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808 किलोमीटर नहरें किसान के खेतों की बनेंगी हमसफर
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सरयू नहर परियोजना।
- फोटो : NOIDA
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गोंडा। 1978 से शुरू हुई सरयू नहर परियोजना पूरी हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की इस सबसे बड़ी परियोजना का लोकार्पण शनिवार 11 जनवरी को करेंगे। गोंडा सहित नौ जिलों के किसानों के लिए यह परियोजना एक वरदान साबित होगी।
जिले में 808 किलोमीटर लंबी इस नहर योजना से किसानों को मंहगी सिंचाई की परेशानी से प्रभावी तौर पर छुटकारा मिलेगा। गोंडा जिले में यह सरयू नहर बहराइच से होकर प्रवेश करेगी। एक-दो गैप को छोड़कर परियोजना का कार्य लगभग पूरा है। अब शनिवार को पीएम मोदी इस सौगात को देश को समर्पित करेंगे।
वर्ष 1978 में बहराइच व गोंडा जिले की सिंचन क्षमता के विस्तार के लिए घाघरा कैनाल नामक परियोजना का शुभारंभ हुआ था। चार साल तक परियोजना पर काम चलता रहा, लेकिन परियोजना पूरी नहीं हुई। सुरसा की तरह परियोजना की लागत बढ़ती गई और काम भी पूरा नहीं हो पाया।
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वर्ष 1982 में परियोजना का विस्तार करते हुए अन्य जिलों को भी इसमें शामिल कर दिया गया। इसका नाम ट्रांस घाघरा-राप्ती-रोहिणी कर दिया गया। लेकिन बाद में इसका नाम सरयू नहर परियोजना कर दी गई। करीब सवा लाख किलोमीटर तक फैली इस परियोजना से कई लाख किसानों को सिंचाई की समस्या से निजात मिलेगी। इस परियोजना का मुख्य भाग गोंडा है। जिले में बहराइच के रास्ते गोंडा में आईं दो मुख्य नहरों से 45 नहरें निकाली जा चुकी हें।
मुख्य शाखा के अलावा माइनर व टेल तक पानी पहुंचाने की कवायद करीब 43 साल बाद पूरी हो रही है। जिले भर में 808 किलोमीटर नहर का जाल बिछ चुका है और इससे दो लाख 41 हजार किसानों को सिंचाई का सीधा फायदा मिलेगा।
जिले में करीब पांच लाख किसान हैं।
यहां के किसान बोरिंग व पंपिंग सेटों से सिंचाई करते रहे हैं। 50 से अधिक राजकीय नलकूप भी सिंचाई करे लिए लगे हैं। लेकिन कभी बिजली की समस्या तो कभी यांत्रिक दोष के कारण किसानों को समय से सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पाती थी। कुल किसानों में से 50 फीसदी किसानों को अब नहर सिंचाई का फायदा मिलेगा। यानि ढाई लाख किसानों को महंगे डीजल की जरूरत नहीं पड़ेगी और कम खर्च में वह समय पर फसलों की सिंचाई कर सकेंगे।
अधिशासी अभियंता सिंचाई सतीश कुमार ने बताया कि करनैलगंज के परसा गोड़री के धनई पट्टी में विभागीय खतौनी की भूमि होने के बावजूद तीन किसान परिवारों द्वारा अड़ंगेबाजी के चलते नहर नहीं बन पाई है। जिसके कारण 26 गांवों के 20 हजार किसान नहर से मिलने वाली सिंचाई की सुविधा से वंचित बने रहेंगे। अब पुलिस प्रशासन की मदद से इस विवाद को निपटाने की कवायद चल रही है।
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जिले में 808 किलोमीटर लंबी इस नहर योजना से किसानों को मंहगी सिंचाई की परेशानी से प्रभावी तौर पर छुटकारा मिलेगा। गोंडा जिले में यह सरयू नहर बहराइच से होकर प्रवेश करेगी। एक-दो गैप को छोड़कर परियोजना का कार्य लगभग पूरा है। अब शनिवार को पीएम मोदी इस सौगात को देश को समर्पित करेंगे।
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वर्ष 1978 में बहराइच व गोंडा जिले की सिंचन क्षमता के विस्तार के लिए घाघरा कैनाल नामक परियोजना का शुभारंभ हुआ था। चार साल तक परियोजना पर काम चलता रहा, लेकिन परियोजना पूरी नहीं हुई। सुरसा की तरह परियोजना की लागत बढ़ती गई और काम भी पूरा नहीं हो पाया।
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वर्ष 1982 में परियोजना का विस्तार करते हुए अन्य जिलों को भी इसमें शामिल कर दिया गया। इसका नाम ट्रांस घाघरा-राप्ती-रोहिणी कर दिया गया। लेकिन बाद में इसका नाम सरयू नहर परियोजना कर दी गई। करीब सवा लाख किलोमीटर तक फैली इस परियोजना से कई लाख किसानों को सिंचाई की समस्या से निजात मिलेगी। इस परियोजना का मुख्य भाग गोंडा है। जिले में बहराइच के रास्ते गोंडा में आईं दो मुख्य नहरों से 45 नहरें निकाली जा चुकी हें।
मुख्य शाखा के अलावा माइनर व टेल तक पानी पहुंचाने की कवायद करीब 43 साल बाद पूरी हो रही है। जिले भर में 808 किलोमीटर नहर का जाल बिछ चुका है और इससे दो लाख 41 हजार किसानों को सिंचाई का सीधा फायदा मिलेगा।
जिले में करीब पांच लाख किसान हैं।
यहां के किसान बोरिंग व पंपिंग सेटों से सिंचाई करते रहे हैं। 50 से अधिक राजकीय नलकूप भी सिंचाई करे लिए लगे हैं। लेकिन कभी बिजली की समस्या तो कभी यांत्रिक दोष के कारण किसानों को समय से सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पाती थी। कुल किसानों में से 50 फीसदी किसानों को अब नहर सिंचाई का फायदा मिलेगा। यानि ढाई लाख किसानों को महंगे डीजल की जरूरत नहीं पड़ेगी और कम खर्च में वह समय पर फसलों की सिंचाई कर सकेंगे।
अधिशासी अभियंता सिंचाई सतीश कुमार ने बताया कि करनैलगंज के परसा गोड़री के धनई पट्टी में विभागीय खतौनी की भूमि होने के बावजूद तीन किसान परिवारों द्वारा अड़ंगेबाजी के चलते नहर नहीं बन पाई है। जिसके कारण 26 गांवों के 20 हजार किसान नहर से मिलने वाली सिंचाई की सुविधा से वंचित बने रहेंगे। अब पुलिस प्रशासन की मदद से इस विवाद को निपटाने की कवायद चल रही है।