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जागरुकता बढ़ी तो वैक्सीन की अकाल, बुधवार को भी नहीं हुआ टीकाकरण
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गोंडा। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लगने वाली वैक्सीन का स्टाक जिले में शून्य होने से बुधवार को तीसरे दिन भी टीकाकरण कार्य प्रभावित रहा। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण के प्रति लोगों की जागरुकता बढ़ी तो वैक्सीन का आकाल पड़ गया।
सोमवार को दोपहर के बाद ही केंद्रो पर वैक्सीन न होने की बात कहकर टीका लगवाने गये लोगों को वापस किया जाने लगा। मंगलवार को कोविशील्ड की 170 डोज शेष थी। बुधवार को वैक्सीन का स्टाक शून्य रहा।
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए तीसरी लहर से पहले ही जिले के सभी करीब चालीस लाख लोगों को कोरोनारोधी टीका लगाने के सरकारी प्रयास में वैक्सीन की उपलब्धता न होना सबसे बड़ा रोड़ा बन रहा है।
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जिले में कुल आबादी के 12 फीसदी लोगों को कोरोनारोधी टीका लग पाया, तब तक वैक्सीन का अकाल पड़ गया। सोमवार को वैक्सीन की किल्लत शुरू हो गई, किसी तरह महत्वपूर्ण केंद्रों पर तीस वायल भेजी गई। सिर्फ 300 लोगों को ही टीका लग सकता था।
दोपहर तक किसी तरह टीकाकरण का सत्र चला उसके बाद केंद्रों पर ताला लटकने लगा। भीषण गर्मी में टीका लगवाने पहुंचे लोगों को निराश होकर बैरंग लौटना पड़ा। मंगलवार व बुधवार को टीकाकरण बिल्कुल ठप रहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ उपकेंद्रों व अन्य कैंपो से हजारों लोगों को निराश लौटना पड़ा।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने जिले में खासा तबाही मचाई है। संक्रमण की तीसरी लहर की बात सुनते ही स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। इसके बावजूद लोगों की लापरवाही शुरू हो गई है।
बुधवार को जिला अस्पताल में ओपीडी पर्चा कटवाने वालों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि लोगों के बीच में अंगुल भर की दूरी नहीं रह गई। बाजारों में उमड़ रही भीड़ थमने का नाम नहीं ले रही है।
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का लोग पालन नहीं कर रहे हैं। गांवों में तो काफी लोगों ने मास्क लगाना बंद कर दिया है। पुलिस के डर से शहर में जरूर मास्क लगा रहे हैं। बढ़ रही भीड़ कोरोना की तीसरी लहर को दावत दे रही है। बुधवार की सुबह से लेकर शाम तक बाजार में लोगों की भीड़ रही।
हर चौराहे पर बाजार में भीड़ ही भीड़ नजर आई। सोशल डिस्टेंसिंग भी लोग भूल गए हैं। बाजार में ग्राहक और व्यापारी दोनों सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। काफी दुकानों में ग्राहकों की भीड़ रहती है, और कुछ ऐसे ही हालात शहर की सड़कों पर भी है।
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सोमवार को दोपहर के बाद ही केंद्रो पर वैक्सीन न होने की बात कहकर टीका लगवाने गये लोगों को वापस किया जाने लगा। मंगलवार को कोविशील्ड की 170 डोज शेष थी। बुधवार को वैक्सीन का स्टाक शून्य रहा।
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कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए तीसरी लहर से पहले ही जिले के सभी करीब चालीस लाख लोगों को कोरोनारोधी टीका लगाने के सरकारी प्रयास में वैक्सीन की उपलब्धता न होना सबसे बड़ा रोड़ा बन रहा है।
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जिले में कुल आबादी के 12 फीसदी लोगों को कोरोनारोधी टीका लग पाया, तब तक वैक्सीन का अकाल पड़ गया। सोमवार को वैक्सीन की किल्लत शुरू हो गई, किसी तरह महत्वपूर्ण केंद्रों पर तीस वायल भेजी गई। सिर्फ 300 लोगों को ही टीका लग सकता था।
दोपहर तक किसी तरह टीकाकरण का सत्र चला उसके बाद केंद्रों पर ताला लटकने लगा। भीषण गर्मी में टीका लगवाने पहुंचे लोगों को निराश होकर बैरंग लौटना पड़ा। मंगलवार व बुधवार को टीकाकरण बिल्कुल ठप रहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ उपकेंद्रों व अन्य कैंपो से हजारों लोगों को निराश लौटना पड़ा।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने जिले में खासा तबाही मचाई है। संक्रमण की तीसरी लहर की बात सुनते ही स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। इसके बावजूद लोगों की लापरवाही शुरू हो गई है।
बुधवार को जिला अस्पताल में ओपीडी पर्चा कटवाने वालों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि लोगों के बीच में अंगुल भर की दूरी नहीं रह गई। बाजारों में उमड़ रही भीड़ थमने का नाम नहीं ले रही है।
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का लोग पालन नहीं कर रहे हैं। गांवों में तो काफी लोगों ने मास्क लगाना बंद कर दिया है। पुलिस के डर से शहर में जरूर मास्क लगा रहे हैं। बढ़ रही भीड़ कोरोना की तीसरी लहर को दावत दे रही है। बुधवार की सुबह से लेकर शाम तक बाजार में लोगों की भीड़ रही।
हर चौराहे पर बाजार में भीड़ ही भीड़ नजर आई। सोशल डिस्टेंसिंग भी लोग भूल गए हैं। बाजार में ग्राहक और व्यापारी दोनों सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। काफी दुकानों में ग्राहकों की भीड़ रहती है, और कुछ ऐसे ही हालात शहर की सड़कों पर भी है।