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95 करोड़ से बनी पानी टंकियां, नहीं मिला पानी
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sun, 16 Apr 2017 11:01 PM IST
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पानी के इंतजार में लाोग
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब पानी पूरी तरह दूषित हो गया है। वर्ष 2011-12 में राज्य सरकार द्वारा एडीसीसी संस्था से पेयजल की जांच करवाई गई थी। 16 विकास खंडों में करीब 30 से 32 हजार पेयजल स्रोतों की जांच हुई, जिसमें 80 फीसदी पेयजल में नाइट्रेट, क्लोराइड, आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन व अन्य खतरनाक रसायन मिले थे।
इन खतरनाक रसायनों के पेयजल में घुलने के कारण पेयजल योजनाओं को गति देने की रणनीति तय हुई। इसके तहत दो चरणों में जिले में 37 ओवरहेड टैंक बनाए गए। इस पर 95 करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन 80 फीसदी टैंकों का संचालन नहीं हुआ। जांच में भी इसका खुलासा हो चुका है। जिसमें कई जगह नलकूप नहीं बने हैं तो कई जगह गांवों में पाइप लाइन नहीं बिछायी गई है। इसमें अधिकांश गांवों में हैंडपोस्ट तो बनाए ही नहीं गए हैं।
उधर, जिले के सभी गांवों व शहरी क्षेत्रों में 52 हजार इंडियामार्का हैंडपंप लगे हैं। इनमें 18 हजार हैंडपंप खराब हो चुके हैं। जिले भर से ग्राम पंचायत अधिकारियों व विकास अधिकारियों की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। वहीं, नीर निर्मल योजना के तहत 37 ग्राम पंचायतों में 39 गांवों में फिर ओवरहेड टैंकों का निर्माण शुरू हो गया है। इनके निर्माण पर 62 करोड़ 62 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
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इंसेट
जांच में औसतन खतरनाक रसायन का प्रतिशत
-नाइट्रेट व क्लोराइड-80 प्रतिशत
-नाइट्रेट-150 प्रतिशत
-फ्लोराइड-40 प्रतिशत
-आयरन-30 प्रतिशत
-आर्सेनिक-40-80 प्रतिशत
इनसेट
कुछ गांव जहां के पेयजल में मिले रसायन का प्रतिशत
-गड़रियनपुरवा-70 प्रतिशत आर्सेनिक
-पिपरी माझा-70 प्रतिशत आर्सेनिक
-अहिरनपुरवा-450 प्रतिशत नाइट्रेट
-भैरमपुर-150 प्रतिशत क्लोराइड
-टेपरा-80 प्रतिशत आर्सेनिक
-बमनपुरवा-80 प्रतिशत आर्सेनिक
लिवर व फेफड़े पर पड़ रहा असर
गोंडा में पानी पूरी तरह से दूषित हो चुका है। पेयजल में आर्सेनिक, नाइट्रेट, क्लोराइड, फ्लोराइड व आयरन की अधिकता होने पर इसका सीधा असर फेफड़ा व लिवर पर दिख रहा है। आए दिन पेट दर्द व डायरिया, हैजा व अन्य प्रकार के मरीज आते हैं। इसके पीछे पानी ही सबसे बड़ा कारण है। इसका असर त्वचा पर भी पड़ रहा है। ऐसे में लोगों को पानी खूब उबालकर उसे ठंडा कर व छान कर पीना चाहिए।
-डॉ. समीर गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन जिला चिकित्सालय गोंडा
जांच में मिल चुके हैं खतरनाक रसायन
वर्ष 2011-12 में ग्राम्य विकास विभाग के राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के तहत हर व्यक्ति को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा नामित एडीसीसी संस्था की टीम ने पूरे जिले में करीब 32 हजार पेयजल स्रोतों की जांच की थी और करीब 50 हजार नमूने एकत्र किए थे। इनमें अधिकांश नमूनों में खतरनाक रसायन मिला है। खास कर नदियों, तालाबों व पोखरों के आसपास बसे गांवों में पानी की गुणवत्ता खराब पायी गई। इसी के तहत गांवों में शुद्ध पेयजल के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत ओवरहेड टैंकों का निर्माण कराया गया है।
-जयंत कुमार दीक्षित, सीडीओ गोंडा
