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साढ़े तीन लाख लोगों को कोरोनारोधी वैक्सीन की दूसरी डोज देना भूल गया स्वास्थ्य विभाग
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गोंडा। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बीच स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण में तेजी लाने का दावा ठोंक रहा, लेकिन लक्ष्य से कोसों दूर है। जिले के साढ़े तीन लाख लोगों को स्वास्थ्य विभाग कोरोनारोधी वैक्सीन की दूसरी डोज देना भूल गया है। साढ़े छह लाख लोग अभी वैक्सीन की पहली डोज वंचित हैं। ऐसे में 31 दिसंबर तक टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल है। जिस गति से टीका अभियान चल रहा है, उससे इस बात की उम्मीद करना बेमानी होगी कि यह अभियान समय से पूरा हो पाएगा।
कोरोना संक्रमण के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के प्रभाव को कम करने के लिए कारगर माने जा रहे टीकाकरण से जिले की बड़ी आबादी वंचित है। स्वास्थ्य विभाग 18 साल से अधिक आयु वाले लोगों को वैक्सीन की पहली डोज नहीं लगा सका। वहीं, ड्यू डेट के बाद लाखों लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लग सकी। जिले में 30 नवंबर तक 5,28,321 लोगों का वैक्सीन की दूसरी डोज लगाने की ड्यू थी। जिसमें 4,23,213 लोगों को कोविशील्ड तथा 1,05,108 लोगों को कोवैक्सीन की डोज लगनी थी। जिसमें 3,50,483 लोगों ने ड्यू डेट के बाद भी वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लगवाई। नियम के अनुसार, कोवैक्सीन से पहला डोज का टीका लेने के 28 दिन बाद एवं कोविशील्ड से पहला डोज का टीका लेने के 84 दिन से लेकर 112 दिन तक दूसरे डोज का टीकाकरण लेने का प्रावधान हैं। दूसरे डोज काटीका लेने के बाद कोरोना संक्रमण से बचाव संभव है।
कोरोना संक्रमण का दूसरा डोज न ले पाने की सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि पहली और दूसरी डोज के अंतराल में बार-बार परिवर्तन किए जाना। चिकित्सकों के अनुसार, पहली खुराक के बाद दूसरी के बीच चार सप्ताह का अंतर रखा गया था। इसके बाद छह सप्ताह फिर आठ सप्ताह और 12 सप्ताह कर दिया गया है। इसको लेकर वैक्सीनेशन पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। तमाम कोशिशों और जागरूकता अभियान के बावजूद अब भी गांवों में टीका लगवाने के लिए बूथों पर जाने से हिचक रहे हैं।
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गांवों में दूसरी डोज के लिए नहीं लगा कैंप
कोरोना टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान चलाकर गांव-गांव कोरोना टीकाकरण कराया जा रहा था। जिस गांव में पहली बार कैंप लगाकर टीका लगवा दिया है वहां पर दूसरी बार स्वास्थ्य विभाग की टीम जाना भूल गई। जिले के ज्यादातर लोग गांव में टीकाकरण कैंप के आयोजन का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार कैंप नहीं लगा रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गांवों में सरकारी राशन की दुुकानों पर कैंप लगाकर टीकाकरण किए जाने की बात कह रहे हैं। लेकिन अभी तक अधिकांश गांव ऐसे हैं जहां एक भी बार कैंप नहीं लगा है।
टीकाकरण की स्थित पर एक नजर
- 18 साल से अधिक उम्र वाले को टीकाकरण का लक्ष्य-23,86,024
- पहली डोज लगा- 17,39,225
- दूसरा डोज लगा- 8,46,618
- 30 नवंबर तक दूसरी डोज का ड्यू-5,28,321
- ड्यू डेट तक दूसरे डोज से वंचित लोग- 3,50,483
- टीकाकरण से वंचित लोगों को खोजने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में दस्तक दे रही है। ड्यू डेट के बाद भी वैक्सीन की डोज न लगवाने वालों के मोबाइल पर मैसेज जाता है। कॉल के माध्यम से भी उन्हे सूचित करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के दूसरे प्रदेशों में जाने के कारण वह दूसरी डोज नहीं लगवा पा रहे हैं।
पंकज तिवारी, मंडलीय वैक्सीन इंचार्ज
