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जिला अस्पताल में फर्श पर दो घंटे तड़पता रहा मरीज
अमर उजाला/गोंडा।
Updated Mon, 26 Sep 2016 11:38 PM IST
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जिला अस्पताल में फर्श पर पड़ा मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल में एक बार फिर चिकित्सकों की संवेदनहीनता देखने को मिली। 15 दिनों से टाइफाइड से बीमार युवक यहां दो घंटे तक अस्पताल की फर्श पर तड़पड़ता रहा, लेकिन डॉक्टरों ने ध्यान नहीं दिया।
शासन से लेकर जिले तक के अधिकारी कितने ही प्रयास क्यों न करें, लेकिन सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी संवेदना को दूर रखकर ही नौकरी करते हैं। यहां के बेलसर अमदही निवासी अजय बांदा में बिजली का काम करता है।
उसे वहां टायफाइड बुखार हो गया। वहां इलाज के दौरान बुखार से पीड़ित अजय की श्रवण शक्ति चली गई और हाथ-पैर ने भी काम करना बंद कर दिया। वहां कोई राहत न मिलते देख अजय गांव लौट आया। य
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हां पत्नी तथा गोंडा शहर की निवासी एक महिला उसे लेकर जिला अस्पताल में इलाज कराने आई। करीब 11 बजे इन लोगों ने ओपीडी में लंबी लाइन लगाकर डॉ. समीर गुप्त को दिखाया। अजय की पत्नी के मुताबिक डॉक्टर ने खून की जांच कराना लिखकर उसकी रिपोर्ट अगले दिन दिखाने की बात कही।
अजय की खून की जांच कराने के बाद उसके परिवारीजन रिपोर्ट आने का इंतजार करने लगे। डॉक्टर की ओपीडी के सामने अस्पताल की फर्श पर पत्नी की गोद में सिर रखे अजय करीब दो घंटे तक छटपटाता रहा। इस दौरान कई जिम्मेदार अधिकारी व चिकित्सक उधर से गुजरे, लेकिन किसी ने इसकी पीड़ा जानने की कोशिश नहीं की। बाद में कुछ लोगों के कहने पर पत्नी व उसके रिश्तेदार उसे आपातकालीन कक्ष ले गए, जहां उसे भर्ती ले लिया गया।
जिला अस्पताल में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ गई है। यहां सर्दी-जुखाम से पीड़ित बच्चे अधिक आ रहे हैं। हालत यह है कि पूरा चिल्ड्रेन वार्ड भर गया है। परसपुर के रिंकू की पांच साल की पुुत्री नैंसी, परसपुर निवासी राजेंद्र सिंह डेढ़ माह की अंश व अशिंका, निगवा बोध के रामनरेेश का नौ माह का बेटा राहुल, टेड़िया मादे के निवासी मनोज का दो माह का पुत्र राज सहित अन्य कई बच्चे सर्दी व जुखाम से पीड़ित हैं, जिन्हें जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराया गया है।
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शासन से लेकर जिले तक के अधिकारी कितने ही प्रयास क्यों न करें, लेकिन सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी संवेदना को दूर रखकर ही नौकरी करते हैं। यहां के बेलसर अमदही निवासी अजय बांदा में बिजली का काम करता है।
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उसे वहां टायफाइड बुखार हो गया। वहां इलाज के दौरान बुखार से पीड़ित अजय की श्रवण शक्ति चली गई और हाथ-पैर ने भी काम करना बंद कर दिया। वहां कोई राहत न मिलते देख अजय गांव लौट आया। य
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हां पत्नी तथा गोंडा शहर की निवासी एक महिला उसे लेकर जिला अस्पताल में इलाज कराने आई। करीब 11 बजे इन लोगों ने ओपीडी में लंबी लाइन लगाकर डॉ. समीर गुप्त को दिखाया। अजय की पत्नी के मुताबिक डॉक्टर ने खून की जांच कराना लिखकर उसकी रिपोर्ट अगले दिन दिखाने की बात कही।
अजय की खून की जांच कराने के बाद उसके परिवारीजन रिपोर्ट आने का इंतजार करने लगे। डॉक्टर की ओपीडी के सामने अस्पताल की फर्श पर पत्नी की गोद में सिर रखे अजय करीब दो घंटे तक छटपटाता रहा। इस दौरान कई जिम्मेदार अधिकारी व चिकित्सक उधर से गुजरे, लेकिन किसी ने इसकी पीड़ा जानने की कोशिश नहीं की। बाद में कुछ लोगों के कहने पर पत्नी व उसके रिश्तेदार उसे आपातकालीन कक्ष ले गए, जहां उसे भर्ती ले लिया गया।
जिला अस्पताल में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ गई है। यहां सर्दी-जुखाम से पीड़ित बच्चे अधिक आ रहे हैं। हालत यह है कि पूरा चिल्ड्रेन वार्ड भर गया है। परसपुर के रिंकू की पांच साल की पुुत्री नैंसी, परसपुर निवासी राजेंद्र सिंह डेढ़ माह की अंश व अशिंका, निगवा बोध के रामनरेेश का नौ माह का बेटा राहुल, टेड़िया मादे के निवासी मनोज का दो माह का पुत्र राज सहित अन्य कई बच्चे सर्दी व जुखाम से पीड़ित हैं, जिन्हें जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराया गया है।