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प्रसूताओं को अल्ट्रासाउंड को नहीं पड़ेगा भटकना
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2015 11:38 PM IST
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अब से महिला अस्पताल आने वाली किसी भी प्रसूता महिला को अल्ट्रासाउंड के लिए जिला अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। महिला अस्पताल का अल्ट्रासाउंड सेंटर उनके लिए सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक खुला रहेगा। जहां वह आसानी से इस सुविधा का लाभ बगैर किसी शुल्क के ले सकेंगी।
इसके लिए अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. उमाकांत वर्मा ने जिला अस्पताल में तैनात दो रेडियोलाजिस्ट की ड्यूटी रोस्टर के आधार पर महिला अस्पताल में लगाए जाने के निर्देश दिए हैं। वहीं जिला अस्पताल में ईएनटी सर्जन की तैनाती के लिए उन्होंने निदेशालय को पत्र लिखकर एक डिमांड की है।
महिला अस्पताल में रोजाना करीब दो दर्जन बच्चों की डिलीवरी होती है। जबकि डिलीवरी से पहले रोजाना सैकड़ों महिलाएं यहां रुटीन जांच के लिए आती हैं। जिसके लिए महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की भी व्यवस्था है। लेकिन यहां की अल्ट्रासाउंड मशीन हफ्ते में केवल एक ही दिन चलती है।
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बाकी दिन महिला अस्पताल आने वाली महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए दो किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। जिसमें उन्हें तमाम तरह की दिक्कतें होती हैं। महिलाओं की इस दिक्कत को पूरी तरह से खत्म किए जाने के लिए अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. उमाकांत वर्मा ने जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तैनात दो डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर के आधार पर महिला अस्पताल में लगाए जाने के निर्देश दिए हैं।
वहीं मंडल के किसी भी जिले में ईएनटी सर्जन न होने पर उन्होंने निदेशालय को पत्र लिख एक ईएनटी सर्जन की मांग की है। अपर निदेशक उमाकांत वर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल के दो रेडियोलॉजिस्ट अब से महिला अस्पताल में बैठकर वहां अपनी ड्यूटी देंगे।
साथ ही मंडल में सिर्फ एक ही ईएनटी सर्जन हैं, जिनका कुछ दिनों बाद रिटायरमेंट होने वाला है। इसलिए वह रिटायरमेंट पीरियड तक की छुट्टी लिए हुए हैं। ऐसी स्थिति में मौजूदा समय कोई भी ईएनटी सर्जन मंडल में नहीं है। जिसके लिए निदेशालय को पत्र लिखकर एक ईएनटी सर्जन की तैनाती गोंडा में किए जाने को कहा गया है। जबकि पहले भी इसके लिए कई बार निदेशालय से डिमांड की जा चुकी है।
जिले में भले ही कोई ईएनटी सर्जन न हो, लेकिन इसके बाद भी मंगलवार से ऑनलाइन आवेदन पत्र पर बनाए जाने वाले विकलांग प्रमाणपत्र इसके लाभार्थियों को जारी किए जाएंगे।
बता दें कि विकलांगता प्रमाणपत्र के लिए बनाए गए डॉक्टरों के पैनल में एक ईएनटी सर्जन होना जरूरी है। लेकिन जिले में ईएनटी सर्जन न होने से इसका पद यहां इस पैनल में खाली पड़ा है। हालांकि टीम में शामिल डॉक्टरों का कहना है कि ईएनटी सर्जन नहीं है तो क्या हुआ, इससे संबंधित प्रमाणपत्र इसके बाद भी जारी होंगे।
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इसके लिए अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. उमाकांत वर्मा ने जिला अस्पताल में तैनात दो रेडियोलाजिस्ट की ड्यूटी रोस्टर के आधार पर महिला अस्पताल में लगाए जाने के निर्देश दिए हैं। वहीं जिला अस्पताल में ईएनटी सर्जन की तैनाती के लिए उन्होंने निदेशालय को पत्र लिखकर एक डिमांड की है।
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महिला अस्पताल में रोजाना करीब दो दर्जन बच्चों की डिलीवरी होती है। जबकि डिलीवरी से पहले रोजाना सैकड़ों महिलाएं यहां रुटीन जांच के लिए आती हैं। जिसके लिए महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की भी व्यवस्था है। लेकिन यहां की अल्ट्रासाउंड मशीन हफ्ते में केवल एक ही दिन चलती है।
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बाकी दिन महिला अस्पताल आने वाली महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए दो किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। जिसमें उन्हें तमाम तरह की दिक्कतें होती हैं। महिलाओं की इस दिक्कत को पूरी तरह से खत्म किए जाने के लिए अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. उमाकांत वर्मा ने जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तैनात दो डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर के आधार पर महिला अस्पताल में लगाए जाने के निर्देश दिए हैं।
वहीं मंडल के किसी भी जिले में ईएनटी सर्जन न होने पर उन्होंने निदेशालय को पत्र लिख एक ईएनटी सर्जन की मांग की है। अपर निदेशक उमाकांत वर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल के दो रेडियोलॉजिस्ट अब से महिला अस्पताल में बैठकर वहां अपनी ड्यूटी देंगे।
साथ ही मंडल में सिर्फ एक ही ईएनटी सर्जन हैं, जिनका कुछ दिनों बाद रिटायरमेंट होने वाला है। इसलिए वह रिटायरमेंट पीरियड तक की छुट्टी लिए हुए हैं। ऐसी स्थिति में मौजूदा समय कोई भी ईएनटी सर्जन मंडल में नहीं है। जिसके लिए निदेशालय को पत्र लिखकर एक ईएनटी सर्जन की तैनाती गोंडा में किए जाने को कहा गया है। जबकि पहले भी इसके लिए कई बार निदेशालय से डिमांड की जा चुकी है।
जिले में भले ही कोई ईएनटी सर्जन न हो, लेकिन इसके बाद भी मंगलवार से ऑनलाइन आवेदन पत्र पर बनाए जाने वाले विकलांग प्रमाणपत्र इसके लाभार्थियों को जारी किए जाएंगे।
बता दें कि विकलांगता प्रमाणपत्र के लिए बनाए गए डॉक्टरों के पैनल में एक ईएनटी सर्जन होना जरूरी है। लेकिन जिले में ईएनटी सर्जन न होने से इसका पद यहां इस पैनल में खाली पड़ा है। हालांकि टीम में शामिल डॉक्टरों का कहना है कि ईएनटी सर्जन नहीं है तो क्या हुआ, इससे संबंधित प्रमाणपत्र इसके बाद भी जारी होंगे।