- टीकाकरण अभियान को गति देने के लिए टीमे बनाई गईं हैं। गांव-गांव जाकर व केंद्रो हर रोज करीब 22 हजार वैक्सीन लगाई जा रही हैं। जिसमें दूसरी डोज लेने वालों की संख्या अधिक होती है। वहीं कुछ लोग पहली डोज लगवाने के बाद महानगरों में चले गए जहां उन्होने दूसरी डोज लगवा लिया। जो पोर्टल पर नहीं दिख रहा है।
- डॉ. हरिगोविंद जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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कोरोना संक्रमण के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के प्रभाव को कम करने के लिए कारगर माने जा रहे टीकाकरण से जिले की बड़ी आबादी वंचित है। स्वास्थ्य विभाग 18 साल से अधिक आयु वाले लोगों को वैक्सीन की पहली डोज नहीं लगा सका। वहीं, ड्यू डेट के बाद लाखों लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लग सकी। जिले में 30 नवंबर तक 5,28,321 लोगों का वैक्सीन की दूसरी डोज लगाने की ड्यू थी। जिसमें 4,23,213 लोगों को कोविशील्ड तथा 1,05,108 लोगों को कोवैक्सीन की डोज लगनी थी। जिसमें 3,50,483 लोगों ने ड्यू डेट के बाद भी वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लगवाई। नियम के अनुसार, कोवैक्सीन से पहला डोज का टीका लेने के 28 दिन बाद एवं कोविशील्ड से पहला डोज का टीका लेने के 84 दिन से लेकर 112 दिन तक दूसरे डोज का टीकाकरण लेने का प्रावधान हैं। दूसरे डोज काटीका लेने के बाद कोरोना संक्रमण से बचाव संभव है।
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कोरोना संक्रमण का दूसरा डोज न ले पाने की सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि पहली और दूसरी डोज के अंतराल में बार-बार परिवर्तन किए जाना। चिकित्सकों के अनुसार, पहली खुराक के बाद दूसरी के बीच चार सप्ताह का अंतर रखा गया था। इसके बाद छह सप्ताह फिर आठ सप्ताह और 12 सप्ताह कर दिया गया है। इसको लेकर वैक्सीनेशन पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। तमाम कोशिशों और जागरूकता अभियान के बावजूद अब भी गांवों में टीका लगवाने के लिए बूथों पर जाने से हिचक रहे हैं।
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गांवों में दूसरी डोज के लिए नहीं लगा कैंप
कोरोना टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान चलाकर गांव-गांव कोरोना टीकाकरण कराया जा रहा था। जिस गांव में पहली बार कैंप लगाकर टीका लगवा दिया है वहां पर दूसरी बार स्वास्थ्य विभाग की टीम जाना भूल गई। जिले के ज्यादातर लोग गांव में टीकाकरण कैंप के आयोजन का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार कैंप नहीं लगा रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गांवों में सरकारी राशन की दुुकानों पर कैंप लगाकर टीकाकरण किए जाने की बात कह रहे हैं। लेकिन अभी तक अधिकांश गांव ऐसे हैं जहां एक भी बार कैंप नहीं लगा है।
टीकाकरण की स्थित पर एक नजर
- 18 साल से अधिक उम्र वाले को टीकाकरण का लक्ष्य-23,86,024
- पहली डोज लगा- 17,39,225
- दूसरा डोज लगा- 8,46,618
- 30 नवंबर तक दूसरी डोज का ड्यू-5,28,321
- ड्यू डेट तक दूसरे डोज से वंचित लोग- 3,50,483
- टीकाकरण से वंचित लोगों को खोजने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में दस्तक दे रही है। ड्यू डेट के बाद भी वैक्सीन की डोज न लगवाने वालों के मोबाइल पर मैसेज जाता है। कॉल के माध्यम से भी उन्हे सूचित करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के दूसरे प्रदेशों में जाने के कारण वह दूसरी डोज नहीं लगवा पा रहे हैं।
पंकज तिवारी, मंडलीय वैक्सीन इंचार्ज
- टीकाकरण अभियान को गति देने के लिए टीमे बनाई गईं हैं। गांव-गांव जाकर व केंद्रो हर रोज करीब 22 हजार वैक्सीन लगाई जा रही हैं। जिसमें दूसरी डोज लेने वालों की संख्या अधिक होती है। वहीं कुछ लोग पहली डोज लगवाने के बाद महानगरों में चले गए जहां उन्होने दूसरी डोज लगवा लिया। जो पोर्टल पर नहीं दिख रहा है।
- डॉ. हरिगोविंद जिला प्रतिरक्षण अधिकारी