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शिक्षक भर्ती में सरकारी खजाने की लूट

Sun, 08 Oct 2017 01:43 AM IST
Updated Sun, 08 Oct 2017 01:43 AM IST
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शिक्षक भर्ती में सरकारी खजाने की लूट

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संतोष सिंह
गोरखपुर।
पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक एएन मौर्य के निलंबन के साथ ही शिक्षक, कर्मचारियों की नियुक्ति और वेतन भुगतान में फर्जीवाड़े की परतें उधड़ने लगी हैं। शासन स्तर से हुई जांच के बाद चार अक्तूबर को जारी विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया कि स्वीकृत पद के बगैर की गई नियुक्ति और नियुक्ति की तारीख से पहले की अवधि से वेतन भुगतान करके करोड़ों रुपये की बंदरबांट की गई। जिन शिक्षकों का वेतन वर्ष 2000 से मिलना था, उन्हें 1994 से भुगतान किया गया। कुछ मामलों में छह साल का ज्यादा वेतन बांटा गया है। अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल की तरफ से जारी आदेश में कहा गया कि गलत नियुक्तियां निरस्त की जाएंगी। ज्यादा वेतन लेने वाले शिक्षक, कर्मचारियों से रिकवरी होगी। इसकी आकलन रिपोर्ट वर्तमान जिला विद्यालय निरीक्षक से मांगी गई है। 2012 से 2017 के बीच गोरखपुर के अनुदानित और अल्पसंख्यक इंटर कॉलेजों में नियुक्ति की जांच भी कराई जाएगी। इसकी जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक को दी गई है।

रिपोर्ट में सामने आई ये सच्चाई
- संयुक्त शिक्षा निदेशक की कमेटी को दरकिनार करके 23 मार्च 2017 को मुरारी इंटर कॉलेज सहजनवां के सहायक अध्यापक विनोद कुमार त्रिपाठी और मनुरामा सिंह को विनियमित किया गया। इन शिक्षकों को 18 जुलाई 2000 से वेतन भुगतान किया जाना था लेकिन 24 जुलाई 1994 से वेतन भुगतान कर दिया गया। शिक्षा निदेशालय की अनुमति के बगैर वेतन धनराशि स्वीकृत की गई।
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- मुरारी लाल इंटर कॉलेज सहजनवां के सहायक अध्यापक राम आशीष सिंह को भी विनियमित किया गया। उन्हें 18 जुलाई 2000 से वेतन दिया जाना था लेकिन 24 जुलाई 1994 से वेतन दिया गया। जो धनराशि बची थी, उसके भुगतान की अनुमति माध्यमिक शिक्षा निदेशक से नहीं ली गई।
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- मंडलीय समिति को दरकिनार करके किसान इंटर कॉलेज के सहायक अध्यापक डॉ. अखिलेश नारायण सिंह को विनियमित किया गया। साथ ही 29 जनवरी 2003 के बजाय 11 जून 1996 से वेतन का भुगतान किया गया। गणेश शंकर पांडेय इंटर कॉलेज खजनी के बकाये वेतन का भुगतान अनियमित तरीके से किया गया।

- इमामबाड़ा मुस्लिम गर्ल्स इंटर कॉलेज में 14 शिक्षकों (सात प्रवक्ता और सात सहायक प्रवक्ता) की नियुक्ति में मनमानी की गई। शिक्षा निदेशक की अनुमति के बगैर ही पद सृजित और स्वीकृत किए गए, फिर विज्ञापन निकालकर 24 फरवरी 2015 को शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई। इसी तरह मियां साहब इस्लामिया इंटर कॉलेज बक्शीपुर में तीन शिक्षकों (1 प्रवक्ता, दो सहायक अध्यापक) का वेतन भुगतान किया गया।

- अभय नंदन इंटर कॉलेज विष्णु मंदिर में शिक्षकों की नियुक्ति की अनियमित प्रक्रिया अपनाई गई। उर्मिला यादव, पारुल जैन, बेला सिन्हा और प्रियंका सिंह को नियुक्ति दी गई, जिसमें से कुछ नियुक्ति की अर्हता नहीं पूरी करती हैं।

- सेंट एंड्रयूज इंटर कॉलेज में 25 फरवरी 2017 को चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति और भुगतान गलत तरीके से किया गया। उच्च माध्यमिक विद्यालय बढ़या चौक में 26 जून 2017 को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में गलत नियुक्ति की गई।


- उच्च माध्यमिक विद्यालय राजावरी जसवल के सहायक लिपिक भगवान दास को 1 अप्रैल 1988 से 20 अप्रैल 1999 तक का बकाया वेतन दिया गया, जबकि भगवान दास की तैनाती इस अवधि में विद्यालय में नहीं थी।
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