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यूक्रेन से लौटे पांच और छात्र, परिजनों की आंखों में दिखी चमक
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फोटो-12-यूक्रेन के विनीसिया सिटी से बस से भारत आने की तैयारी में छात्र।
- फोटो : GONDA
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गोंडा। यूक्रेन में युद्ध के समय कलेजा का टुकड़ा फंसा हो तो परिजनों का हाल क्या होगा। इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। बेटे-बेटियों का हाल जानने और घर वापसी को लेकर माता-पिता की धड़कने बढ़ती जा रही हैं। जो छात्र घर पहुंच रहे हैं उनके माता-पिता बेटों को गले लगाकर दिल को तसल्ली देते दिख रहे हैं। आंखों से आंसू निकल रहे हैं। ऐसा ही माहौल उन गांवों में है जहां छात्र वापस पहुंचने वाले हैं। पांच छात्र वापस यूक्रेन से निकलकर दिल्ली आ गए हैं। कुछ छात्र यूक्रेन से पड़ोसी देश रोमानिया, पोलैंड, हंगरी व सोफिया में शरण लिए हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
यूक्रेन में फंसे छात्रों की मुश्किलें कम हो रही हैं। गुरुवार को पांच छात्र वतन वापस आ चुके हैं। अभी घर नहीं पहुंच सके हैं, लेकिन वतन लौटने से ही परिजनों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिजनों ने भारत सरकार का आभार जताया। जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने बताया कि यूक्रेन में फंसे जनपद के कुल 14 छात्रों में से पांच छात्रों की सकुशल वतन वापसी हो गई है। पांच छात्र पोलैंड सीमा पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि मध्य नगर निवासी आकाश सिंह, प्रभाकर पाण्डेय निवासी पूरे बल्देव पण्डित परसपुर, मो. नफीस निवासी विशुनपुर बेलभरिया, जैनुद्दीन अंसारी निवासी उजागरपुर रेहरवा थाना छपिया तथा मैनुद्दीन निवासी दौलतपुर खिराभा सकुशल वापस आ गए हैं। इसके अलावा प्रशांत कुमार सोनी उसकी बहन शालू सोनी निवासी खरगूपुर बाजार, शिखर गुप्ता निवासी कहारन पुरवा नवाबगंज गिर्द पोलैंड बार्डर पर एवं सुयश गुप्ता निवासी गांधी नगर करनैलगंज व विश्वमोहन सिंह निवासी आवास विकास कॉलोनी बड़गांव रोमानिया बार्डर पर पहुंच चुके हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि जिन छात्रों से संपर्क नहीं हो सका है उनके घर पर जिला प्रशासन की टीमें भेजकर उनके परिजनों को हर संभव मदद एवं उनके बच्चों की सकुशल वापसी के लिए आश्वस्त कराया जा रहा है।
चार छात्रों का नहीं मिल रहा हाल, परिवार बेचैन
जिले के चार छात्रों के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। वह अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। जिसमें अरुण कुमार त्रिवेदी मुंडेरवा कला, प्रिंस सोनी गोंडा, नीतीश कुमार यादव पंत नगर और आरती सोनी निवासी राजेन्द्र नगर तरबगंज रोड गोंडा से संपर्क न तो परिजनों का हो पा रहा है और न प्रशासन संपर्क कर पा रहा है। परिवारीजन बेचैन हैं। बच्चे कहां हैं और कैसे हैं, इसे लेकर तरह- तरह की चिंताएं बढ़ रही हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है कि संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। इन छात्रों के बारे में जानकारी न होने से परेशानी बढ़ी हुई है।
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खोला गया कंट्रोल रूम
जिलाधिकारी ने बताया कि यूक्रेन में फंसे जनपद के छात्रों एवं नागरिकों की मदद के लिए कलेक्ट्रेट में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। उन्होंने जनपद वासियों से अपील की है कि ऐसे व्यक्ति जिनका बेटा या बेटी अथवा कोई भी परिवारीजन अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हों वे कलेक्ट्रेट स्थित कन्ट्रोल रूम के नंबर 05262-230125, राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी रणवीर प्रसाद के मोबाइल नंबर 9454441081, टोल फ्री नंबर 0522-1070 पर कॉल करके मदद प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा राहत आयुक्त उप्र की ईमेल आईडी rahat@nic.in पर भी ईमेल करके संपर्क किया जा सकता है।
वतन के लिए निकले और पहुंच गए घर