पहले चरण में बनाए गए 16 ओवरहेड टैंक
वर्ष 2007-08 से 10-11 में 15 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से 16 ओवरहेड टैंक बनाए गए। इसमें तेंदुआ भगत, बेलावां, दत्तनगर, महेवा नानकार, बेल्हरी बुजुर्ग, वजीरगंज, रुद्रगढ़ नौसी, चौखड़िया, दुल्लापुर, निकरेजा इस्माइलपुर, महादेवा आदि गांव शामिल हैं। इन 16 ओवरहेड टैंकों में एक का भी संचालन नहीं हो पाया और 15 करोड़ 68 लाख रुपए सरकार के बेकार हो गए। भदवा सोमवंशी की ग्राम प्रधान रेखा सिंह ने बताया कि यह बनने के बाद चली ही नहीं। दत्तनगर के प्रधान आजाद सिंह ने बताया कि टंकी बनने के बाद से ही यहां पानी नहीं मिला। बेलावां के पूर्व प्रधान लाल मोहम्मद ने बताया कि जहां पर टैंक बना है, वहां पर झाड़ी झंखाड़ उगा है। पानी मिलने के बात दूर है। यही हाल मूड़ाडीहा व महादेवा का है।
इनसेट
113 करोड़ की टंकियों में भी लगा गोलमाल का घुन
दूसरे चरण में वर्ष 2012-13 व 13-14 में 113 करोड़ 54 लाख रुपये से 21 ओवरहेड टैंकों का निर्माण कराया गया। इनका निर्माण कार्य मार्च 2017 तक पूरा होना था। लेकिन इनमें से एक भी ओवरहेंड टैंक का संचालन नहीं हो पाया। इनके निर्माण में 113 करोड़ में 82 करोड़ 28 लाख रुपए खर्च हो गए। ग्राम पंचायत पेयजल योजना के तहत बिसुनपुर भेलभरिया, घारीघाट, बेलसर, कुकनगर ग्रंट, केशवनगर ग्रंट, परसपुर, धानेपुर, सोनौली मोहम्मदपुर, उज्जैनीकला, जैतपुर, महंगूपुर, विश्नोहरपुर, भिखारीपुर, जयरामजोत, नगदही, नकहरा, पिपरी माझा, सेमराशेखपुर आदि में नलकूप तक स्थापित नहीं किए जा सके।
एक-एक टैंक की कराई जाएगी जांच
जिले में शुद्ध पेयजल के लिए बनाए गए ओवरहेड टैंक की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। गरमी के चलते यह किल्लत और न बढ़े इसके लिए जल निगम को निर्देश दिए गए हैं कि वे पहले सभी हैंडपंपों को दुरुस्त कराएं और जांच में पानी टंकियों के निर्माण में खामी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी, ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आशुतोष निरंजन, जिलाधिकारी
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इन खतरनाक रसायनों के पेयजल में घुलने के कारण पेयजल योजनाओं को गति देने की रणनीति तय हुई। इसके तहत दो चरणों में जिले में 37 ओवरहेड टैंक बनाए गए। इस पर 95 करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन 80 फीसदी टैंकों का संचालन नहीं हुआ। जांच में भी इसका खुलासा हो चुका है। जिसमें कई जगह नलकूप नहीं बने हैं तो कई जगह गांवों में पाइप लाइन नहीं बिछायी गई है। इसमें अधिकांश गांवों में हैंडपोस्ट तो बनाए ही नहीं गए हैं।
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उधर, जिले के सभी गांवों व शहरी क्षेत्रों में 52 हजार इंडियामार्का हैंडपंप लगे हैं। इनमें 18 हजार हैंडपंप खराब हो चुके हैं। जिले भर से ग्राम पंचायत अधिकारियों व विकास अधिकारियों की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। वहीं, नीर निर्मल योजना के तहत 37 ग्राम पंचायतों में 39 गांवों में फिर ओवरहेड टैंकों का निर्माण शुरू हो गया है। इनके निर्माण पर 62 करोड़ 62 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
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इंसेट
जांच में औसतन खतरनाक रसायन का प्रतिशत
-नाइट्रेट व क्लोराइड-80 प्रतिशत
-नाइट्रेट-150 प्रतिशत
-फ्लोराइड-40 प्रतिशत
-आयरन-30 प्रतिशत
-आर्सेनिक-40-80 प्रतिशत
इनसेट
कुछ गांव जहां के पेयजल में मिले रसायन का प्रतिशत
-गड़रियनपुरवा-70 प्रतिशत आर्सेनिक
