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नहीं थम रही गंडक की कटान, सहमे लोग
Updated Wed, 22 Aug 2018 12:17 AM IST
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नहीं थम रही गंडक की कटान, सहमे लोग
बाढ़ खंड बचाव कार्य में जुटा
तमकुहीरोड। गंडक नदी की कटान तेज होती जा रही है। बचाव कार्य में भले ही बाढ़ खंड जुटा है, लेकिन अहिरौलीदान गांव के पांच पुरवों के लोग भयभीत है। कटान की जद में मकान आने की आशंका से लोग अपने घरों से जरूरी सामान समेट कर सुरक्षित ले जाने की तैयारी में जुटे हुए है।
अहिरौलीदान का कचहरीटोला 15 दिनों से गंडक नदी के निशाने पर है। स्थिति यह है कि 15 दिनों के भीतर करीब 100 से अधिक मकानों को नदी अपनी चपेट में ले चुकी है। जबकि तमाम लोग अपने घरों को तोड़ कर ईंट सुरक्षित जगह पर पहुंचाने की कोशिश कर रहे है। उधर, बाढ़ खंड बोल्डर और मिट्टी को बोरी में भरकर कटान रोकने की कोशिशों में जुटा हुआ है। बावजूद इसके नदी और एपी बांध के बीच की दूरी निरंतर कम होती जा रही है। जो आसपास के अन्य गांवों के लोगों के लिए भी चिंता के कारण बन गई है। अहिरौलीदान के अरविंद सिंह पटेल, सत्येंद्र सिंह, रामेश्वर दुबे, धर्मदेव सिंह, बृजकिशोर सिंह आदि का कहना है कि फिलहाल नदी का कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। जहां बचाव कार्य हो रहा है, वहां तो ठीक है, लेकिन जहां बचाव कार्य नहीं हो रहे है, वहां से नदी दूसरा रास्ता बनाकर गांव में पहुंच जा रही है। ऐसी दशा में गांव के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। मंगलवार को भी कटान के भय से विनोद सिंह, बैरिस्टर सिंह, गोरख सिंह, विक्रमा सिंह, नंदकिशोर सिंह के परिजन मकानों को तोड़ने का काम शुरू कर दिया जबकि कुछ लोग अपने तोड़े गए मकानों के मलबा को हटाने में जुटे थे। कुछ अन्य लोग अपने जरूरी सामानों को सहेजने में जुटे हुए थे। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता भरतराम ने बताया कि विभाग के लोग कटान रोकने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।
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बाढ़ खंड बचाव कार्य में जुटा
तमकुहीरोड। गंडक नदी की कटान तेज होती जा रही है। बचाव कार्य में भले ही बाढ़ खंड जुटा है, लेकिन अहिरौलीदान गांव के पांच पुरवों के लोग भयभीत है। कटान की जद में मकान आने की आशंका से लोग अपने घरों से जरूरी सामान समेट कर सुरक्षित ले जाने की तैयारी में जुटे हुए है।
अहिरौलीदान का कचहरीटोला 15 दिनों से गंडक नदी के निशाने पर है। स्थिति यह है कि 15 दिनों के भीतर करीब 100 से अधिक मकानों को नदी अपनी चपेट में ले चुकी है। जबकि तमाम लोग अपने घरों को तोड़ कर ईंट सुरक्षित जगह पर पहुंचाने की कोशिश कर रहे है। उधर, बाढ़ खंड बोल्डर और मिट्टी को बोरी में भरकर कटान रोकने की कोशिशों में जुटा हुआ है। बावजूद इसके नदी और एपी बांध के बीच की दूरी निरंतर कम होती जा रही है। जो आसपास के अन्य गांवों के लोगों के लिए भी चिंता के कारण बन गई है। अहिरौलीदान के अरविंद सिंह पटेल, सत्येंद्र सिंह, रामेश्वर दुबे, धर्मदेव सिंह, बृजकिशोर सिंह आदि का कहना है कि फिलहाल नदी का कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। जहां बचाव कार्य हो रहा है, वहां तो ठीक है, लेकिन जहां बचाव कार्य नहीं हो रहे है, वहां से नदी दूसरा रास्ता बनाकर गांव में पहुंच जा रही है। ऐसी दशा में गांव के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। मंगलवार को भी कटान के भय से विनोद सिंह, बैरिस्टर सिंह, गोरख सिंह, विक्रमा सिंह, नंदकिशोर सिंह के परिजन मकानों को तोड़ने का काम शुरू कर दिया जबकि कुछ लोग अपने तोड़े गए मकानों के मलबा को हटाने में जुटे थे। कुछ अन्य लोग अपने जरूरी सामानों को सहेजने में जुटे हुए थे। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता भरतराम ने बताया कि विभाग के लोग कटान रोकने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।
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