्चा मतगणना के दिन से ही उठने लगी थी। अब देखना ये है कि खनन के मामले में हाईकोर्ट की सख्ती से उन्हें बचाने में सरकार उनकी कितनी मददगार साबित हो रही है। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अप्रैल 2017 में राजीव रौतेला ने जिले के डीएम की कुर्सी संभाली थी। बाढ़ के दौरान राहत-बचाव कार्यों पर उनकी सक्रियता पर जनता से लेकर मुख्यमंत्री तक से उन्हें शाबाशी मिली थी। हालांकि लंबी बैठकों और अपनी कार्य संस्कृति से मातहतों में भीतर ही भीतर उनके प्रति थोड़ा आक्रोश था, मगर सरकार में अच्छी पैठ की वजह से कोई कभी इस आक्रोश को बयां करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
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