यूक्रेन में युद्ध के हालात बनते देखकर पहले से भारतीय छात्रों में बेचैनी थी, लेकिन किसी के पास रुपये की कमी थी तो किसी को हालात में बदलाव की उम्मीद थी। लोग वहां इंतजार करते रहे, लेकिन दौलतपुर खिराभा के मैनुद्दीन को पहले ही युद्ध की आशंका हो गई थी। वह 23 फरवरी को ही घर आ गए। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि आशंका बढ़ रही थी। उन्हें लगा कि देर सबेरे युद्ध हो जाएंगे। माहौल सही नहीं दिख रहा था, इससे वह पहले ही घर के लिए चल दिए। वह युद्ध से पहले ही घर आ गए थे। यहां आकर युद्ध शुरू होने की जानकारी हुई तो बहुत दुख हुआ, क्योंकि कई साथी वहां फंसे हुए हैं। वह रोज अपने साथियों की सलामती के लिए दुआ मांगते हैं।
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यूक्रेन में फंसे छात्रों की मुश्किलें कम हो रही हैं। गुरुवार को पांच छात्र वतन वापस आ चुके हैं। अभी घर नहीं पहुंच सके हैं, लेकिन वतन लौटने से ही परिजनों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिजनों ने भारत सरकार का आभार जताया। जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने बताया कि यूक्रेन में फंसे जनपद के कुल 14 छात्रों में से पांच छात्रों की सकुशल वतन वापसी हो गई है। पांच छात्र पोलैंड सीमा पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि मध्य नगर निवासी आकाश सिंह, प्रभाकर पाण्डेय निवासी पूरे बल्देव पण्डित परसपुर, मो. नफीस निवासी विशुनपुर बेलभरिया, जैनुद्दीन अंसारी निवासी उजागरपुर रेहरवा थाना छपिया तथा मैनुद्दीन निवासी दौलतपुर खिराभा सकुशल वापस आ गए हैं। इसके अलावा प्रशांत कुमार सोनी उसकी बहन शालू सोनी निवासी खरगूपुर बाजार, शिखर गुप्ता निवासी कहारन पुरवा नवाबगंज गिर्द पोलैंड बार्डर पर एवं सुयश गुप्ता निवासी गांधी नगर करनैलगंज व विश्वमोहन सिंह निवासी आवास विकास कॉलोनी बड़गांव रोमानिया बार्डर पर पहुंच चुके हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि जिन छात्रों से संपर्क नहीं हो सका है उनके घर पर जिला प्रशासन की टीमें भेजकर उनके परिजनों को हर संभव मदद एवं उनके बच्चों की सकुशल वापसी के लिए आश्वस्त कराया जा रहा है।
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चार छात्रों का नहीं मिल रहा हाल, परिवार बेचैन
जिले के चार छात्रों के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। वह अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। जिसमें अरुण कुमार त्रिवेदी मुंडेरवा कला, प्रिंस सोनी गोंडा, नीतीश कुमार यादव पंत नगर और आरती सोनी निवासी राजेन्द्र नगर तरबगंज रोड गोंडा से संपर्क न तो परिजनों का हो पा रहा है और न प्रशासन संपर्क कर पा रहा है। परिवारीजन बेचैन हैं। बच्चे कहां हैं और कैसे हैं, इसे लेकर तरह- तरह की चिंताएं बढ़ रही हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है कि संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। इन छात्रों के बारे में जानकारी न होने से परेशानी बढ़ी हुई है।
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खोला गया कंट्रोल रूम
जिलाधिकारी ने बताया कि यूक्रेन में फंसे जनपद के छात्रों एवं नागरिकों की मदद के लिए कलेक्ट्रेट में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। उन्होंने जनपद वासियों से अपील की है कि ऐसे व्यक्ति जिनका बेटा या बेटी अथवा कोई भी परिवारीजन अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हों वे कलेक्ट्रेट स्थित कन्ट्रोल रूम के नंबर 05262-230125, राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी रणवीर प्रसाद के मोबाइल नंबर 9454441081, टोल फ्री नंबर 0522-1070 पर कॉल करके मदद प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा राहत आयुक्त उप्र की ईमेल आईडी rahat@nic.in पर भी ईमेल करके संपर्क किया जा सकता है।
वतन के लिए निकले और पहुंच गए घर
यूक्रेन में युद्ध के हालात बनते देखकर पहले से भारतीय छात्रों में बेचैनी थी, लेकिन किसी के पास रुपये की कमी थी तो किसी को हालात में बदलाव की उम्मीद थी। लोग वहां इंतजार करते रहे, लेकिन दौलतपुर खिराभा के मैनुद्दीन को पहले ही युद्ध की आशंका हो गई थी। वह 23 फरवरी को ही घर आ गए। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि आशंका बढ़ रही थी। उन्हें लगा कि देर सबेरे युद्ध हो जाएंगे। माहौल सही नहीं दिख रहा था, इससे वह पहले ही घर के लिए चल दिए। वह युद्ध से पहले ही घर आ गए थे। यहां आकर युद्ध शुरू होने की जानकारी हुई तो बहुत दुख हुआ, क्योंकि कई साथी वहां फंसे हुए हैं। वह रोज अपने साथियों की सलामती के लिए दुआ मांगते हैं।