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नहर खोदाई कराने पहुंचे अधिकारियों से भिड़े ग्रामीण
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नहर खोदाई का विरोध जतातीं महिलाएं।
- फोटो : GONDA
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करनैलगंज (गोंडा)। कोतवाली करनैलगंज अंतर्गत बालपुर चौकी क्षेत्र में पड़ने वाले शिवशंकर पुरवा परसा गोंडरी गांव में सोमवार को ग्रामीण व प्रशासन आमने-सामने आ गए। मौके की नजाकत को भांप कर गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। एसडीएम, सीओ व कोतवाल भी मौके पर पहुंचे। फिलहाल अभी भी सिंचाई विभाग किसानों की जमीन पर नहर बनाने की तैयारी में है।
बताया जाता है कि ग्राम परसा गोण्डरी के मजरा शिवशंकर पुरवा में सिंचाई विभाग द्वारा नहर बनाने का काम कई वर्षों से लंबित चल रहा था। सोमवार की सुबह सिंचाई विभाग के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों के खेतों को खोदना शुरू कर दिया। जिससे किसान आक्रोशित होकर खुदाई कर रही मशीन जेसीबी व ट्रैक्टर के आगे लेटकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।
किसानों का आरोप है कि विभाग ने वर्ष 2003 में उसी सर्किल रेट के हिसाब से जमीन अधिग्रहित कर उसी के हिसाब से मुआवजा निर्धारित कर दिया। परंतु किसानों को इस बात की न तो सूचना दी और न ही उन्हें उस समय मुआवजा ही दिया गया। अब पुराने सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा देने को कह रहे हैं, जबकि किसान नए सर्किल रेट के हिसाब से अपनी जमीन का मुआवजा चाहते हैं।
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इन्हीं जमीनों के बगल जिन किसानों की जमीन इस वर्ष अधिग्रहित की गई है उनका मुआवजा पुराने से कई गुना ज्यादा है। किसानों का कहना है कि अगर उनको नए सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा नहीं दिया जाएगा तो वह किसी भी हालत में नहर खोदने नहीं देंगे। कई किसानों ने तो यहां तक कहा कि वह भले ही इस जमीन के लिए आत्महत्या करना पड़े पर अपने जीते जी पुराने मुआवजे को लेकर नहर नहीं बनने देंगे।
फिलहाल मौके पर अभी जिन किसानों का भुगतान कर दिया गया है। नहर बनाने का काम उन जमीनों पर चल रहा है। मौके पर एसडीएम ज्ञान चन्द्र गुप्ता व सीओ करनैलगंज जितेंद्र कुमार दुबे, कोतवाल राजेश कुमार सिंह सहित भारी संख्या में पुलिस बल व नहर विभाग के अधिकारी मौजूद है।
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बताया जाता है कि ग्राम परसा गोण्डरी के मजरा शिवशंकर पुरवा में सिंचाई विभाग द्वारा नहर बनाने का काम कई वर्षों से लंबित चल रहा था। सोमवार की सुबह सिंचाई विभाग के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों के खेतों को खोदना शुरू कर दिया। जिससे किसान आक्रोशित होकर खुदाई कर रही मशीन जेसीबी व ट्रैक्टर के आगे लेटकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।
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किसानों का आरोप है कि विभाग ने वर्ष 2003 में उसी सर्किल रेट के हिसाब से जमीन अधिग्रहित कर उसी के हिसाब से मुआवजा निर्धारित कर दिया। परंतु किसानों को इस बात की न तो सूचना दी और न ही उन्हें उस समय मुआवजा ही दिया गया। अब पुराने सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा देने को कह रहे हैं, जबकि किसान नए सर्किल रेट के हिसाब से अपनी जमीन का मुआवजा चाहते हैं।
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इन्हीं जमीनों के बगल जिन किसानों की जमीन इस वर्ष अधिग्रहित की गई है उनका मुआवजा पुराने से कई गुना ज्यादा है। किसानों का कहना है कि अगर उनको नए सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा नहीं दिया जाएगा तो वह किसी भी हालत में नहर खोदने नहीं देंगे। कई किसानों ने तो यहां तक कहा कि वह भले ही इस जमीन के लिए आत्महत्या करना पड़े पर अपने जीते जी पुराने मुआवजे को लेकर नहर नहीं बनने देंगे।
फिलहाल मौके पर अभी जिन किसानों का भुगतान कर दिया गया है। नहर बनाने का काम उन जमीनों पर चल रहा है। मौके पर एसडीएम ज्ञान चन्द्र गुप्ता व सीओ करनैलगंज जितेंद्र कुमार दुबे, कोतवाल राजेश कुमार सिंह सहित भारी संख्या में पुलिस बल व नहर विभाग के अधिकारी मौजूद है।