-पिपरी माझा-70 प्रतिशत आर्सेनिक
-अहिरनपुरवा-450 प्रतिशत नाइट्रेट
-भैरमपुर-150 प्रतिशत क्लोराइड
-टेपरा-80 प्रतिशत आर्सेनिक
-बमनपुरवा-80 प्रतिशत आर्सेनिक
लिवर व फेफड़े पर पड़ रहा असर
गोंडा में पानी पूरी तरह से दूषित हो चुका है। पेयजल में आर्सेनिक, नाइट्रेट, क्लोराइड, फ्लोराइड व आयरन की अधिकता होने पर इसका सीधा असर फेफड़ा व लिवर पर दिख रहा है। आए दिन पेट दर्द व डायरिया, हैजा व अन्य प्रकार के मरीज आते हैं। इसके पीछे पानी ही सबसे बड़ा कारण है। इसका असर त्वचा पर भी पड़ रहा है। ऐसे में लोगों को पानी खूब उबालकर उसे ठंडा कर व छान कर पीना चाहिए।
-डॉ. समीर गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन जिला चिकित्सालय गोंडा
जांच में मिल चुके हैं खतरनाक रसायन
वर्ष 2011-12 में ग्राम्य विकास विभाग के राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के तहत हर व्यक्ति को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा नामित एडीसीसी संस्था की टीम ने पूरे जिले में करीब 32 हजार पेयजल स्रोतों की जांच की थी और करीब 50 हजार नमूने एकत्र किए थे। इनमें अधिकांश नमूनों में खतरनाक रसायन मिला है। खास कर नदियों, तालाबों व पोखरों के आसपास बसे गांवों में पानी की गुणवत्ता खराब पायी गई। इसी के तहत गांवों में शुद्ध पेयजल के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत ओवरहेड टैंकों का निर्माण कराया गया है।
-जयंत कुमार दीक्षित, सीडीओ गोंडा
पहले चरण में बनाए गए 16 ओवरहेड टैंक
वर्ष 2007-08 से 10-11 में 15 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से 16 ओवरहेड टैंक बनाए गए। इसमें तेंदुआ भगत, बेलावां, दत्तनगर, महेवा नानकार, बेल्हरी बुजुर्ग, वजीरगंज, रुद्रगढ़ नौसी, चौखड़िया, दुल्लापुर, निकरेजा इस्माइलपुर, महादेवा आदि गांव शामिल हैं। इन 16 ओवरहेड टैंकों में एक का भी संचालन नहीं हो पाया और 15 करोड़ 68 लाख रुपए सरकार के बेकार हो गए। भदवा सोमवंशी की ग्राम प्रधान रेखा सिंह ने बताया कि यह बनने के बाद चली ही नहीं। दत्तनगर के प्रधान आजाद सिंह ने बताया कि टंकी बनने के बाद से ही यहां पानी नहीं मिला। बेलावां के पूर्व प्रधान लाल मोहम्मद ने बताया कि जहां पर टैंक बना है, वहां पर झाड़ी झंखाड़ उगा है। पानी मिलने के बात दूर है। यही हाल मूड़ाडीहा व महादेवा का है।
इनसेट
113 करोड़ की टंकियों में भी लगा गोलमाल का घुन
दूसरे चरण में वर्ष 2012-13 व 13-14 में 113 करोड़ 54 लाख रुपये से 21 ओवरहेड टैंकों का निर्माण कराया गया। इनका निर्माण कार्य मार्च 2017 तक पूरा होना था। लेकिन इनमें से एक भी ओवरहेंड टैंक का संचालन नहीं हो पाया। इनके निर्माण में 113 करोड़ में 82 करोड़ 28 लाख रुपए खर्च हो गए। ग्राम पंचायत पेयजल योजना के तहत बिसुनपुर भेलभरिया, घारीघाट, बेलसर, कुकनगर ग्रंट, केशवनगर ग्रंट, परसपुर, धानेपुर, सोनौली मोहम्मदपुर, उज्जैनीकला, जैतपुर, महंगूपुर, विश्नोहरपुर, भिखारीपुर, जयरामजोत, नगदही, नकहरा, पिपरी माझा, सेमराशेखपुर आदि में नलकूप तक स्थापित नहीं किए जा सके।
एक-एक टैंक की कराई जाएगी जांच
जिले में शुद्ध पेयजल के लिए बनाए गए ओवरहेड टैंक की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। गरमी के चलते यह किल्लत और न बढ़े इसके लिए जल निगम को निर्देश दिए गए हैं कि वे पहले सभी हैंडपंपों को दुरुस्त कराएं और जांच में पानी टंकियों के निर्माण में खामी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी, ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आशुतोष निरंजन, जिलाधिकारी